अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामी आतंकवाद की असलियत को संभवत: अच्छे से समझते हैं इसीलिए उन्होंने मुस्लिम ब्रदरहुड की छत्रछाया में चल रहे अनेक आतंकी गुटों को अंतत: फॉरेन टेररिस्ट आर्गेनाइजेशन घोषित करने की तैयारी कर ली है।
इस कदम से बेशक इस्लामी आतंकवाद को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। पता चला है कि ट्रम्प ने गत 24 नवंबर को एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए हैं। इसके माध्यम से ट्रंप प्रशासन को यह निर्देश दिया जा चुका है कि मुस्लिम ब्रदरहुड की कुछ इकाइयों या कहें गुटों को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) तथा विशेष रूप से स्पेशली डेजिगनेटिड ग्लोबल टेररिस्ट्स (SDGTs) ठहराने की तैयारी शुरू कर दी जाए।

राष्ट्रपति ट्रम्प के इस कार्यकारी आदेश का कुल मकसद मुस्लिम ब्रदरहुड की आतंकी और उग्रवादी हरकतों पर लगाम लगाना है। बताया गया है कि इसकी कई शाखाओं का हमास जैसे आतंकवादी संगठनों से सीधा संबंध है।
मुस्लिम ब्रदरहुड की बाहरी बनावट की वजह से इसके द्वारा आतंकवाद को शह देने वाले तानेबाने का पता लगाना और उसे प्रभावी तौर पर रोक पाना बेहद मुश्किल ही रहा। जॉर्डन की इसकी इकाई हमास से जुड़ी हुई है, जो 7 अक्तूबर 2023 को इस्राएल पर हुए निर्मम आतंकवादी हमले में शामिल बताई गई थी। इसके अलावा, मिस्र, लेबनान तथा कुछ अन्य देशों की इकाइयां भी आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय मानी जाती हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड की गतिविधियां ‘सामाजिक कल्याण’, ‘राजनीति’ और आतंकवाद के घालमेल जैसी चलती हैं, इसी के माध्यम से पूरा आतंकवादी नेटवर्क संचालित किया जा रहा है।
कतर स्थित अल जजीरा नेटवर्क भले ही औपचारिक रूप से मुस्लिम ब्रदरहुड का हिस्सा न दिखता हो, लेकिन उसे उसके वैचारिक और राजनीतिक प्रोपेगेंडा का वैश्विक मंच माना जाता है। कतर पर आरोप हैं कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड और हमास को संरक्षण देता है। अल-जजीरा ने बार-बार मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े आतंकवादी नेताओं को मंच दिया है और परोक्ष रूप से इस्लामी उग्रवाद बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। ‘अरब स्प्रिंग’ के दौरान और बाद की उसकी रिपोर्टिंग में भी अल-जजीरा का पक्षपाती रवैया साफ देखा गया था।

राष्ट्रपति ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश के तहत, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी कि मुस्लिम ब्रदरहुड की कौन-सी इकाइयां कानूनी तौर पर विदेशी आतंकी संगठन घोषित की जा सकती हैं। बताते हैं, ट्रंप ने यह निर्णय इस्राएल और क्षेत्रीय साझेदारों की सुरक्षा चिंताओं के जवाब में लिया गया है। माना जा रहा है कि इससे मुस्लिम ब्रदरहुड को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा झटका लगेगा और उसकी आतंकवादी गतिविधियों से रोकने में मदद मिलेगी।
इसमें संदेह नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन का यह कदम इस्लामी आतंकवाद की कुछ हद तक चूलें हिलाने वाला और वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास साबित हो सकता है।

















