बलूचिस्तान में फिर सैन्य गोलीबारी! लोगों ने बताया- “जेनोसाइड”
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बलूचिस्तान में फिर सैन्य गोलीबारी! लोगों ने बताया- “जेनोसाइड”

पाकिस्तान के केच जिले में सेना की गोलीबारी से 5 बलूची युवतियाँ घायल, एक की मौत। घटना के बाद उग्र प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Dec 3, 2025, 04:29 pm IST
inविश्व

बलूचिस्तान में एक बार फिर से आम लोग पाकिस्तान का शिकार हो रहे हैं और इस बार पाँच महिलाएं शिकार हुई हैं। पाकिस्तान में केच जिले के होशप क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा की गई गोलीबारी के दौरान पाँच युवतियाँ घायल हो गईं और जिनमें से एक पीडिता, जो गंभीर रूप से घायल थी, उसकी मृत्यु हो गई। और इस मृत्यु के बाद एक बार फिर से बलूचिस्तान के लोगों में गुस्से की लहर है।

इस घटना के बाद लोगों ने एक बार फिर से सड़क का रुख किया है और वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 28 नवंबर को यह घटना हुई थी और इसमें एक आवासीय क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। आवासीय क्षेत्र में गोलीबारी के कारण स्थानीय नागरिकों में अफरातफरी मच गई थी।

इस गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुई आजीजा नसीर को पहले तुरबत टीचिंग हॉस्पिटल में लेकर जाया गया, मगर स्थिति गंभीर होने के कारण उसे करांची भेज दिया गया। मगर करांची जाने के रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई थी। नसीर की इस प्रकार से मृत्यु के बाद क्रोधित परिजनों और स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतर ये और उन्होनें एम8 हाईवे पर पूरी तरह से यातायात को रोक दिया।

कार्यकर्ताओं ने फिर से जेनोसाइड की बात दोहराई

पाकिस्तान में बलूचिस्तान लगातार हिंसा का शिकार होता रहा है और अभी भी हो रहा है। बलूचिस्तान अपने आप को पाकिस्तान का अंग नहीं मानता है और पाकिस्तान से आजाद होने के लिए वहाँ पर लगातार आंदोलन होते रहते हैं। साथ ही हिंसक घटनाएं भी होती रहती हैं। पाकिस्तान की सरकार भी विद्रोही स्वरों को दबाने के लिए लगातार दमनात्मक कार्यवाही करती रहती है। हजारों लोग अभी तक लापता है और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का लगातार हनन पाकिस्तान द्वारा किया जाता रहा है।

बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच ने एक्स पर इस घटना के विषय में लिखा कि यह त्रासदी राज्य द्वारा लगातार बलूच लोगों पर की जा रही हिंसा की घटना है। और यह घटना बलूच लोगों के लगातार हो रहे जीनोसाइड को बताती हैं, मगर फिर भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस अत्याचार के खिलाफ अपनी चुप्पी नहीं टोडी है।

उन्होनें आगे लिखा कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार द्वारा लगातार दमन किया जा रहा है। लोगों का बलात गायब होना, क्षत विक्षत शवों का मिलना, घरों पर छापेमारी, और आम लोगों पर गोलीबारी और बमबारी जैसी घटनाएं इस सीमा तक होती हैं कि छोटे बच्चे और लड़कियां भी सुरक्षित नहीं हैं। बलोच नागरिकों की उनकी ही भूमि पर हत्याएं हो रही हैं और सरकार अपने दमनचक्र को लगातार बढ़ा रहा है।

पाकिस्तान सरकार लगातार यह दावा करती रहती है कि उसने बलोच विद्रोह का दमन कर दिया है और इसके प्रमाण में वह अक्सर ही क्षतविक्षत शवों को दिखाती रहती है। ऐसे में कई बार ये प्रश्न भी उठते हैं कि क्या ये आम नागरिकों के शव तो नहीं हैं और पाकिस्तान की नजर में विद्रोहियों की परिभाषा क्या है? क्योंकि बलूचिस्तान के लोग यह मानते हैं कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर अनाधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है।

बलूचिस्तान 11 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था, परंतु पाकिस्तान ने अपनी सैनिक ताकत के बल पर इस क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया था और तभी से पाकिस्तान के कब्जे से अपनी जमीन को आजाद कराने के लिए बलूच के राष्ट्रवादी लोग संघर्ष कर रहे हैं तो वहीं पाकिस्तान इन विद्रोहों को दबाने का दावा करता रहता है।

बलूचिस्तान एक प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्र है और बलूच राष्ट्रवादियों का यह कहना है कि पाकिस्तान उनके संसाधनों का दोहन अपने लाभ के लिए करता है।

सारी लड़ाई इसी अवैध कब्जे की है और 1948 से लेकर अब तक असंख्य लोग मारे जा चुके हैं, कुछ विद्रोहियों के नाम पर तो कुछ आतंकियों के नाम पर। लोगों को जबरन घर से उठा ले जाना और अत्याचार के बाद उनकी रक्तरंजित लाश मिलना बहुत आम है और वहाँ के लोग काफी लंबे समय से पाकिस्तान सरकार पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगा रहे हैं, परंतु दुर्भाग्य से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अभी इस ओर दृष्टि गई नहीं है।

उल्टा बलूच विद्रोहियों के कारण वे पाकिस्तान को ही आतंकी पीड़ित देश मानने लगे हैं, जबकि वास्तविकता पूरी तरह से उलट है।

अधिकार समूह व्यवस्थागत हिंसा की ओर ध्यानाकर्षित कर चुके हैं

मानवाधिकार संगठन पाँक द्वारा अक्टूबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार बलूचिस्तान में बलात अपहरण और न्यायेतर हत्याएं भी हो रही हैं। इस रिपोर्ट ने बताया कि किस प्रकार से बलूचिस्तान में “सुनियोजित राज्य-प्रायोजित हिंसा” हो रही है और जिसे और कोई नहीं बल्कि पाकिस्तानी सुरक्षा संस्थान और उनकी सहयोगी सेनाएं कर रही हैं। वे उस प्रांत से कभी भी किसी को उठा लेती हैं और और हत्या कर देती हैं।

बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार पाँक ने अक्टूबर में ही अकेले अपहरण के 87 मामले दर्ज किये और पीड़ितों को कथित रूप से उनके घरों, सड़कों और बाजारों से उठा लिया गया था। उनमें से 18 लोगों को बाद में छोड़ दिया गया, मगर उन्होनें बताया कि किस प्रकार उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्हें पीटा गया, उन्हें करंट मारा गया।

Topics: मानवाधिकार हननपाकिस्तान सेनापाकिस्तान अत्याचारबलूचिस्तान हिंसामहिलाओं पर गोलीबारीराज्य प्रायोजित हिंसाबलूच जेनोसाइडकेच जिला
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