दिल्ली बम विस्फोट: डाॅक्टर का बाना, आतंकी कारनामा
June 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

दिल्ली बम विस्फोट: डाॅक्टर का बाना, आतंकी कारनामा

दिल्ली विस्फोट ने आतंकवाद के नए रूप को उजागर किया। मुस्लिम डॉक्टरों ने पेशे की आड़ में सामाजिक विश्वास, तकनीकी ज्ञान और वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर आतंक को संगठित बनाया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की पहचान जटिल हो गई

Written byअजमल शाहअजमल शाह
Nov 17, 2025, 12:40 pm IST
in भारत, विश्लेषण, दिल्ली

हाल के वर्षों में ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ आतंक की नई और परिष्कृत रणनीति के रूप में उभरा है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद व अल-कायदा से जुड़े जिहादी संगठन डॉक्टरों, प्रोफेसरों और पेशेवरों के जरिए अपना नेटवर्क फैलाते हैं। ये शिक्षित चेहरे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण लंबे समय तक संदेह से परे रहते हैं। लालकिला विस्फोट की जांच में सामने आया कि संदिग्धों ने विश्वविद्यालयों और क्लीनिकों को वित्तपोषण व समन्वय केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया।

जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले इस नेटवर्क के आतंकियों ने किसान बनकर दो वर्ष में लगभग 2,921 किलोग्राम एएनएफओ विस्फोटक जुटाया और किसी को शक भी नहीं हुआ। धन के स्रोत भी उतनी ही चालाकी से छिपाए गए। लगभग 50 से 100 लाख रुपये हवाला नेटवर्क के जरिए भेजी गई, जिसे छात्रवृत्ति या समाजसेवा के लिए दान के रूप में दिखाया गया। यह पैसा पाकिस्तान के बहावलपुर से एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के रास्ते आता था, जो किसी कॉर्पोरेट मैसेजिंग सिस्टम की तरह काम करते थे, जहां बम बनाने की विस्तृत जानकारी और हमले के नक्शे गोपनीय तरीके से साझा किए जाते थे, बिना कोई डिजिटल निशान छोड़े।

इस नेटवर्क की कार्यशैली किसी कॉर्पोरेट संरचना जैसी थी, जहां भूमिकाएं बंटी हुई थीं। मौलवी इरफान अहमद जैसे इस्लामी उपदेशक ‘फर्जंदान-ए-दारूल उलूम’ जैसे ऑनलाइन समूहों के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर खींचते थे। उन्हें ‘मकसद’ और ‘मान-सम्मान’ का लालच देकर संगठन से जोड़ते थे। वहीं, आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार जैसे स्थानीय सहयोगी जमीन पर सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनका काम था प्रचार सामग्री वितरित करना, जनभावना पर नजर रखना और ऐसे लोगों की पहचान करना जो आगे चलकर नेटवर्क के लिए सहयोगी या सूचक बन सकते थे। वहीं, पेशेवरों ने ऑपरेशन को और परिष्कृत रूप दिया और अपने सामाजिक व संस्थागत पदों का इस्तेमाल नेटवर्क को जोड़ने के पुल के तौर पर किया।

सहारनपुर के अस्पताल विशेषज्ञ अदील अहमद राथर ने सरकारी मेडिकल कॉलेज अनंतनाग के लॉकर में एके-47 राइफल छिपाई और पूरी गतिविधि को नियमित औजार-स्टॉक जांच के बहाने ढक दिया। वहीं, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के डॉ. मुअजम्मिल गनई ने धौज गांव के मामूली किराए वाले कमरों में ‘शोध कार्य’ की आड़ में एएनएफओ भरे सूटकेस तैयार किए। जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा जमात-उल-मोमिनात से जुड़ी डॉ. शाहीन सईद विस्फोटक डिटोनेटर और टाइमर के सुरक्षित ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी संभालती थी। उसकी सामाजिक स्थिति और शांत व्यवहार उसे राज्यों की सीमाएं पार करने में मदद करते थे, इसलिए उस पर कभी शक नहीं गया। डॉ. मुअजम्मिल, डॉ. आदिल, डॉ. उमर मोहम्मद और डॉ. शाहीन ने मिलकर 26 लाख रुपये जुटाए, जो उमर को सौंपे गए। इस धन से गुरुग्राम व नूह क्षेत्र में 3 लाख में 26 क्विंटल अमोनियम नाइट्रेट–फ्यूल ऑयल (एनपीके) उर्वरक खरीदा गया, जिससे एएनएफओ विस्फोटक तैयार किया जाना था।

