छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और नक्सल प्रभावित क्षेत्र विकास की राह पर हैं। इसका सरकार के राजकोष पर कितना सकारात्मक असर देखते हैं?
छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में यह अहम मोड़ है। आज जिस मोड़ पर हम खड़े हैं, वह निश्चित तौर पर बहुत बड़ा है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बस्तर केरल से बड़ा और दिल्ली से 30 गुना बड़ा है। ऐसे में यहां नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है, जो हमारी सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में यह कार्य शुरू हुआ है। उम्मीद है कि जल्दी ही नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। नक्सलवाद के खत्म होने से राज्य में विकास की अनंत संभावनाएं खुल सकती हैं, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ का 40 प्रतिशत भाग वनों से ढका है। यहां बहुत ही अद्भुत वन संपदा है और यहां पर्यटन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। बस्तर के धुड़मारस गांव को यूनेस्को ने दुनिया के अच्छे 20 पर्यटन गांवों में से एक चुना है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ने विश्व धरोहर केंद्र के तौर पर चुना है।
बस्तर में जैविक खेती की क्या स्थिति है?
देश में जैविक खेती के मामले में सिक्किम की चर्चा होती है, लेकिन बस्तर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दंतेवाड़ा जिले में 70 फीसदी जैविक खेती होती है। यह पूरे सिक्किम के कुल कृषि क्षेत्र से अधिक बड़ा है। इसके अलावा आने वाले समय में यहां की हवा की गुणवत्ता की चर्चा होगी। दिल्ली के हालात सब देख चुके हैं। नवा रायपुर का 28 फीसद क्षेत्र हरा-भरा है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 50 के आसपास है। आने वाले वक्त में यह होगा कि जहां की हवा शुद्ध होगी, वहां लोग घंटे के हिसाब से पैसा चुकाने को
तैयार होंगे।

बस्तर की जनजातियों के लिए आपकी कोई विशेष कार्ययोजना है?
बस्तर सांस्कृतिक तौर पर अद्वितीय है। बस्तर के वनवासियों की अपनी भावनाएं भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हम सभी को अपनी नीतियां बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। निश्चित तौर पर हम बस्तर की जनजातियों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेंगे। मैं दंतेवाड़ा का कलेक्टर रहा हूं। उस दौरान वहां की स्थानीय संस्कृति को देखकर मुझे अपने शिक्षा तंत्र पर अफसोस हुआ कि जिन लोगों ने जीवनभर बस्तर में झरनों का पानी पिया था, उन्हें हम ‘न’ से ‘नल’ पढ़ा रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था वहां के लोगों को एक तरह से प्रताड़ित करती है, हमें इस तरह की संवेदनाओं को भी ध्यान में रखना होगा।
विकास को लेकर सरकार की दीर्घकालीन योजनाएं क्या हैं?
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान 30 फीसदी के आसपास है, वहीं देश की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान 55 प्रतिशत है। अपने प्राकृतिक संसाधनों— कोयला, लोहा, सीमेंट आदि-के कारण हम थोड़े मजबूत हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ केवल इसी के लिए न जाना जाए, इसको ध्यान में रखते हुए विविध क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट-2047 को भी ध्यान में रखा जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के तहत अस्पताल और नए उभरते क्षेत्रों को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदूषण-रहित और अधिक रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश है। उद्योेग से जुड़ी नई नीति में यह निर्णय लिया गया है कि जो लोग हमारे युवाओं को अधिक रोजगार देंगे, उन्हें ही छूट मिलेगी। पर्यटन के क्षेत्र में नौकरियां बनाने पर आर्थिक छूट दी जा रही है। नवा रायपुर को हमने तेजी से विवाह केंद्र के तौर पर विकसित किया है। इससे रोजगार बढ़ता है। इसके अलावा नवा रायपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी नवा रायपुर में देश का पहला एआई सेंटर स्थापित किया गया है।
क्या नक्सलवाद के खात्मे के साथ निजी कंपनियों का आत्मविश्वास बढ़ा है?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और आदरणीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद का खात्मा हो रहा है। इस कारण राज्य में अतुलनीय परिवर्तन आए हैं। सरकार की नीतियों के कारण न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पहले चाहे पर्यटन हो या फिर कोई और क्षेत्र, उसमें दृष्टिकोण एक सबसे बड़ी समस्या थी। अब जैसे-जैसे नक्सलवाद खत्म होता जा रहा है, वैसे -वैसे लोगों में सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। यह आत्मविश्वास का ही परिणाम है।
















