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निखरी न्यारी राम नगरी

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी योजनाओं और सांस्कृतिक संवर्द्धन के साथ अयोध्या का विकास हो रहा है। बेहतर सड़कें, रेलवे स्टेशन, और हवाईअड्डा कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं। पर्यावरणीय संरक्षण, स्वच्छता और पर्यटन सुविधाएं विकसित हो रही हैं, जिससे यह धार्मिक और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बन रहा है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 2, 2025, 08:28 am IST
in भारत
अयोध्या नगरी में नवनिर्मित फ्लाइओवर पर राम दरबार का चित्रण

अयोध्या नगरी में नवनिर्मित फ्लाइओवर पर राम दरबार का चित्रण

अयोध्या नगरी विकास के नए चरण प्रवेश कर चुकी है। लखनऊ, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ की सड़कों के चौड़ीकरण के बाद अयाेध्या पहुंचना आसान हो गया है। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का संचालन शुरू हो चुका है, पर उसका विस्तार निरंतर जारी है। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का भी विस्तार कर 6 प्लेटफॉर्म और 50,000 यात्रियों की क्षमता वाला बनाया गया है, जहां अमृत भारत और वंदे भारत जैसी ट्रेन जाती हैं।

अयोध्या में चार लेन वाले चार प्रमुख पथ-राम पथ, भक्ति पथ, श्रीराम जन्मभूमि पथ और धर्म पथ-बनाए गए हैं। इनका निर्माण चार वेदों और चार युगों की प्रेरणा से किया गया है। राम पथ सबसे लंबा है। इसकी लंबाई लगभग 13 किलोमीटर है। इसे बनाने के लिए कई मंदिरों और मस्जिदों का पुनर्निर्माण तथा स्थानांतरण किया गया है। भक्ति पथ हनुमानगढ़ी और कनक भवन की ओर जाता है। इसके आसपास के स्थानों को भगवा रंग से रंगा गया है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।

श्रीराम जन्मभूमि पथ लगभग 0.58 किमी. लंबा है, जो यह सुग्रीव किला से मंदिर तक जाता है। धर्म पथ भी आधुनिक और सुंदर मार्ग है, जो श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक है। इसके अलावा, अयोध्या-सुल्तानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं से यात्रा समय में लगभग 30-40 प्रतिशत की कमी आई है।

अयोध्या को एक स्मार्ट धार्मिक सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय पर्यटक जोन का विकास भी शामिल है। राज्य स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत 22 प्रमुख चौराहों पर ‘रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन’ और ‘अडॉप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल’ सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाया गया है।

हनुमानगढ़ी, नया घाट, रेलवे स्टेशन और गुप्तार घाट पर वाईफाई जोन बनाए गए हैं। 133 वर्ग किमी. क्षेत्र के लिए तैयार मास्टर प्लान-2031 जीआईएस तकनीक पर आधारित है, जिसमें आने वाले दिनों में मकान बनाने के लिए ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त, अयोध्या मास्टर प्लान-2031 में शहर को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण सौर ऊर्जा आधारित मॉडल में बदलने के लिए बड़ी योजना बनाई गई है। सरयू किनारे 165 हेक्टेयर में 40 मेगावाट सौर परियोजना चालू है, जो शहर की कुल विद्युत आवश्यकता का करीब एक-तिहाई पूरा करती है। ग्रीनफील्ड टाउनशिप मॉडल के तहत 550 एकड़ में ‘नव्य अयोध्या’ हाईटेक टाउनशिप विकसित की जा रही है, जिसमें भूमिगत विद्युत और ड्रेनेज नेटवर्क, 200 एकड़ हरित क्षेत्र, मेडिकल सेंटर, वेलनेस हब और टेक पार्क होंगे।

इसके साथ, अयोध्या में 1,200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए 75 स्थानों पर मियावाकी पद्धति (जापानी वनरोपण तकनीक) से 15,000 पौधे लगाने के साथ शहर में ईवी चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी स्थापित किया जा रहा है। ये सभी प्रयास अयोध्या को पर्यावरणीय, आध्यात्मिक और हाईटेक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए किए जा रहे हैं, ताकि यह विश्व स्तरीय बने। शहर की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां की गलियों को स्वच्छ रखने के साथ सरयू की स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए रामघाट स्थित एसटीपी की क्षमता 12 एमएलडी से बढ़ाकर 18 एमएलडी किया जा रहा है, ताकि सीवर का गंदा पानी नदी में न जाए।