यह ‘पेशेवर आवरण’ केवल संचालन तक सीमित नहीं था, बल्कि रेकी तक फैला हुआ था। अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में जनरल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर मोहम्मद अक्सर आई-20 कार में दिल्ली के उच्च सुरक्षा वाले इलाकों-संसद व गौरी शंकर मंदिर जैसे स्थानों के आसपास घूमता था। देखने में लगता था कि वह किसी एक साधारण शिक्षित नागरिक जैसा लगता था, लेकिन वास्तव में वह संभावित हमलों के लक्ष्य तलाशता था। इस रणनीति की सबसे बड़ी ताकत थी समाज के भरोसे का दुरुपयोग।

डॉक्टर या शिक्षक जैसे पेशेवरों पर संदेह कम किया जाता है, जिससे उन्हें सीमाओं के भीतर या पार स्वतंत्र रूप से आने-जाने और संवेदनशील सामान तक पहुंच का मौका मिल जाता है। यही कारण था कि नाइट्रेट जैसे विस्फोटक रसायन हरियाणा के पचास से अधिक विक्रेताओं से खुलेआम खरीदे गए और किसी को शक तक नहीं हुआ। यह तरीका वैश्विक पैटर्न की याद दिलाता है। 2015 के पेरिस हमलों में अब्देल हमीद अबाउद ने ट्रैवल उद्योग के ‘लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट’ के रूप में अपनी नौकरी का इस्तेमाल आतंकियों को गुप्त रूप से लाने-ले जाने के लिए किया था। ठीक वैसे ही, 2008 के मुंबई हमले में डेविड हेडली ने कारोबारी पहचान और वीजा कवर के जरिए लक्ष्यों की टोह ली थी।

आतंकी हमले में गिरफ्तार ‘डॉक्टर’

दिल्ली विस्फोट में पहली बार कई ‘डॉक्टरों’ की गिरफ्तारी हुई है, जिनके तार आतंकी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। एजेंसियां उनसे पूछताछ कर उनके नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं

डॉ. उमर मोहम्मद: इसने लालकिले पर हुए आत्मघाती बम धमाके को अंजाम दिया। पुलवामा कश्मीर का रहने वाला उमर डॉ. मुअजम्मिल अहमद का करीबी था। इसने ही ओएलएक्स के जरिए आई-10 कार खरीदी थी। उसके दो भाई और भाभी भी डॉक्टर है। उसकी सगाई हो चुकी थी। दो महीने बाद उसकी शादी होनी थी।

डॉ. आदिल अहमद राथर: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम के रहने वाला राथर अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट रह चुका है। एक वर्ष से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के अस्पताल में चिकित्सक के तौर पर काम कर रहा था। अनंतनाग में छापे के दौरान उसके लाॅकर से एके-47 बरामद हुई थी।

डॉ. मुअजम्मिल अहमद गनई: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है। आदिल से सुराग मिलने के बाद उसे पकड़ा गया। फरीदाबाद के गांव में इसके किराए के घर से लगभग तीन टन एएनएफओ बरामद किया गया।

डॉ. सज्जाद अहमद मला: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का सज्जाद अल-फलाह में ही पढ़ाता था। उमर का दोस्त है। उससे पूछताछ जारी है।

