दिल्ली के रेड फोर्ट में 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच तेज हो गई है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर आठ जगहों पर छापेमारी की। ये कार्रवाई एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ नेटवर्क से जुड़ी है, जिसमें कई टीमें एक साथ सर्च चला रही हैं। मुख्य संदिग्ध जासिर बिलाल वानी के घर पर अभी भी सर्च चल रही है। ये सब दिल्ली ब्लास्ट के पीछे की साजिश को उजागर करने के लिए है, जहां एक आई20 कार में IED ब्लास्ट हुआ था।
छापेमारी और सर्च की डिटेल्स
एनआईए ने जम्मू-कश्मीर के आठ लोकेशन्स पर रेड कीं, लेकिन आर्टिकल में स्पेसिफिक जगहों का जिक्र नहीं है। फोकस मुख्य रूप से संदिग्ध जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश के घर पर है, जहां सर्च अभी चल रही है। वानी को रेड फोर्ट ब्लास्ट का मुख्य को-कॉन्सपिरेटर माना जा रहा है। एक और की प्लेयर है अमीर राशिद अली, जिसे डिटेन कर लिया गया है। ब्लास्ट वाली आई20 कार इसी के नाम पर रजिस्टर्ड थी। एनआईए का मानना है कि ये लोग एक सिस्टेमेटिक नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो टेक्निकल और लॉजिस्टिकल सपोर्ट दे रहे थे। सर्च के दौरान इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, डॉक्यूमेंट्स और दूसरे सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं, ताकि पूरी साजिश का ग्राफ बन सके।
दिल्ली ब्लास्ट का बैकग्राउंड
ये ब्लास्ट 10 नवंबर को रेड फोर्ट के पास हुआ, जिसमें एक कार में IED फिट करके उड़ाया गया। एनआईए इसे ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का मामला बता रही है, यानी एजुकेटेड लोग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अटैक प्लान कर रहे हैं। वानी का कनेक्शन 28 साल के डॉक्टर नबी से है, जो पुलवामा का रहने वाला है। दोनों ने हमास स्टाइल के ड्रोन अटैक्स प्लान किए थे, साथ ही छोटे-छोटे क्रूड रॉकेट्स डेवलप किए, जो कोऑर्डिनेटेड ब्लास्ट्स के लिए यूज हो सकते थे। वानी ने ड्रोन्स को मॉडिफाई किया, उनकी बैटरी और कैमरा सिस्टम अपग्रेड किया, और छोटे एक्सप्लोसिव पेलोड्स फिट करने की कोशिश की। ये डिजाइन्स मिडिल ईस्ट में हमास और आईएसआईएस के टैक्टिक्स से मैच करते हैं, जहां क्राउडेड एरियाज को टारगेट किया जाता है।
कौन है जासिर बिलाल वानी
जासिर बिलाल वानी क्वाजिगुंड, अनंतनाग डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला है। ये पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट है और अक्टूबर 2024 में कुलगाम के एक मस्जिद में नबी से मिला। शुरू में, दूसरे ऑपरेटिव्स इसे जैश-ए-मोहम्मद का ओवर-ग्राउंड वर्कर बनाना चाहते थे, लेकिन नबी ने इसे सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए ब्रेनवॉश किया। अप्रैल 2025 तक वानी ने पीछे हटने का फैसला किया, वजह बताई फाइनेंशियल स्ट्रेस और रिलिजियस रूल्स के खिलाफ सुसाइड। फिर भी, एनआईए को शक है कि ये टेक्निकल प्रिपरेशन्स में इन्वॉल्व्ड रहा। अमीर राशिद अली ने लॉजिस्टिकल हेल्प दी, जैसे सेफ हाउस अरेंज करना। नबी मॉड्यूल का सेंट्रल फिगर था, जो मेडिकल बैकग्राउंड की वजह से केमिकल्स और एक्सप्लोसिव्स हैंडलिंग में एक्सपर्ट था। ये सब मिलकर पब्लिक प्लेसेज पर अटैक प्लान कर रहे थे, जिसमें ड्रोन्स से एक्सप्लोसिव्स ड्रॉप करना शामिल था।
जांच में मिले अहम सबूत
रेड्स से मिले सबूतों में ड्रोन पार्ट्स, बैटरी अपग्रेड्स और एक्सप्लोसिव डिजाइन्स के स्केच मिले हैं। वानी को मॉड्यूल का टेक्निकल बैकबोन कहा जा रहा है। एनआईए का कहना है कि वानी और नबी ने मिलकर अटैक्स प्लान किए, और वानी की इन्वॉल्वमेंट टेक्निकल साइड पर जारी रही। अमीर की डिटेंशन से लॉजिस्टिक चेन क्लियर हो रही है। जांच में अब इंटरनेशनल कनेक्शन्स चेक हो रहे हैं, खासकर मिडिल ईस्ट टेरर ग्रुप्स से। सर्च ऑपरेशन्स जारी हैं, और ज्यादा डिटेल्स इकट्ठी हो रही हैं।

















