मथुरा के ब्रज क्षेत्र में गौ सेवा के लिए समर्पित मशहूर संत चंद्रशेखर ‘फरसा वाले बाबा’ को शनिवार तड़के ट्रक ने कुचल दिया। इस घटना के बाद पूरे मथुरा और कोसीकलां क्षेत्र में तनाव का माहौल है। गौरक्षकों और बाबा के समर्थकों का आरोप है कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि गौ तस्करों द्वारा की गई सुनियोजित हत्या है।
गौ तस्करों का कर रहे थे पीछा
दरअसल, मथुरा के कोटवन चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नवीपुर के पास शनिवार तड़के करीब 4 बजे यह दुखद घटना हुई। बताया जा रहा है कि गौ रक्षक संत चंद्रशेखर (फरसा वाले बाबा) को इलाके में एक ट्रक द्वारा गौ तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही बाबा निडर होकर तस्करों को रोकने के लिए मौके पर पहुंच गए। जब बाबा ने एक संदिग्ध ट्रक को रोकने का प्रयास किया, तभी पीछे से आ रहे एक अन्य तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाबा की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद गौ तस्कर मौके से फरार हो गए, हालांकि पुलिस ने बाद में एक युवक को हिरासत में लिया है और तीन अन्य की तलाश जारी है।
जैसे ही ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत की खबर फैली, हजारों की संख्या में गौ रक्षक, श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर इकट्ठा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने बाबा की मौत को ‘बलिदान’ बताते हुए हाईवे जाम कर दिया, जिससे मीलों लंबा ट्रैफिक लग गया।
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पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
बाबा के समर्थकों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू की। इस दौरान भीड़ ने एडीएम (प्रशासन) की गाड़ी को निशाना बनाया और उसमें जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी पथराव किया गया। बेकाबू होती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और रबर बुलेट का इस्तेमाल करना पड़ा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस संघर्ष में करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। वर्तमान में इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। बाबा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए अंजनौख स्थित उनकी गौशाला ले जाया जा रहा है, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’?
बाबा चंद्रशेखर, जिन्हें पूरा ब्रज ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से जानता था, गौ रक्षा आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे। वह हमेशा अपने हाथ में एक ‘फरसा’ (कुल्हाड़ी जैसा शस्त्र) रखते थे, जो गौ-वंश के दुश्मनों के लिए खौफ का प्रतीक था। वह मथुरा के अंजनौख क्षेत्र में रहकर विशाल गौशाला का संचालन करते थे। ब्रज क्षेत्र में गौ तस्करी के खिलाफ वे हमेशा अगली कतार में खड़े रहते थे।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी एक आवाज पर हजारों गौ रक्षक एकजुट हो जाते थे। उनका फरसा केवल शस्त्र नहीं था बल्कि इलाके के गौ तस्करों के के लिए डर का प्रतीक था।
एसएसपी ने क्या कहा
इस पूरे प्रकरण में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे फरसा बाबा ने एक वाहन को संदिग्ध मानकर रोका। घने कोहरे के कारण पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में उनकी मौत हो गई। बाबा ने जिस वाहन को रोका था, उसमें किराने का सामान पाया गया। वहीं, जिस ट्रक से हादसा हुआ है वो राजस्थान का नंबर है उसमें तार लदा हुआ था। ट्रक ड्राइवर और कंडक्टर अलवर के रहने वाले हैं।

