डॉ. शाहीन: यह मुअजम्मिल की मित्र है। इसकी कार मुजम्मिल के पास से बरामद हुई, जिसमें एके-47 बरामद हुई है। यह जैश की महिला विंग की भारत इकाई की प्रमुख बताई जा रही है।

आतंकवाद का नया पैटर्न

भारत में 2001 के बाद से कम से कम 36 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिनमें शिक्षित पेशेवर शामिल थे। 2018 में हैदराबाद के इंजीनियरों ने क्रिप्टोकरेंसी स्टार्टअप्स के माध्यम से आईएसआईएस को धन पहुंचाया, जबकि 2014 में मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने लश्कर-ए-तैयबा की रकम को शेल कंपनियों के जरिए सफेद धन में बदला। ये उदाहरण दिखाते हैं कि ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी केवल सुरक्षा कवच नहीं देते, बल्कि नए-नए तरीके भी लाते हैं-जैसे आतिशबाजी की तकनीक से ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (DIY) तरीके के विस्फोटक डिटोनेटर तैयार करना। फरीदाबाद स्थित नेटवर्क का मुख्य केंद्र सहारनपुर और पुलवामा तक फैला हुआ था। गिरफ्तार आरोपियों से बरामद डायरी में ‘ऑपरेशन दिवाली’ का उल्लेख मिला, जिसमें तय समय पर हमले की योजना दर्ज थी। यह दो वर्ष की तैयारी का परिणाम था।

जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित हैंडलरों ने कार्ययोजना के नक्शे मुहैया कराए, मगर इसका क्रियान्वयन पूरी तरह स्थानीय स्तर पर हुआ। पेशेवरों ने सामान्य जीवन की आड़ में असामान्य कृत्यों को अंजाम दिया-क्लासरूम रणनीति कक्ष बन गए, अस्पताल गोपनीय भंडारगृह। इस तरह का संगठित और बारीकी से जुड़ा ढांचा इतना मजबूत था कि नेटवर्क के हिस्से अलग-अलग रहते हुए भी उसका अस्तित्व सुरक्षित बना रहा। जोखिम फैलाकर उन्होंने उसे विफल करना लगभग असंभव बना दिया। लालकिला विस्फोट में मुस्लिम चिकित्सकों की संलिप्तता एक व्यापक और चिंताजनक प्रवृत्ति का हिस्सा है। पेशे की आड़ में उन्होंने समाज का भरोसा तोड़ा और संस्थागत विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचाया। वे अपनी पेशेवर पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा का इस्तेमाल आतंक, सांप्रदायिक तनाव और गहरी नैतिक चूक के औजार के रूप में कर रहे हैं।

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान का मामला इस पैटर्न को और स्पष्ट करता है। 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 68 बच्चों की मौत के बाद उसने ‘निजी प्रयास’ से ऑक्सीजन उपलब्ध कराकर सुर्खियां बटोरी थी। तब वह अस्पताल में कार्यरत था और बच्चों की मौत का दोष अस्पताल प्रशासन व राज्य सरकार पर मढ़ा था। कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और भ्रष्टाचार के आरोपों में उसे जेल भेजा गया।

2018 विभागीय जांच में यह कहते हुए उसे दोषमुक्त किया गया कि उसने ‘सारे प्रयास किए’। उस पर सरकारी अस्पताल में रहते हुए निजी क्लीनिक/नर्सिंग होम चलाने का भी आरोप है। इसके अलावा, दिसंबर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक भाषण के बाद उस पर मजहबी व सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप लगे। डॉ. खान पर नवंबर 2023 में अपनी किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy: A Doctor’s Memoir…’ के जरिए पर सरकार विरोधी चरित्र और साम्प्रदायिक द्वेष बढ़ाने के आरोप लगे। उसकी सेवाएं 2021 में समाप्त कर दी गई, पर लेकिन किताब और भाषण से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है।

