बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने एक सार्वजनिक रैली में भारत विरोधी बयानबाजी करते हुए खुलेआम धमकी दी है। शेख हसीना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के प्रमुख सूत्रधार रहे अब्दुल्ला ने भारत को निशाना बनाते हुए गंभीर उकसावे वाले शब्दों का इस्तेमाल किया।
पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-थलग करने की धमकी
शहीद मीनार पर आयोजित सर्वदलीय विरोध रैली में हसनत अब्दुल्ला ने कहा कि अगर बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई, तो भारत के सेवन सिस्टर्स यानी पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-थलग कर दिया जाएगा। यह बयान भारत की संप्रभुता के खिलाफ सीधी धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
इंकलाब मंच की रैली
यह रैली इंकलाब मंच द्वारा अपने प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में आयोजित की गई थी। हादी को शुक्रवार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी और गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर भेजा गया है। उनकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
हसनत अब्दुल्ला ने बिना किसी सबूत के आरोप लगाया कि भारत बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों को शरण और समर्थन दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि सीमा पार हत्याओं और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के पीछे भारत समर्थित समूह हैं।
क्षेत्रीय अशांति की चेतावनी
अब्दुल्ला ने कहा कि अगर बांग्लादेश की संप्रभुता, मतदान अधिकार और मानवाधिकारों का सम्मान नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पूरे दक्षिण एशिया में अशांति फैल सकती है और विरोध की आग सीमाओं के पार जा सकती है।
भारत पर बेबुनियाद आरोप
एनसीपी के दक्षिणी क्षेत्र के मुख्य संयोजक अब्दुल्ला ने यह भी आरोप लगाया कि भारत बांग्लादेश विरोधी ताकतों को हथियार, फंड और प्रशिक्षण दे रहा है। उन्होंने यूनुस सरकार से भारत के खिलाफ सख्त और स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
एनसीपी नेताओं की भारत विरोधी टिप्पणियां
इसी मंच से नेशनल सिटिजन पार्टी के उत्तरी क्षेत्र के मुख्य संयोजक सरजिस आलम ने भी भारत के खिलाफ बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक भारत शेख हसीना को शरण देता रहेगा, तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते।
भारतीय उच्चायोग पर भी सवाल
सरजिस आलम ने यह तक कहा कि अगर भारतीय उच्चायोग बांग्लादेशी जनता की मांगों को नई दिल्ली तक नहीं पहुंचा पाता, तो उसकी मौजूदगी का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस बयान को कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन माना जा रहा है।
















