उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में मदरसों में मिड-डे मील घोटाला एक बड़े भ्रष्टाचार के रूप में सामने आया है। जांच में पता चला है कि 11 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फर्जी छात्रों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निकाली गई। इस खुलासे ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।
फर्जी अंकपत्रों पर सवाल, नागरिकता और घुसपैठ का खतरा
मिड-डे मील घोटाले के साथ अब फर्जी अंकपत्र जारी होने पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे घुसपैठ और भारतीय नागरिकता हासिल करने की साजिश भी हो सकती है। इसलिए पूरे मामले की जांच किसी बाहरी या उच्च स्तरीय विभाग से कराने की मांग की जा रही है।
बस्ती–कुशीनगर–सिद्धार्थनगर में पहले भी फर्जी अंकपत्र का बड़ा खेल
वहीं जौनपुर के आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र दुबे के अनुसार- बस्ती, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर में पहले भी फर्जी अंकपत्र घोटाला पकड़ा जा चुका है। इस मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिन पर मंडलायुक्त की रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठे थे और बाद में उनका निलंबन भी हुआ था।
बलरामपुर में फर्जी छात्र संख्या और कूटरचित दस्तावेजों का जाल
बलरामपुर के कई मदरसों में छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाने और एमडीएम का धन हड़पने का मामला पिछले चार वर्षों से चल रहा था। अब शक है कि इन्हीं फर्जी छात्रों के नाम पर फर्जी मार्कशीट जारी की गई होंगी। यह पूरा नेटवर्क एक संगठित गिरोह के संचालित होने की ओर इशारा करता है।
सीमा पार घुसपैठ की संभावना ने बढ़ाई चिंता
कुशीनगर और सिद्धार्थनगर जैसे भारत–नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में पहले ही फर्जी अंकपत्र के सहारे घुसपैठ के मामले उजागर हो चुके हैं। अब बलरामपुर में घोटाले के खुलासे के बाद आशंका है कि सीमा क्षेत्र में यह नेटवर्क सक्रिय रहा हो सकता है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई, जांच तेज
बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर एमडीएम घोटाला में पांच लोगों की गिरफ्तारी की जा रही है और 40 से अधिक लोग जांच के दायरे में हैं। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा है कि जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है और हर पहलू की गहराई से पड़ताल होगी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: हर स्तर पर जांच जारी
अपर जिलाधिकारी नगर ज्योतिश्री ने जानकारी दी कि प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है। SIR (Special Intense Revision) की प्रक्रिया इससे प्रभावित नहीं होगी और हर स्तर पर पारदर्शी जांच की जा रही है।
मदरसा बोर्ड की प्रतिक्रिया: पूरे प्रदेश में जांच संभव
उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के निदेशक अंकित अग्रवाल ने कहा कि ऐसा कोई मामला अभी बोर्ड के संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन अगर कोई इनपुट आता है तो पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

