यह प्रवृत्ति भारत के अन्य मामलों से भी मेल खाती है, जहां डॉक्टरों ने आतंकवाद या सामाजिक अशांति को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। दिल्ली की सामान्य चिकित्सक डॉ. इशरत जहां को 2019 में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसके क्लिनिक से फर्जी बिलों के जरिए आईएसआईएस को धन भेजने, मरीजों की काउंसलिंग के बहाने समर्थक जुटाने और लगभग 20 लाख रुपये की धन शोधन की बात सामने आई। चिकित्सक होने की आड़ में वह प्रशिक्षण के लिए सीरिया तक बिना रोकटोक जाती रही। इसी तरह, केरल में 2018 के ‘लव जिहाद’ जांच में डॉ. जुनैद की संलिप्तता सामने आई। उसने प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीएफआई से जुड़े नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों के जरिए अंतरपांथिक दंपतियों को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित किया। इन शिविरों में चिकित्सा परामर्श के नाम पर इस्लामी कट्टरपंथ का प्रचार किया जा रहा था, जिससे 22 जबरन कन्वर्जन के मामले उभरे और राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।

दुनिया भर में यह प्रवृत्ति और खतरनाक रूप ले चुकी है, जहां मुस्लिम डॉक्टर सीधे आतंकवाद या सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ते देखे गए हैं। 2019 में श्रीलंका के कुरुनेगाला के प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शफी शिहाबुद्दीन पर आरोप लगा कि उसने 2006 से 2018 के बीच 4,000 सिंहली महिलाओं की सहमति के बिना उनकी नसबंदी की। उसने प्रसव के दौरान महिलाओं की फेलोपियन ट्यूब बांध दी या अंडाशय निकाल दिए, ताकि गृहयुद्ध के बाद तमिल आबादी को नियंत्रित किया जा सके।

साक्ष्य के अभाव में 2022 में उसे बरी कर दिया गया। इसके कारण सांप्रदायिक हिंसा भड़की, जिसमें 250 लोग मारे गए और एक लाख विस्थापित हुए। इसी तरह, 2007 में ब्रिटेन में इराकी मूल के डॉ. बिलाल अब्दुल्ला अल-कायदा के लिए ग्लासगो एयरपोर्ट पर कार बम विस्फोट की साजिश रची। उसने प्रोपेन गैस से भरी जीप को हवाईअड्डे के टर्मिनल में घुसा दिया, जिससे पांच लोग घायल हुए। ब्रिटिश राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में उसकी भूमिका ने उसे भीड़भाड़ वाले स्थानों की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच दी थी, जिसका उसने आतंकवादी मंसूबों के लिए दुरुपयोग किया।

तीन घंटे तक मस्जिद के पास क्यों रहा?

घटनास्थल वाले दिन डॉ. उमर का विस्फोटकों से भरी कार को तीन घंटे तक सुनहरी मस्जिद के पास खड़ा रखना, एक सामान्य-सी दिखने वाली असावधानी को रहस्यमय रणनीतिक बिंदु में बदल देता है। यह स्थान साधारण नहीं था। यह दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र की ओर जाने वाला प्रवेश द्वार है, जहां देश की नीतियों और फैसलों की धड़कनें चलती हैं। ऐसे क्षेत्र में लंबा ठहराव किसी गहरे प्रतीक और सुनियोजित उद्देश्य की ओर संकेत करता है।

अल-फलाह मान्यता होगी रद्द!

