तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने मदुरै जिले में तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के ऊपर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ को मुस्लिमों की संपत्ति बताया है। वक्फ बोर्ड ने मद्रास हाईकोर्ट में मंगलवार (16 दिसंबर) को दावा किया कि तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के ऊपर स्थित पत्थर का स्तंभ सिकंदर बादशाह दरगाह के अधीन आता है। यह मामला तब सामने आया जब एक याचिका में सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर प्रबंधन को तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की एक चोटी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ ‘दीपाथून’ पर ‘कार्तिकई दीपम’ जलाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
पत्थर के स्तंभ तक पहुंचने के लिए केवल दरगाह का रास्ता
वक्फ बोर्ड के वकील ने 1920 में एक सिविल मुकदमे में दिए गए न्यायिक आदेश का हवाला देते हुए जस्टिस जी जयचंद्रन और के के रामकृष्णन की खंडपीठ को बताया कि उस समय यह पाया गया था कि नेल्लिथोपे से पहाड़ी तक जाने वाली सीढ़ियां दरगाह की संपत्ति हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी की चोटी और उसके आसपास का इलाका, जिसमें वह जगह भी शामिल है जहां पत्थर का स्तंभ और एक मंडपम भी है, वह भी मुस्लिमों का है। वकील ने आगे जोर देकर कहा कि पत्थर के स्तंभ तक केवल दरगाह के रास्ते से पहुंचा जा सकता है। आने-जाने के अधिकार का मामला केवल सिविल कोर्ट में ही तय किया जा सकता है।
पिछले आदेशों में दीप स्तंभ का कोई उल्लेख नहीं
इसके आलावा मदुरै जिला कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 1996 और 2014 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए पिछले आदेशों में दीप स्तंभ (दीपक जलाने के लिए पत्थर का स्तंभ) का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि यह स्तंभ ही दीप स्तंभ है। वहीं याचिकाकर्ता द्वारा मंदिर अधिकारियों को दी गई याचिका में भी ‘दीपाथून’ का कोई जिक्र नहीं है।
सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर का निर्माण पहले हुआ था
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर की शुरुआत में तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के पास कार्तिकई दीपम त्योहार के समय अराजकता फैल गई। यह विवाद पत्थर के दीप स्तंभ पर पवित्र दीप नहीं जला पाने के कारण शुरू हुआ। बताया जाता है कि इस पहाड़ी पर सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह स्थित है। यह दरगाह 17वीं शताब्दी में बनी थी। इससे साफ होता है कि मंदिर के बहुत बाद यहाँ दरगाह का निर्माण हुआ था।
बीजेपी ने डीएमके सरकार पर बोला हमला
वहीं दीपम विवाद को लेकर बीजेपी ने डीएमके सरकार पर हमला बोला था। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा था, “यह डीएमके की संविधान विरोधी और सनातन विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। हिंदुओं को प्राचीन स्तंभ पर पवित्र कीर्तिकई दीपम जलाने की अनुमति देने वाले न्यायालय के आदेश के बावजूद डीएमके सरकार और उनकी पुलिस ने हिंदुओं के साथ गुंडों जैसा व्यवहार किया।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह डीएमके का असली चेहरा है। उनकी पार्टी लगातार हिंदुओं पर हमला करती है और सनातन मान्यताओं को खत्म करने की कोशिश करती है।

















