नई दिल्ली। जिस कांग्रेस पार्टी के बारे में महात्मा गांधी ने कहा था कि इसे समाप्त कर देना चाहिए, वह पार्टी राष्ट्रनिष्ठ संगठन आरएसएस के खिलाफ अक्सर जहर उगलती है। अपनी राजनीति में संघ को घसीटती है। तुष्टिकरण की नाव पर टिकी कांग्रेस को जनता ने भी नकार दिया है। इसने वंदेमातरम को खंड-खंड तो किया ही देश के विभाजन में भी इसकी भूमिका है। इसके नेताओं ने आजादी के समय ही नहीं, आजादी के बाद भी वंदे मातरम का अपमान किया है।
संसद में वंदेमातरम पर हुई चर्चा में भी कांग्रेस और इसके सहयोगियों ने संघ पर प्रहार किए। सदन में भ्रामक तथ्य रखे गए। लेकिन अब लोग इन नेताओं की तुष्टिकरण की राजनीति को पहचान गए। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को एक पत्र भेजकर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर सदन में हुई चर्चा के दौरान उठे प्रश्नों के संदर्भ में नौ घटनाओं का तथ्य अभिलेख सौंपा है। ये सभी घटनाएं उन अवसरों से संबंधित हैं, जब विभिन्न जनप्रतिनिधियों या राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों ने वंदे मातरम् के सम्मान में अस्वीकार्य आचरण किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने सौंपी लिस्ट
अमित शाह ने अपने पत्र में बताया कि चर्चा के दौरान उन्होंने ऐसी चुनिंदा घटनाओं का उल्लेख किया था और सांसद जयराम रमेश ने उनसे अनुरोध किया कि इन घटनाओं की प्रमाणित जानकारी सदन के पटल पर रखी जाए। इसी के मद्देनज़र गृह मंत्री ने सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध इन घटनाओं का संक्षिप्त विवरण और उनसे संबंधित यूट्यूब व वेब लिंक राज्यसभा सचिवालय को सौंपे हैं। उन्होंने सभापति से अनुरोध किया है कि इन तथ्यों को राज्यसभा के आधिकारिक अभिलेख में शामिल करने की कृपा करें।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् से जुड़े नौ अस्वीकार्य आचरण—
– सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 8 दिसंबर 2025 को धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए वंदे मातरम् गाने से इनकार किया।
– नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद मेहदी ने 8 दिसंबर 2025 को संसद चर्चा के दौरान वंदे मातरम् गाने से मना किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए संभव नहीं है।
– समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने 2025 में अपने दादा के वंदे मातरम् न गाने के रुख का समर्थन किया।
– वर्ष 2018 में कांग्रेस की एक रैली में वंदे मातरम् का केवल एक छंद गाया गया और राहुल गांधी के पहुंचने की प्रतीक्षा में गीत को एक पंक्ति में समाप्त करने का निर्देश के.सी. वेणुगोपाल ने दिया।
– कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने 2019 में धार्मिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए वंदे मातरम् गाने से इनकार किया।
– कांग्रेस के सिद्धारमैया ने 2022 में संविधान दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से वंदे मातरम् न गाने को कहा। इसका वीडियो भी उपलब्ध है।
– समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2025 में स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य करने वाले आदेश को रद्द करने की मांग की।
– राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) विधायक सऊद आलम ने 2025 में बिहार विधानसभा में वंदे मातरम् के दौरान खड़े होने से इनकार किया।
राज्यसभा के रिकार्ड में शामिल करने का अनुरोध
गृह मंत्री द्वारा भेजे गए संलग्न दस्तावेज में इन सभी घटनाओं का सार तथा उनसे जुड़े लिंक दर्ज किए गए हैं, जिन्हें राज्यसभा रिकार्ड में सम्मिलित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

















