नाइजीरिया के नाइजर राज्य में एक बार कथित इस्लामवादी हमलावरों ने एक बड़ी और सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया है। यहां के सेंट मैरी कैथोलिक स्कूल पर हुआ यह हमला भोर में किया गया। भारी हथियारों से लैस कथित इस्लामी गुट से जुड़े हमलावरों ने स्कूल परिसर में घुसकर 215 बच्चों और 12 शिक्षकों का अपहरण कर लिया। यह घटना अग्वारा प्रशासनिक क्षेत्र के पापिरी समुदाय स्थित इस कैथोलिक स्कूल में हुई, जो राज्य के एक प्रमुख आवासीय एवं शैक्षणिक संस्थानों में से एक बताया जा रहा है। घटना कल तड़के हुई बताई गई है।
21 नवंबर यानी कल भोर में यह हमला उस वक्त किया गया जब स्कूल में केवल स्थानीय स्तर पर की गई सुरक्षा व्यवस्था ही थी, कोई आधिकारिक पुलिस या सरकारी बल तैनात नहीं था। बंदूकधारी इस्लामी हमलावरों के स्कूल में घुसते ही पूरे परिसर में भगदड़ मच गई। इस अफरातफरी के बीच जिहादियों ने बच्चों, शिक्षकों को घेरकर अपने कब्जे में ले लिया।

हथियारबंद बदमाशों ने स्कूल में प्रवेश कर पहले सुरक्षा व्यवस्था पर काबू पाया और फिर क्लासरूम, हॉस्टल व अन्य क्षेत्रों में छात्रों व स्टाफ को बंधक बनाकर जंगल की ओर ले गए। अपहृत बच्चों की उम्र 7 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। कैथोलिक ईसाई संस्था द्वारा चल रहा यह स्कूल माध्यमिक स्तर का है। इसी परिसर एक अन्य प्राथमिक विद्यालय भी है। लेकिन हमलावर उस तरफ नहीं गए।
बहरहाल, हिंसा और अपहरण की इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है। अपहृत बच्चों के परिजनों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। नाइजर राज्य की कैथोलिक एसोसिएशन के प्रवक्ता डैनियल अटोरी सहित क्रिश्चियन एसोसिएशन ऑफ नाइजीरिया (सीएएन) ने सभी बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन से फौरन हरकत में आने की मांग की है।

राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकारस गया है कि पूर्व खुफिया चेतावनियों के बावजूद स्कूल ने प्रशासन की अनुमति के बिना ही उस स्कूल में पढ़ाई दोबारा शुरू कराई थी। स्थानीय लोग इसे प्रशासन की ढिलाई बता रहे हैं, जिसने छात्रों और शिक्षकों को जोखिम में डाल दिया और यह घटना हो गई, जबकि इसके संकेत पहले से मिल रहे थे।
हालांकि घटना के फौरन बाद सेना, सुरक्षा बलों ने वहां पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है और अतिरिक्त तैनाती कर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सरकार तथा स्थानीय संस्थाएं अपहृत बच्चों को सकुशल वापस पाने की कोशिशों में जुट गई हैं।

हालांकि अभी तक किसी संगठन ने आधिकारिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन प्रशासन और मीडिया रिपोर्ट में इसे आतंकवादी या मजहबी कट्टरपंथी गुटों द्वारा अंजाम दी गई घटना माना जा रहा है। पूर्व में ‘बोको हराम’ तथा अन्य इस्लामी जिहादी संगठनों द्वारा नाइजीरिया में इस प्रकार के सामूहिक स्कूली अपहरण कांड सामने आ चुके हैं।
इसमें संदेह नहीं है कि इस्लामवादी जिहादी तत्वों का यह हमला नाइजीरिया के शिक्षा क्षेत्र पर गहरा असर डाल रहा है। क्षेत्र में स्कूलों में भय का माहौल है, कई संस्थान अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। बेशक, यह घटना देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय समाज सेंट मैरी कैथोलिक स्कूल पर हुए इस सामूहिक अपहरण कांड से आहत है और नाइजीरिया में गहराती असुरक्षा, प्रशासनिक लापरवाही और आतंकवादी खतरे की गंभीरता पर गहन चिंता प्रकट कर रहा है। देश-विदेश में इस घटना की कड़ी निंदा की जा रही है और पीड़ित परिवारों की पीड़ा के प्रति सहानुभूति भी जताई जा रही है।
नाइजीरिया सहित अफ्रीका के अन्य देशों में भी स्कूली अपहरण और स्कूलों पर हिंसक हमलों के पीछे इस्लामवादी बंदूकधारियों की भूमिका ही अधिकांशत: सामने आई है। अक्सर इस्लामी आतंकवादी गुट (जैसे बोको हराम) बदले, सत्ता या फिरौती के उद्देश्य से बच्चों या शिक्षकों को निशाना बनाते रहे हैं। मजहबी कट्टरपंथ के अलावा सरकारी उपेक्षा और आर्थिक तंगी भी ऐसे हमलों के प्रमुख कारण होते हैं।
उल्लेखनीय है कि नाइजीरिया में ही साल 2014 में चिबोक से 276 स्कूली लड़कियों का जिहादी गुट बोको हराम द्वारा किया गया अपहरण दुनिया भर में सुर्खियों में रहा था। उनमें से बहुत-सी लड़ंकियां आज तक ‘लापता’ हैं। कडुना राज्य, कांगीरा, कागारा, दापची सहित नाइजर और अन्य प्रदेशों में 2021-2023 के दौरान भी सैकड़ों छात्र अपहरण के ऐसे मामलों के शिकार हो चुके हैं। ऐसे हमलों में आमतौर पर स्कूली बच्चों, शिक्षकों को अगवा कर जंगलों में छुपा दिया जाता है और फिरौती की मांग की जाती है।
इन घटनाओं में नाइजीरिया की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों, इस्लामी—ईसाई सांप्रदायिक तनाव और संगठित आपराधिक गिरोहों की भूमिका रही है। जिहादी गुटों के पास अत्याधुनिक हथियार होते हैं जिनका इन गरीब देशों के संख्या में कम और पुराने हथियार लिए सैनिक मुकाबला नहीं कर पाते हैं।

















