उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अवैध घुसपैठियों को उनके देश भेजने से पहले ऐसे लोगों के लिए अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने का निर्देश दिया है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने उनके इस कदम की सराहना की है। उन्होंने टीएमसी विधायक द्वारा बाबरी मस्जिद के शिलान्यास की घोषणा का विरोध किया।
डॉ. इमाम उमर ने रविवार (23 नवंबर) को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ का सभी डीएम को घुसपैठियों को देश से बाहर भेजने पहले उनके लिए अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने का निर्देश देना बहुत ही अच्छा कदम है। वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। भारत सरकार के पास ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून है जो गैर-कानूनी तरीके से भारत में आता है, रहता है या कोई भी गलत काम करता है। सरकार अपना काम कर रही है और कार्रवाई कर रही है। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के अंदर जितने भी घुसैपेठिए हैं उन्हें एक-एक करके पकड़ा जाना चाहिए और भारतीय कानून के अनुसार सजा दी जानी चाहिए। ये लोग देश के अंदर मिलने वाले सभी लाभ उठाते हैं। इनके कारण हमारे साथ अन्याय हो रहा है, जो लोग यहां हैं उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।”
क्या ममता बनर्जी उस मस्जिद में नमाज पढ़ेंगी?
पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास वाले विवादित बयान पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि देश में फिर से माहौल खराब करने की साजिश हो रही है। यह जांच का विषय है, क्योंकि बांग्लादेश ठीक बगल में है। कहीं न कहीं मुझे ये बू बांग्लादेश से आ रही है। यह जांच का विषय है। वह टीएमसी विधायक हैं। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन्हें इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए। अगर वह बुनियाद रखना चाहते हैं, तो क्या ममता बनर्जी उस मस्जिद में नमाज पढ़ेंगी? क्या ममता बनर्जी उस मस्जिद की आधार शिला रखेंगी?”

क्या बोले थे हुमायूं कबीर
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने की बात कही है। हुमायूं के अनुसार 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था। उसकी 33वीं बरसी पर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में वह बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। टीएमसी विधायक का दावा है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण को तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा। उनके विवादित बयान से देश की राजनीति गरमा गई है। इसको लेकर भाजपा ने टीएमसी पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रवक्ता यासर जिलानी ने कहा कि टीएमसी नेता, खासकर विधायक हुमायूं कबीर नफरत की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वह विशुद्ध रूप से तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। वह जानबूझकर बंगाल में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहे हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष पर भड़के इमाम
इससे पहले ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने मौलाना की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा था, “मैं मौलाना अरशद मदनी के इस समय दिए गए बयान की कड़ी निंदा करता हूं, जिसका मकसद देश का माहौल खराब करना है, लोगों में डर पैदा करना और अराजकता फैलाना है। उन्होंने अल फलाह यूनिवर्सिटी का हवाला देकर उनका (आतंकवादियों का) साथ दिया है। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। मौलाना को आतंकवाद के खिलाफ बयान देना चाहिए था। उनकी जमीयत उलेमा-ए-हिंद को आतंकवाद का विरोध करना चाहिए था।” इमाम ने आगे यह भी कहा कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, सबसे ज्यादा मुस्लिम सिविल सर्विस में शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से मुस्लिमों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, लेकिन उन्होंने कभी भी उनकी तारीफ नहीं की है।
क्या बोला था अरशद मदनी ने?
मौलाना अरशद मदनी ने दावा किया था कि दुनिया के कई बड़े शहरों में मुस्लिम मेयर बन सकते हैं। मुस्लिम लंदन का मेयर बन सकता है, मगर भारत में किसी भी मुस्लिम को विश्वविद्यालय का कुलपति बनने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो उसे आजम खान जैसी सजा भुगतनी पड़ती है।















