व्याख्यानमाला के दूसरे दिन दो सत्र में प्रश्नोत्तर हुए। सभी प्रश्नों के उत्तर सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने दिए। इस दौरान सह सरकार्यवाह श्री मुकुंद सी.आर., अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख श्री मंगेश भेंडे, अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल, सहसंपर्क प्रमुख श्री रमेश पप्पा, श्री सुनील देशपांडे, श्री भारत भूषण, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, सह प्रचार प्रमुख श्री प्रदीप जोशी, श्री नरेंद्र ठाकुर, अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख श्री सुधीर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभागार में बैठे 284 लोगों में से कुल 470 प्रश्न प्राप्त हुए, जिन्हें 18 श्रेणियों में बांटा गया। इसके अतिरिक्त पहले दिन के सत्रों में उपस्थित लोगों द्वारा 81 सुझाव और विचार प्रस्तुत किए गए। यहां प्रश्नोत्तर सत्र के संपादित अंश दिए जा रहे हैं-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंजीकृत संगठन क्यों नहीं?
संघ एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संगठन है, जो संवैधानिक मानदंडों के भीतर काम करता है और उसे पंजीकरण की आवश्यकता नहीं। कई चीजें पंजीकृत नहीं हैं, यहां तक कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं।

संघ का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्र को मजबूत करने की दिशा में हिंदू समाज को संगठित करना।
क्या संघ में मुसलमान शामिल हो सकते हैं?
किसी भी मत-पंथ का व्यक्ति संघ की शाखा में शामिल हो सकता है, क्योंकि सभी भारत माता के पुत्र हैं। संघ व्यक्तियों को संप्रदाय की सीमाओं के आधार पर नहीं, बल्कि हिंदू के रूप में पहचानता है। उन्होंने कहा, ”व्यक्तिगत पहचान-चाहे वह ब्राह्मण हो, मुस्लिम हो या ईसाई-शाखा में प्रवेश करते ही एक बन जाती है।” संघ उपेक्षित वर्गों को अपने समुदायों का उत्थान करने में सक्षम बनाने की दिशा में काम करता रहा है, क्योंकि संघ का मुख्य कार्य शाखा और व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
अतिवादी वामपंथी विचारधारा के भंवर से युवाओं को बाहर निकालने की दिशा में संघ की क्या योजना है?
युवा पीढ़ी हमेशा भटकाव के दौर से गुजरती रही है। संघ समय के अनुरूप उन्हें मित्र बनाकर शाखा में शामिल करेगा। (ट्रांसजेंडरों से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा) संघ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता। भारत माता को प्रणाम करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है।
संघ में महिलाओं की कैसी भागीदारी है?
राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से महिलाएं 1933 से संघ कार्यों का हिस्सा रही हैं। दैनिक शाखा के अलावा, पुरुष और महिलाएं सेवा और महिला सशक्तिकरण संबंधी संघ की अन्य गतिविधियों में भी साथ मिलकर काम करते हैं।
संघ ने राष्ट्रीय ध्वज के स्थान पर भगवा ध्वज क्यों अपनाया?
भगवा रंग गुरु का प्रतीक होने के कारण चुना गया, क्योंकि इंसानों से गलती होना स्वाभाविक है। यह भगवा बनाम तिरंगा नहीं, बल्कि तिरंगे के साथ भगवा है। संघ ने राष्ट्रीय ध्वज की रक्षा की है और उसके लिए बलिदान भी किया।
संघ उद्यमिता और रोजगार सृजन पर क्या करता है?
संघ व्यापारिक समुदायों सहित सभी वर्गों से जुड़कर रोजगार सृजन के लिए जिला-स्तरीय प्रयासों को बढ़ावा देता है। लघु उद्योग भारती और स्वावलंबी भारत अभियान इसके उदाहरण हैं। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी, उद्यमियों और एमएसएमई की प्रमुख भूमिका है। संघ स्वदेशी सिद्धांत पर आधारित नीतियों का समर्थन करता है।
मीडिया द्वारा संघ की आलोचना पर क्या कहना है?
संघ तो हमेशा ही विरोध का सामना करता रहा है, लेकिन वह केवल सच्ची और ईमानदार आलोचना पर ही प्रतिक्रिया करता है।
राजनीति में संघ की क्या भूमिका है?