लालकिला विस्फोट मामले में अल-फलाह विश्वविद्यालय आतंकी नेटवर्क से संभावित संबद्धता के कारण जांच के घेरे में है। एनआईए ने 12 नवंबर की छापेमारी में रसायन विभाग की प्रयोगशालाएं सील कीं और सात प्रोफेसरों, जिनमें डॉ. मुअजम्मिल, डॉ. आदिल व डॉ. शाहीन शामिल हैं, को हिरासत में लिया। लगभग 70 कर्मचारियों से पूछताछ हुई, विशेषकर ‘चैरिटी’ फंडिंग को लेकर।

विश्वविद्यालय ट्रस्ट पर सऊदी अरब सहित विदेशी संस्थाओं से आर्थिक मदद लेने के आरोप भी हैं।विश्वविद्यालय पर संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों की नियुक्ति के आरोप हैं, जिनमें फिदायीन डॉ. उमर भी शामिल था, जिसे 2023 में जनरल मेडिसिन विभाग में रखा गया था। वह पहले अनंतनाग कॉलेज से निष्कासित हो चुका था। डॉ. मुअजम्मिल गनई फिजियोलॉजी विभाग में कार्यरत था और विस्फोटक बनाने में शामिल पाया गया। सबसे गंभीर मामला डॉ. निसार-उल-हसन का है, जिसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर बर्खास्त किया था, फिर भी 2023 में मेडिसिन विभागाध्यक्ष बना। विस्फोट के बाद वह फरार है। इन नियुक्तियों पर यूजीसी ने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता साबित होने पर मान्यता रद्द हो सकती है। फर्जी रैंकिंग दावे पर राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने भी नोटिस भेजा है। 2014 में स्थापित इस निजी विश्वविद्यालय को एआईयू अपनी सूची से पहले ही हटा चुका है।

जांच एजेंसियों ने करीब 50 से ज्यादा जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें डॉ. उमर की गाड़ी की मूवमेंट दर्ज है। फरीदाबाद से दिल्ली में घुसने के बाद वह पहले साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में दिखा, फिर ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, उसके बाद सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की रिंग रोड पर घूमता नजर आया। वहां से वह नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट गया, फिर अशोक विहार (नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) में कुछ खाने के लिए रुका। फिर दोबारा सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट लौटा, जहां एक मस्जिद में गया और फिर वहां से 3:19 बजे लालकिला पार्किंग एरिया पहुंचा और 189 मिनट कार में अकेले बैठा रहा। इसी बीच जैश-ए-मोहम्मद के उमर बिन खत्ताब ने टेलीग्राम पर लगभग सौ संदेश भेजे।

शायद ‘हमला रोकने’ के संदेश, जिससे वह हताशा में डूब गया। हालांकि, फुटेज में उसके बाहर निकलने के ठोस प्रमाण नहीं हैं, लेकिन धुंधली छाया से यह आभास होता है कि वह कभी-कभार पास की मस्जिद में वज़ू के लिए गया या आसपास के दुकानदारों से बात कर इलाके की भीड़ का अंदाजा लिया।

प्रश्न है तीन घंटे तक उसने क्या किया? क्या वह फोन से जुड़े 50-100 किलो एएनएफओ विस्फोटक में अंतिम तकनीकी बदलाव कर रहा था या मानसिक रूप से टूट रहा था? क्या उसने शाहीन के महिला नेटवर्क से मुलाकात की, जैसा कि सईद के नेटवर्क से उसका संपर्क हुआ, जैसा कि आसपास मिले मोबाइल सिग्नलों पर एनआईए की अपुष्ट रिपोर्टों में आसपास के मोबाइल सिग्नल संकेत देते हैं। या वह सचिवालय के आसपास की सुरक्षा की टोह ले रहा था, जो संसद परिसर से करीब 800 मीटर दूरी पर है। कहीं वहां विस्फोट की साजिश तो नहीं रची जा रही थी? सब कुछ अब भी अनुत्तरित है।

