26 नवंबर 2008, पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई पर हमला किया। ताज होटल, ओबेराय ट्राइडेंट, नरीमन हाउस, कामा अस्पताल, छत्रपति शिवाजी महाराज और लियोपोल्ड कैफे को निशाना बनाया। इस हमले में करीब 166 लोग मारे गए और 300 घायल हुए। सुरक्षाबलों ने दस में से नौ आतंकियों को 32 हूरों के पास भेज दिया। एकमात्र जीवित बचा अजमल कसाब। उसने बचने के लिए जमकर ड्रामा किया, लेकिन सरकारी वकील उज्जवल निकम ने उसके और उसके आका पाकिस्तान के मंसूबों को चकनाचूर कर दिया।
मुंबई हमले का जिम्मेदार लश्कर ए तैयबा था। उसने भारत को दहलाने के लिए पाकिस्तान से दस आतंकी भेजे थे। इन्होंने कई निर्दोष लोगों को निशाना बनाया। 9 दहशतगर्द मारे गए, अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। उसने बचने के लिए एक के बाद एक कई झूठ बोले, लेकिन वह अपने चेहरा छिपा नहीं पाया।
कसाब ने इस तरह किया ड्रामा
- सबूत मिलने पर सबसे पहले अपराध स्वीकार किया
- आंशिक रूप से अपराध नकार भी रहा था
- पहले कहा कि वह नाबालिग है और किशोर अधिनियम के तहत मुकदमा चले
- इसके बाद बोला कि मैंने कुछ नहीं किया
- अबु इस्माइल ने फायरिंग की, मेरी बॉलीवुड में रुचि थी इसलिए पाकिस्तान से मुंबई आया
उज्जवल निकम ने कसाब को किया बेनकाब
मुंबई में पांचजन्य के कार्यक्रम में उज्जवल निकम ने बताया कि मुंबई हमले को लेकर पाकिस्तान ने किस तरह साजिश रची थी। उन्होंने बिना दबाव में झुके पाकिस्तान और कसाब दोनों को बेनकाब किया। उनकी पैरवी और तथ्यों के चलते कसाब फांसी के फंदे तक पहुंचा। निकम ने बताया कि कसाब को जल्द से जल्द फांसी दिलाने के लिए जनता और केंद्र सरकार का दबाव था। मीडिया अलग से आलोचना कर रही थी। वकीलों का समूह भी सक्रिय था, वे बोल रहे थे कि जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। निकम कहते हैं कि मेरा एक ही उद्देश्य था कसाब का अपराध साबित करना। उन्होंने कसाब के ड्रामे को लेकर आतंकी संगठन अलकायदा का मैनुअल भी अदालत में पेश किया। इसमें था कि पकड़े जाने पर किस तरह सुरक्षा एजेंसियों और सरकार को बरगलाना है।
पाकिस्तान ने आतंकियों को रिहा किया
निकम कहते हैं कि मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि कसाब के साथ पाकिस्तान को बेनकाब करना। कसाब के पीछे छिपी ताकत को रिकॉर्ड में लाना। आतंकी हमले की जांच को लेकर चार सदस्यों को दल पाकिस्तान भेजा गया। उसमें निकम भी थे। जांच दल ने पाकिस्तान के तत्कालीन गृहमंत्री को भारत की तरफ से सबूत दिखाए, लेकिन उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी को भी छोड़ दिया था। इस्लामाबाद गृह मंत्रालय में कॉन्फ्रेंस बैठक के दौरान पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेडियर से जब पूछा गया कि इन आतंकियों को क्यों गिरफ्तार नहीं कर रहे? आपराधिक षड्यंत्र रचने का मामला क्यों नहीं दर्ज किया? इस पर उनकी तरफ से कहा गया कि हमने कोई सबूत ही नहीं दिया है। यह अजीब बात थी क्योंकि सबूत पाकिस्तान को एकत्र करने थे, क्योंकि साजिश उसी के यहां रची गई थी। हमने आठ दिन वहां रह कर सारे सबूत दिए।
डेविड हेडली का बयान काम आया
उज्जवल निकम ने बताया कि जब जांच दल भारत लौटा तो पता चला कि डेविड हेडली ने अपराध कबूल किया है और शिकागो की कोर्ट में क्षमा याचिका दाखिल की है। इसमें हेडली ने बताया था कि मुंबई में 26/11 आतंकी के हमले से पहले वह होटल ताज, ओबेबराय, नरीमन हाउस गया था। जहां हमले होने थे, उसकी फोटो उसने पाकिस्तान को भेजी थी। उसने बाद में यह भी बताया था कि आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा के बीच साठगांठ है। उसने आईएसआई के अधिकारियों के फोन नंबर तक दिए, जिसे हमने अदालत में पेश किया। इसके बाद पूरे साक्ष्य केंद्र सरकार को दिए गए। सरकार ने साक्ष्य राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दिए, जो बाद में पाकिस्तान को सौंपे गए। लेकिन पाकिस्तान सबूत लेकर चुपचाप बैठ गया।
पाकिस्तान की साजिशें जारी
आतंक की काली फैक्ट्री चलाने वाला पाकिस्तान साजिश रचने से बाज नहीं आ रहा है। उसने मुंबई अटैक के बाद भी आतंकियों से कई हमले कराए। हाल ही में भारत के पहलगाम में उसने अटैक कराया। इसका भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये मुंहतोड़ जवाब दिया।
















