छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में पाञ्चजन्य के ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के अंदर से सिमटते नक्सलवाद के पीछे की रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलिज्म अभी कैसा है, कितना है यह जो प्रश्न हैं, मैं बिना संदेह कहना चाहता हूं कि बस्तर में अब थोड़ा सा क्षेत्र ही नक्सल प्रभावित है। नक्सलियों के लिए मुख्य धारा में लौटने का रास्ता पूरी तरह से खुला है। यदि वे मुख्य धारा में आते हैं तो उनका ससम्मान पुनर्वास होगा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई बंदूक लेकर जंगलों में घूमे, कोई हमारे शिक्षा दूतों के गले काट दे, कोई स्कूलों को बम से उड़ा दे, कोई तालाब, नदी या सड़क किनारे आईईडी बिछा दे — जो किसी को नहीं पहचानता — या वनवासी समुदाय के लोगों की नृशंस सामूहिक हत्या करे और उन्हें छोड़ दिया जाए तो यह भी संभव नहीं है। पुनर्वास करेंगे तो हृदय से स्वागत है, नहीं करेंगे तो न्यूट्रलाइज किया जाएगा।
नक्सली स्ट्रक्चर को सभी स्तरों पर तोड़ने की रणनीति
उन्होंने बताया कि मामला केवल ऑपरेशन, सर्च और न्यूट्रलाइज का नहीं है। जितने भी आयाम हैं कानूनी आधार क्या है, उनका सोशल बेस क्या है, अर्बन बेस क्या है, फाइनेंशियल बेस क्या है-
सभी बेस की प्रोफाइलिंग कर उस पर काम किया गया। साथ ही यह विश्लेषण किया गया कि वे गए क्यों, और किस तरह वापस लाए जा सकते हैं। हमारी पुनर्वास नीति पूरे भारत में सबसे अच्छी नीति कैसे बने इस पर विशेष काम किया गया। टेक्नोलॉजी का उपयोग करके परफेक्ट ऑपरेशंस किए गए।
बस्तर में सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव
इस समय यह देखने में आता है कि बस्तर के लोगों को खेल और संस्कृति अत्यंत प्रिय हैं। इसी के तहत बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी हुई। पिछली बार 1,65,000 युवा जुड़े थे, वहीं इस बार 3,91,000 पंजीकरण हुए हैं। 13 तारीख को बस्तर ओलंपिक की पूर्णता है।
‘बस्तर पंडूम’ अभियान का प्रभाव
इसके बाद एक और अभियान चलाया गया- जिसका नाम बस्तर पंडूम है। पिछली बार इसमें बस्तर की जितनी भी जनजातियाँ हैं- उनके परिधान, वेशभूषा, वाद्य यंत्र, पेय और खाद्य पदार्थ, श्रृंगार की वस्तुएं सभी को एक मंच पर लाया गया। बस्तर पंडूम को बड़ी प्रमुखता मिली है और इसका प्रभाव आज सबको दिखाई देता है।
इसीलिए आज यह नहीं कहा जा सकता कि कोई एक कारक है जिसकी वजह से यह सब संभव हुआ। अनेक स्तरों पर लगातार और समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि बस्तर से नक्सलवाद खत्म होता जा रहा है।

