संघ समाज को एकजुट करने के लिए काम करता है, इसकी दिलचस्पी राजनीति में नहीं है। यह राष्ट्र के लिए लाभकारी नीतियों का समर्थन करता है। हम राष्ट्रनीति का समर्थन करते हैं, राजनीति का नहीं। संघ भारत के कल्याण के लिए काम करने वाले सभी दलों को समर्थन देता है।
संघ में शाखा की क्या भूमिका है?
शाखाएं लोगों के लिए मुद्दों को पहचानने और संबोधित करने का साधन हैं। संघ लोगों के साथ रिश्ता जोड़ने के कारण आगे बढ़ा है, प्रचार से नहीं।
संघ में कितने प्रचारक हैं?
वर्तमान में लगभग 3,700 प्रचारक हैं। 200-250 स्थायी रूप से कार्यरत हैं और हर वर्ष 500-550 युवा संघ से जुड़ रहे हैं। 60 लाख स्वयंसेवकों में से लगभग 30 लाख गृहस्थ हैं। संघ गृहस्थों का संगठन है, तपस्वियों का नहीं।
भारत—पाकिस्तान संबंध पर संघ के क्या विचार हैं?
भारत सदैव शांति चाहता है, लेकिन पाकिस्तान बार-बार भारत को नुकसान पहुंचाने के प्रयास में खुद मुंह की खाता है। जब भी वह हमला करे हमें उसका उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए।
आर्थिक असमानता पर क्या कहेंगे?
केंद्रीकृत अर्थव्यवस्थाओं ने संसाधनों को कुछ ही लोगों की मुट्ठी में भर दिया है। भारतीय मॉडल बड़े पैमाने पर उत्पादन के बजाय जनता द्वारा उत्पादन की वकालत करता है। यह सबसे योग्य के जीवित रहने की बात नहीं करता, बल्कि योग्यतम द्वारा दूसरों को जीवित रहने में मदद करने का विचार प्रस्तुत करता है।
घुसपैठ और रोहिंग्या मुद्दे पर क्या मानना है?
स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सीमाओं को सुरक्षित करना चाहिए।
कन्वर्जन और वोट बैंक पर क्या कहेंगे?
हिंदुओं को जाति के आधार पर बांटने से उनमें असुरक्षा की भावना पैदा होती है। हमें खुद को सुधारना और शिक्षित करना होगा, ताकि राजनीति हमें विभाजित न कर सके। हमारी एकता हमारी सभ्यता का कवच बनी है।
जाति आधारित राजनीति पर आपके क्या विचार हैं?
जाति-आधारित राजनीति एकता के लिए रोड़ा है। शाखाओं में पोषित स्नेह और सहयोग का वातावरण भेदभाव को दूर करने में सहायक है। पूर्ण समानता के स्तर को हासिल करने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।
प्रतिभा पलायन पर संघ क्या सोचता है?
यह तभी रुकेगा जब युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझेंगे और भारत में उनकी प्रतिभा को उचित पहचान मिलेगी।

लव जिहाद के संदर्भ में संघ की क्या योजना है?
घर में संस्कारों को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। मुस्लिम समुदाय को अपने लोगों को भी शिक्षित करना होगा। हम न तो किसी का कन्वर्जन करना चाहते हैं और न ही किसी समुदाय को विभाजित, लेकिन हमें अपने घर को मजबूत बनाना होगा।
हिंदू धर्म और हिंदुत्व को स्पष्ट करें?
हमें औपनिवेशिक मानसिकता से निकलना होगा। जहां ‘इज्म’ का अर्थ है ‘वाद’, जो सीमित समूह को दर्शाता है, वहीं ‘त्व’ समावेशी भाव का प्रतीक है। हिंदुत्व समावेशी है और संघ का उद्देश्य सभी हिंदुओं को एक पहचान के साथ एकजुट करना है। ‘सत्य पर अमल करें, दयालु बनें, अपने दिल और दिमाग को शुद्ध रखें और जो भी करें, राष्ट्र हित में करें।’
भारत की पंथनिरपेक्षता पर आपके क्या विचार हैं?
