नई दिल्ली । श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि साधु-संतों के सानिध्य में आकर मन को असीम शांति का अनुभव होता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को उन्होंने इस मठ की 550 वर्षों की जीवंत और प्रेरणादायी परंपरा का प्रतीक बताया। कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री ने राम मंदिर और वीर विट्ठल मंदिर के दर्शन भी किए।
मठ की 550 वर्षों की अद्भुत यात्रा पर प्रधानमंत्री का जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते युगों, चुनौतियों और समय के उतार-चढ़ाव के बावजूद यह मठ हमेशा समाज को दिशा देने वाला केंद्र बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह मठ साधना और सेवा, परंपरा और लोककल्याण को जोड़ने वाली शक्ति है, जो पीढ़ियों को स्थिरता और मूल्य प्रदान करती रही है।
प्रभु श्रीराम की 77 फीट ऊंची प्रतिमा और थीम पार्क का उद्घाटन
समारोह के दौरान श्रीराम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। इसके साथ ही रामायण पर आधारित एक भव्य थीम पार्क का भी उद्घाटन हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या में धर्मध्वज आरोहण के बाद गोवा में श्रीराम की यह प्रतिमा अनावरण का अवसर उनके लिए विशेष है।
संग्रहालय और 3D थिएटर मठ की परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ेंगे
प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां तैयार हो रहे आधुनिक संग्रहालय और 3D थिएटर नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक तरीके से समझने में मदद करेंगे। उन्होंने 550 दिनों तक चले राम नाम जप-यज्ञ और राम रथ यात्रा को भक्ति व अनुशासन की सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक बताया।
गुरु-परंपरा और द्वैत वेदांत की विरासत को प्रधानमंत्री का नमन
प्रधानमंत्री ने श्रीमद नारायणतीर्थ स्वामी द्वारा 1475 में स्थापित इस मठ की परंपरा को सम्मान देते हुए कहा कि उडुपी और पर्तगाळी मठ एक ही आध्यात्मिक धारा की जीवंत कड़ियां हैं। उन्होंने कहा कि इस परंपरा ने भारत के पश्चिमी तट की संस्कृति को विशेष दिशा दी है।
मठ से जुड़े परिवारों की अनुशासन और उत्कृष्टता की परंपरा
उन्होंने कहा कि व्यापार, वित्त, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मठ से जुड़े परिवारों की सफलता उनकी विनम्रता, संस्कार और सेवा की देन है। मठ इन मूल्यों की आधार-शिला बनकर हमेशा समाज का मार्गदर्शन करता रहा है।
मठ की सेवा परंपरा को प्रधानमंत्री ने बताया अद्भुत और प्रेरणादायक
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के समय इस मठ ने समाज को संगठित कर मंदिरों, मठों और आश्रयों की स्थापना की। आज भी देशभर में बने छात्रावास, विद्यालय, वृद्ध सेवाएँ और राहत कार्य इस मठ की सेवा भावना की गवाही देते हैं।
गोवा की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा में मठ का बड़ा योगदान
उन्होंने कहा कि जब गोवा की भाषा और परंपराओं पर चुनौती आई, तब पर्तगाळी मठ ने समाज की सांस्कृतिक आत्मा को मजबूती दी। उन्होंने इसे गोवा की सांस्कृतिक दृढ़ता का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक – प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाएँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी है। अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक, रामायण सर्किट और कृष्ण सर्किट जैसे प्रोजेक्ट इस नई चेतना का प्रमाण हैं, जो भारत की आध्यात्मिक पहचान को नई शक्ति दे रहे हैं।
काशी से जुड़ाव पर प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया गर्व
उन्होंने बताया कि पर्तगाळी मठ का काशी से भी गहरा संबंध है। संस्थापक आचार्य श्री नारायणतीर्थ ने काशी में केंद्र स्थापित किया था, जो आज भी समाज सेवा का माध्यम है। काशी का सांसद होने के नाते प्रधानमंत्री ने इसे विशेष सौभाग्य बताया।
प्रधानमंत्री ने किए 9 संकल्पों के लिए आग्रह
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए मठ समाज को प्रेरित कर सकता है। उन्होंने 9 संकल्प प्रस्तावित किए: 1. जल संरक्षण 2. पेड़ लगाना 3. स्वच्छता मिशन 4. स्वदेशी और Vocal for Local 5. देश दर्शन 6. नैचुरल फार्मिंग 7. हेल्दी लाइफस्टाइल और श्रीअन्न 8. योग और खेल 9. गरीब परिवार की सहायता
गोवा के आधुनिक विकास मॉडल की प्रधानमंत्री ने सराहना की
प्रधानमंत्री ने कहा कि गोवा प्रति व्यक्ति आय, पर्यटन, फार्मा और सेवा क्षेत्र में अग्रणी है। हाईवे, एयरपोर्ट और रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से पर्यटन और तीर्थाटन में तेजी आई है। विकसित भारत 2047 की यात्रा में गोवा एक आदर्श मॉडल है।
“जो कुछ अच्छा दिखता है, वह मोदी का नहीं, 140 करोड़ देशवासियों का है”
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके कामों का श्रेय देशवासियों के सामूहिक संकल्प को जाता है। उन्होंने कहा कि गोवा ने उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों पर बड़ी भूमिका निभाई है और यह भूमि उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रही है।
प्रधानमंत्री ने समारोह के लिए सभी भक्तों को शुभकामनाएं दीं
अंत में प्रधानमंत्री ने मठ के 550 वर्ष पूरे होने पर सभी श्रद्धालुओं, संतों और आयोजकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

















