'छलह रहा पश्तूनों का दर्द, मुनीर की फौज के नहीं रुक रहे जुल्म', जिन्ना के देश की फौज की असलियत बताई CM सोहेल ने
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‘छलह रहा पश्तूनों का दर्द, मुनीर की फौज के नहीं रुक रहे जुल्म’, जिन्ना के देश की फौज की असलियत बताई CM सोहेल ने

इस्लामाबाद में राजनीतिक अस्थिरता है और सेना की छवि खराब है, इसलिए मुनीर की कथित चाल है कि पश्तूनों की क्षेत्रीय पहचान पर चोट करके सत्ता बचाई जाए

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Nov 17, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
गत सितंबर माह में खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में पाकिस्तानी वायुसेना ने रात 2 बजे आठ JF-17 लड़ाकू विमानों से बमबारी की थी, जिसमें कम से कम 30 स्थानीय नागरिक मारे गए थे (File Photo)

गत सितंबर माह में खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में पाकिस्तानी वायुसेना ने रात 2 बजे आठ JF-17 लड़ाकू विमानों से बमबारी की थी, जिसमें कम से कम 30 स्थानीय नागरिक मारे गए थे (File Photo)

पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पश्तून आबादी पर सेना के दमन जारी हैं। आज तक पश्तून जिन्ना के देश के फौजियों की यातनाएं सह रहे हैं, उनके बुरे बतार्व को झेल रहे हैं और ज्यादतियों से आहत हैं। खैबर पख्तून ख्वा में हालात सच में बेहद गंभीर हैं, लेकिन इस्लामाबाद में उनके इस दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। पिछले कुछ दिनों में तो ये दमन सारी हदें पार कर चुके हैं। हालत यह है कि खैबर पख्तून ख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित कई नेता व स्थानीय प्रतिनिधि खुलेआम इस मुद्दे को उठा रहे हैं। वे पश्तूनों पर फौजी अत्याचारों का खुलासा कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना जनरल असीम मुनीर की अगुआई में बार-बार आतंक विरोधी ऑपरेशन के नाम पर आम पश्तूनों को निशाना बना रही है। मुख्यमंत्री अफरीदी ने एक चैनल से बात करते हुए इस दमन की पोल खोली है।

गत सितंबर माह में खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में पाकिस्तानी वायुसेना ने रात 2 बजे आठ JF-17 लड़ाकू विमानों से बमबारी की थी, जिसमें कम से कम 30 स्थानीय नागरिक मारे गए थे, जिसमें महिलाएं और बच्चें भी शामिल थे। सेना द्वारा चार घरों को निशाना बनाया गया था, जिससे पूरा गांव तबाह हो गया था। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को ‘नरसंहार’ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए हैं।

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी

इसके बाद अभी अक्तूबर माह में ओरकजई प्रांत में सैन्य ऑपरेशन के दौरान तालिबान आतंकियों द्वारा पाकिस्तान सेना पर हमला हुआ। इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल जुनैद आरिफ, मेजर तय्यब रहत व नौ अन्य सैनिक मारे गए। जवाबी सैन्य कार्रवाई में 19 आतंकी ढेर किए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई की आड़ में आम लोगों पर जुल्म किए गए।

इस नवंबर माह में हाल में बन्नू जिले के मिरयां इलाके में टीटीपी ने पाकिस्तनी सेना के काफिले पर हमला किया, जिसमें 15 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इसके जवाब में सेना ने स्थानीय पश्तून आबादी में कई जगह छापेमारी और लूटपाट की, निर्दोष नागरिकों को जबरन हिरासत में लिया गया।

इस घटना के बाद पाकिस्तन की सेना पर आरोप लगाए गए हैं कि सेना ने अपने कुत्ते मस्जिदों में बांधकर स्थानीय आबादी के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई है। महिलाओं का अपमान और आम नागरिकों की हत्या तक की जा रही है। मुख्यमंत्री अफरीदी ने सार्वजनिक तौर पर सेना को पश्तून विरोधी बताया है।

दरअसल, शिकायत यह है कि जिन्ना के देश की सेना खोजी अभियान के नाम पर पश्तूनों के घरों में जबरन घुसती है, लूटपाट करती है, और लोगों, खासकर युवाओं को हिरासत में ले लेती है। महिलाओं और बच्चों के अपमान की कई घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं। मस्जिदों और घरों को बर्बरता से निशाना बनाया गया है, जिससे आमजन का सेना से भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है।

पाकिस्तान में तालिबान को पकड़ने के नाम पर पंजाब से गई सेना पश्तूनों के खिलाफ छापेमारी और ऑपरेशन कर रही है जिसमें ग्रामीण आबादी को आतंकवादी बताकर मारने के कई उदाहरण रिपोर्ट किए जा चुके हैं। खासकर तिराह और बन्नू जैसे इलाकों में अधिकांश पश्तून लोग खुद को सेना और आतंकियों के बीच फंसा महसूस कर रहे हैं। कहीं कहीं तो सेना के दमन से वे तालिबान और अलगाववादी संगठनों की ओर जाते दिख रहे हैं।

अधिकांश पश्तून लोग खुद को सेना और आतंकियों के बीच फंसा महसूस कर रहे हैं (File Photo)

पाकिस्तान के फौजी जनरल असीम मुनीर की सेना पश्तूनों को देश की समस्या बताकर उनका तालिबान से संबंध जोड़ने की कोशिश करती है। इस्लामाबाद में राजनीतिक अस्थिरता है और सेना की छवि खराब है, इसलिए मुनीर की कथित चाल है कि पश्तूनों की क्षेत्रीय पहचान पर चोट करके सत्ता बचाई जाए। इसलिए फौज आतंकी खतरे को दूर करने के नाम पर पश्तूनों को कुचलने की सैन्य कार्रवाई कर रही है। इसमें आम पश्तून मारे जा रहे हैं।

खैबर पख्तूनख्वा की स्थानीय सरकारें व मानवाधिकार संस्थाएं सेना की ज्यादतियों को लगातार उजागर करती आ रही हैंं कई बार स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने भी सेना की कार्यवाही में निर्दोष लोगों के हताहत होने की बात स्वीाकरी है। लेकिन सैन्य अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और नतीजा यह है कि खैबर पख्तूनख्वा के कई जिलों में पाकिस्तान की पकड़ घटती जा रही है। बताते हैं, इन जगहों पर तालिबान समर्थक संगठन मजबूत हो रहे हैं।

Topics: पाकिस्तानterroroppressionPakistan Armymunirखैबर पख्तूनख्वाkhebar Pakhtunkhwaसैन्य अत्याचारcm sohail afridi
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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