कर्नल सोनम वांगचुक: कारगिल युद्ध का वह हीरो जिससे थर्रा उठी थी पाकिस्तानी सेना
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कर्नल सोनम वांगचुक: कारगिल युद्ध का वह हीरो जिससे थर्रा उठी थी पाकिस्तानी सेना

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कर्नल सोनम वांगचुक (रिटायर्ड) ने शुक्रवार को अंतिम सांस ली। उनकी वीरता की कहानियां आज भी भारतीय सैन्य अकादमी और लद्दाख के घर-घर में सुनाई जाती हैं।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Mahak Singh
Apr 11, 2026, 11:06 am IST
in भारत
कर्नल सोनम वांगचुक

कर्नल सोनम वांगचुक

भारत माता के वीर सपूत और कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक नायक कर्नल सोनम वांगचुक (महावीर चक्र) का शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 की सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर पाकिस्तान के दांत खट्टे करने वाले इस जांबाज योद्धा को दुनिया ‘लद्दाख के शेर’ के नाम से जानती है। उनके जाने से न केवल भारतीय सेना, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कर्नल सोनम वांगचुक (रिटायर्ड) ने शुक्रवार को अंतिम सांस ली। उनकी वीरता की कहानियां आज भी भारतीय सैन्य अकादमी और लद्दाख के घर-घर में सुनाई जाती हैं। कर्नल वांगचुक उन विरले योद्धाओं में से थे जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी दुश्मन के सामने घुटने नहीं टेके।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भावुक श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर सबसे पहले भारतीय सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र कुमार जोशी (वाई के जोशी) ने साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यानी ट्विटर पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “महावीर चक्र विजेता कर्नल सोनम वांगचुक के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। वे कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे। उनकी बहादुरी और निस्वार्थ सेवा को राष्ट्र सदैव नमन करेगा।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक्स पर लिखा-“कर्नल सोनम वांगचुक के निधन से गहरा दुख हुआ। वह भारतीय सेना के एक उच्च सम्मानित अधिकारी थे, जो अपनी वीरता, दृढ़ नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध थे। लद्दाख के इस गौरवशाली पुत्र का जीवन साहस, बलिदान और राष्ट्रीय एकता का प्रमाण बना हुआ है और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

18000 फीट की ऊंचाई पर पाकिस्तानी सेना को खदेड़ा

कर्नल वांगचुक की वीरता का सबसे बड़ा प्रमाण कारगिल युद्ध के दौरान देखने को मिला। तब मेजर के पद पर तैनात वांगचुक ने लद्दाख स्काउट्स की चौथी बटालियन का नेतृत्व किया था। जून 1999 में जब युद्ध अपने चरम पर था, वांगचुक को 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘चोरबाट ला’ दर्रे पर कब्जा करने का मिशन सौंपा गया। बर्फीले रास्ते और बेहद खतरनाक मौसम के बीच वांगचुक केवल 40 सैनिकों की एक छोटी सी यूनिट के साथ पहाड़ पर चढ़े।

तीन दिनों तक चली आमने-सामने की जंग में उन्होंने और उनके जवानों ने वीरता का ऐसा परिचय दिया कि 136 पाकिस्तानी सैनिकों को वहां से भागने पर मजबूर कर दिया। यह मिशन कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जीतों में से एक माना जाता है क्योंकि इसने लेह की ओर दुश्मन की बढ़त को पूरी तरह रोक दिया था।

कर्नल सोनम वांगचुक का सैन्य सफर

कर्नल वांगचुक का जन्म 11 मई, 1964 को लद्दाख के लेह जिले के शंकर गांव में हुआ था। उनके रग-रग में देश प्रेम भरा था, इसलिए उन्होंने भारतीय सेना में जाने का सपना साकार किया। उन्होंने भारतीय सेना को अपनी जिंदगी के तीन गौरवशाली दशक समर्पित किए। उनके नेतृत्व में लद्दाख स्काउट्स ने एक नई पहचान बनाई।

महावीर चक्र विजेता

18000 फीट की ऊंचाई पर दिखाए गए उनके अदम्य साहस और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े सैन्य सम्मान ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया। सेना के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए वे साल 2018 में रिटायर हुए, लेकिन वे हमेशा पूर्व सैनिकों और युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बने रहे।

क्यों कहे जाते थे ‘लद्दाख के शेर’?

स्थानीय लोग उन्हें ‘लद्दाख का शेर’ (लायन ऑफ लद्दाख) इसलिए कहते थे क्योंकि वे अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। कारगिल के दौरान, जब संसाधन सीमित थे और दुश्मन ऊंचाई पर बैठकर गोलियां बरसा रहा था तब वांगचुक की लीडरशिप ने लद्दाख के युवाओं में जोश भर दिया था। उन्होंने साबित किया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।

Topics: Operation VijayColonel Sonam WangchukKargil War HeroLion Of LadakhMaha Vir ChakraLadakh ScoutsChorbat La VictoryArmy LegendIndian Armynational hero
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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