साथ ही, अयोध्या के 15 वार्डों की 181 गलियों में जलापूर्ति, जल निकासी, सड़क और नाली निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। पांच सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं और ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ के कदम उठाए जा रहे हैं। पशु प्रबंधन भी बेहतर तरीकों से हो रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, अयोध्या ने स्वच्छता रैंकिंग में पिछले वर्षों की तुलना में काफी प्रगति की है। स्वच्छता मामले में अयोध्या पहले 100वें स्थान पर थी, जो 2024-25 के सर्वेक्षण में सुधर कर 28वां हो गया। स्वच्छता अभियान में घर-घर कूड़ा संग्रहण, नगर की नियमित सफाई, शौचालयों की स्वच्छता और पेयजल की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, लगातार जनसहभागिता और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

एक पक्ष पर चित्रित राम-भरत मिलाप का दृश्य

अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के बाद पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सामान्य दिनों में एक लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां पर्यटन स्थलों का व्यापक विकास किया गया है। गुप्तार घाट पर सड़क चौड़ीकरण के साथ पार्किंग, जल पर्यटन और वॉटर स्पोर्ट् स की सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। राम की पैड़ी और नया घाट का सौंदर्यीकरण कर उन्हें और आकर्षक बनाया गया है और सरयू तट को भी विकसित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, 92.46 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं के तहत मखौड़ा, भरतकुंड, श्रृंगी ऋ षि का आश्रम, दशरथ समाधि स्थल, कम्हरिया बाबा मंदिर, ठाकुर राम जानकी नई पंचायती मंदिर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार और विकास किया जा रहा है। राम की पैड़ी पर दर्शक दीर्घा का निर्माण किया गया है और साकेत सदन में संग्रहालय एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। साथ ही, गेट कॉम्प्लेक्स के आसपास बजट और स्टार रेटेड होटलों, फूड कोर्ट, आर्ट एंड क्राफ्ट गैलरी जैसी सुविधाओं का विकास हो रहा है, जो अयोध्या को धार्मिक आस्था के साथ विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बना रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

अयोध्या की 81 दीवारों पर 162 म्यूरल पेंटिंग की गई है, जो भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा को दर्शाते हैं। धर्म पथ का प्रवेश द्वार अत्यंत भव्य बना है। कोरिया की महारानी हियो ह्वांग–ओक को समर्पित क्वीन हो मेमोरियल पार्क का जीर्णोद्धार किया गया है। रामकथा पार्क का भी सौंदर्यीकरण कर इसमें एक विशाल रामायण-थीम पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें भगवान राम के बचपन की झांकियां, रामायण काल के पौधे और लाइट एंड साउंड शो शामिल हैं।

पंचकोसी और चौदह कोसी परिक्रमा मार्गों के 24 प्रमुख स्थलों पर विश्राम गृह, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की गई है। जलपान के लिए दुकानें भी खुल गई हैं। परिक्रमा के प्रवेश द्वारों को भी भव्य रूप से सजाया गया है। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर दशरथ समाधि स्थल, भरतकुंड, जन्मेजय कुंड सहित आठ प्रमुख कुंडों का विकास किया गया है। संत रविदास मंदिर परिसर को संरक्षित किया गया है। अयोध्या में आयुर्वेदिक चिकित्सालय में शैक्षणिक भवन और ओपीडी ब्लॉक बनाने के साथ राजर्षि दशरथ स्वशासी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है, जो आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और सेवा प्रदान कर रहा है।

कुमारगंज में 100 बस्तरों और मिल्कीपुर में 50 बस्तरों वाले अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। इन सबके साथ, रामकथा पार्क में दीपोत्सव के दौरान रामरथ और राम की पैड़ी पर पुष्पक विमान जैसे आकर्षण केंद्र बनाए गए हैं, जो इस धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को और जीवंत बनाते हैं। अयोध्या के ये विकास उसके आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए उसे एक समृद्ध एवं पर्यावरणीय संतुलित शहर के रूप में उभार रहे हैं।

Topics: राम नगरीपाञ्चजन्य विशेषपर्यटन केंद्रस्वच्छताराम पथRam PathTourism Centerपर्यावरण संरक्षणअयोध्या धार्मिक आस्थासौर ऊर्जाअंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डामहर्षि वाल्मीकिविटी का प्रमुख प्रतीक। सामाजिक समरसताअयोध्‍या धाम
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