गोवा आज भारत का एक सुंदर और शांत राज्य है, लेकिन इसका अतीत बहुत ही दर्दनाक रहा है। लगभग 451 वर्षों (1510 से 1961) तक गोवा पर पुर्तगालियों का शासन रहा। यह भारत की सबसे लंबी विदेशी गुलामी थी। इस दौरान गोवा के मूल निवासियों विशेषकर हिंदुओं को भारी अत्याचार, अपमान और धर्मांतरण का सामना करना पड़ा। यह इतिहास आज भी बहुत कम बताया जाता है।
गोवा पर पुर्तगालियों का कब्जा
साल 1510 में पुर्तगाली सेनापति अल्फोंसो द अल्बुकर्क ने गोवा पर हमला कर कब्जा कर लिया। उस समय गोवा एक समृद्ध हिंदू क्षेत्र था, जहां मंदिर, गुरुकुल और भारतीय संस्कृति फली-फूली थी। लेकिन पुर्तगालियों के आने के बाद सब कुछ बदल गया। उनका उद्देश्य केवल व्यापार नहीं था, बल्कि ईसाई मत फैलाना और भारतीय संस्कृति को खत्म करना भी था।
हिंदू धर्म पर सीधा हमला
पुर्तगालियों ने सबसे पहले हिंदू धर्म को निशाना बनाया। हजारों मंदिर तोड़े। मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया। धार्मिक अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हिंदुओं को अपने ही धर्म का पालन करने की अनुमति नहीं थी। पूजा करना, तिलक लगाना, तुलसी रखना, यहां तक कि हिंदू नाम रखना भी अपराध बना दिया गया।
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जबरन धर्मांतरण की क्रूर नीति
पुर्तगालियों की सबसे अमानवीय नीति थी जबरन धर्मांतरण। लोगों को डराया-धमकाया गया, लालच दिया गया और मना करने पर सज़ा दी गई। गरीबों को खाने, नौकरी और जमीन का लालच देकर ईसाई बनाया गया। कई परिवारों को मजबूर किया गया कि वे या तो धर्म बदलें या गोवा छोड़ दें। साल 1560 में पुर्तगालियों ने गोवा में इनक्विज़िशन (धार्मिक अदालत) की शुरुआत की। यह इतिहास का सबसे काला अध्याय था। इस अदालत में लोगों पर झूठे आरोप लगाए जाते थे, उन्हें जेल में डालकर यातनाएँ दी जाती थीं, जिंदा जलाया जाता था, हाथ-पैर तोड़े जाते थे। यदि किसी हिंदू ने छुपकर पूजा की, मंत्र पढ़ा या उपवास रखा, तो उसे अपराधी माना जाता था। कई निर्दोष लोगों को मौत की सजा दे दी गई।
हिंदू समाज को तोड़ने की कोशिश
पुर्तगालियों ने हिंदू समाज की जड़ों को कमजोर करने के लिए जाति व्यवस्था को तोड़ा, हिंदू त्योहारों पर रोक लगाई, संस्कृत और कोंकणी भाषा को दबाया, यहां तक कि कोंकणी भाषा में बोलना भी अपराध माना गया। पुर्तगाली भाषा को जबरदस्ती थोपा गया। महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार, महिलाओं के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया। कई महिलाओं को जबरन ईसाई बनाया गया। बच्चों को माता-पिता से छीनकर चर्च भेजा गया। यह सब इसलिए किया गया ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति भूल जाएं।
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गोवा की आजादी की लड़ाई
भारत 1947 में आजाद हो गया, लेकिन गोवा अब भी पुर्तगालियों के कब्ज़े में था। गोवा के लोगों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान दी। अंततः 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत गोवा को आजाद कराया। इस तरह 451 वर्षों की गुलामी का अंत हुआ। पुर्तगाली शासन ने गोवा को बहुत घाव दिए, लेकिन गोवा के लोगों ने अपनी संस्कृति को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया। आज गोवा भारत का अभिन्न अंग है।

















