भारत में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में सक्रिय कुल 106 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन सभी नक्सलियों पर मिलाकर करीब 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर करना नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से नक्सलियों का सरेंडर- मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली लंबे समय से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सक्रिय थे। सरेंडर करने वालों में बीजापुर से 37 नक्सली, नारायणपुर से 4, बस्तर से 16, कांकेर से 3, सुकमा से 18 और दंतेवाड़ा से 30 नक्सली शामिल हैं। ये सभी नक्सली संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे थे और कई के सिर पर इनाम भी घोषित था। सुरक्षाबलों और राज्य सरकार का कहना है कि यह सरेंडर सरकार की सही रणनीति और पुनर्वास नीति का नतीजा है। पिछले कुछ समय से सुरक्षाबल नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं। साथ ही सरकार नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद, रहने की सुविधा, रोजगार के अवसर और शिक्षा जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जो लोग नक्सल संगठन छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सामान्य जीवन जीने का मौका मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होने से स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है। इसका असर यह भी हो रहा है कि नक्सलियों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में सुरक्षाबल लगातार काम कर रहे हैं।

