पश्चिमी मॉडल के जन्म से बहुत पहले से भारत पंथनिरपेक्ष रहा है। हमारे संविधान निर्माता हिंदू थे और इसलिए उन्होंने राज्य को पंथनिपरेक्ष बनाया। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने ऐसा नहीं किया। व्यक्ति पंथनिरपेक्ष नहीं हो सकता; केवल राज्य ही पंथनिरपेक्ष हो सकता है। हम पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र हैं। यहां अन्य विचारधाराओं को मानने वाले लोग भी हिंदू त्योहारों और अनुष्ठानों का पालन करते हैं। मातृभूमि और भारत माता सनातन स्वरूप हैं, न कि औपनिवेशिक काल के बाद उभरे विचार। अखंड भारत तभी साकार हो सकता है जब प्रत्येक हिंदू इस सत्य को समझे।
प्रौद्योगिकी और एआई को लेकर क्या करेंगे है?
हम विकास को नही रोक सकते, लेकिन इसके उपयोग को नियंत्रित कर सकते हैं। गैजेट के इस्तेमाल में बच्चों को बातचीत के माध्यम से अनुशासित किया जा सकता है। अगर व्यक्ति अनुशासित है तो हर प्रौद्योगिकी मानवता के लिए लाभप्रद हो सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली और योग पर क्या कहना है?
हानिकारक आदतों से दूर रहें और अच्छे तौर-तरीकों का पालन करें। अभिभावकों को युवाओं का मार्गदर्शन प्यार और समझदारी से करना चाहिए। उपदेश देने से पहले, हमें खुद अपने अंदर उन आदतों का विकास करना होगा, क्योंकि बच्चे जो देखते हैं, उसी का अनुकरण करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए संघ क्या कर रहा है?
स्वयंसेवक जल संरक्षण, प्लास्टिक हटाने और वृक्षारोपण जैसे पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं। गलत आदतें पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं। जनता के नजरिए में बदलाव आने से नीतियों पर असर होगा।
महिला-पुरुष समानता पर संघ के क्या विचार हैं?
पुरुष और महिला बौद्धिक और मानसिक रूप से समान और एक-दूसरे के पूरक हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘महिलाओं की भागीदारी के बिना, भारत का उद्धार असंभव है। मां पहली शिक्षिका होती है।’ महिलाओं को अपनी क्षमताओं को स्वयं परखने की आजादी दें, वे सब कार्य कर सकती हैं।
भारत-चीन संबंधों पर संघ क्या दृष्टिकोण है?
नीति कभी स्थायी नहीं होती। हम सभी के साथ मित्रता चाहते हैं, लेकिन चीन को एक मजबूत भारत रास नहीं आता। शिष्टाचार निभाते हुए हमें अनिवार्य रूप से अपनी संप्रभुता की रक्षा भी करनी होगी।
सेकुलर मीडिया के वर्तमान रवैये पर क्या कहना चाहेंगे?
जागरूकता महत्वपूर्ण है। विकिपीडिया पर कभी एक विचारधारा का बोलबाला था, लेकिन अब ग्रोकिपीडिया और चैटजीपीटी जैसे अन्य प्लेटफ़ॉर्म भी आ चुके हैं। स्वयंसेवक इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। मीडिया से लोगों को जानकारी देने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन उसका व्यावसायिक रुख दर्शकों को सनसनीखेज सामग्री परोसने पर केंद्रित है, फिर भी उम्मीद है कि सकारात्मक बदलाव आएगा।
न्यायिक सुधारों पर आपका क्या कहना है?
मुख्य न्यायाधीश के आह्वान के बावजूद सार्थक बदलाव अब भी दूर हैं। अधिवक्ता परिषद ने संघ की प्रेरणा से कई सुझाव प्रस्तुत किए हैं, लेकिन उन पर अभी अमल नहीं हुआ है।
संघ से कैसे जुड़ें?
यदि आप समाज के लिए कुछ भी अच्छा कर रहे हैं तो आप स्वत: ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनौपचारिक सदस्य हैं। आम नागरिक स्वयंसेवकों और स्थानीय शाखाओं से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं। 100 वर्ष के बाद, संघ सभी को अपनी क्षमता और समय के अनुसार योगदान करने का अवसर दे रहा है।

