नवंबर की सीसीटीवी फुटेज में डॉ. उमर शाम लालकिला के पास विस्फोट से पहले 6:30 बजे पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद से बाहर निकलता दिखा। वह मस्जिद में लगभग 10-15 मिनट रहा। यह मस्जिद तबलीगी जमात से जुड़ी है। इसके बाद वह कार से लगभग 500 मीटर दूर नेताजी सुभाष मार्ग की ओर बढ़ गया। इससे पहले, दोपहर करीब 2:30 बजे उसे सुनहरी मस्जिद के पास भी ऐसे ही संक्षिप्त दौरे करते देखा गया था। मानो उमर ‘फिदायीन’ अंजाम के लिए अपने मन को कठोर बना रहा हो। जिहादी परंपराओं में इसे ‘हमले से पूर्व की नमाज’ माना जाता है। जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा जैसी विचारधाराएं इसी मानसिकता को पोषित करती हैं, जिसे उमर बिन खत्ताब जैसे हैंडलर फतवों के जरिए हमलों को ‘रक्षात्मक जिहाद’ के रूप में न्यायसंगत ठहराते हैं।
उमर का मस्जिद जाना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह केवल मानसिक सुकून की तलाश थी या शाहीन के नेटवर्क से किसी गुप्त मुलाकात का हिस्सा? क्या वह मस्जिद में किसी से मिला या सूचना का आदान-प्रदान हुआ? लगभग 8 करोड़ अनुयायियों वाला तबलीगी जमात भले ही दावा करता हो कि हिंसा से उसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन उमर की फुटेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर उठ रही ‘मस्जिद ऑडिट’ जैसी मांगें 2020 के दिल्ली दंगों की याद दिलाती हैं, जहां मस्जिदों से हिंसा भड़काई गई थी।

Topics: Dr. Shaheen Saeedजनरल मेडिसिन असिस्टेंट प्रोफेसर  मौलवी इरफान अहमद दिल्ली बम विस्फोटपाञ्चजन्य विशेषDr. Umar Mohammadअजमल शाहDr. Muazzammil GanaiDr. Adeel Ahmed Ratherअस्पताल विशेषज्ञ
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जनजाति सुरक्षा मंच का प्रतिनिधिमंडल

विशेष रिपोर्ट : जनजातीय पहचान बचाने की पहल

कौन हैं संदिग्ध घुसपैठिए और कैसे मची वापसी की होड़? : बंगाल के Deport Plan की परख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश : ‘सामने खर-दूषण हों तो शस्त्र भी उठाना होगा!’

संस्कारहीन सियासत, ओछे बोल

अपने साथी विधायकों के साथ कोलकाता में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए ऋतब्रत बनर्जी (मध्य में)

पश्चिम बंगाल : सत्ता गई, पार्टी टूटी

कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय में मार्को रुबियो और उनकी पत्नी जेनेट डी. रुबियो

मिशनरी धुरी पर मार्को

Load More

ताज़ा समाचार

Bangladesh halt Sriram statue contruction

क्या बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के आगे झुकी सरकार? बंद किया श्रीराम प्रतिमा का निर्माण

समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव की घटना में आरपीएफ ने दर्ज कराई एफआईआर 

Gold Silver Price Today

Gold Silver Price Today: आज फिर बदले सोने-चांदी के दाम, जानिए अपने शहर का भाव

Love Jihad Islamic conversion Bhopal

कर्नाटक लव जिहाद: नईम बेग ने दलित हिन्दू लड़की को फंसाया, रेप किया और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया

प्रतीकात्मक तस्वीर

अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी पर बड़ा एक्शन, भारत-बांग्लादेश ने बॉर्डर सुरक्षा को लेकर लिए अहम फैसले

सायोनी घोष के ममता बनर्जी से बगावत पर छलका महुआ मोइत्रा का दर्द, बोलीं- अब किस पर भरोसा करेंगे?

Jaspal Rana death

निशानेबाज पद्मश्री जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

विश्व बाल श्रम विरोध दिवस

विकसित भारत के लिए कठोर बालश्रम से मुक्त समाज की अनिवार्यता डॉ. निवेदिता शर्मा

TMC के 28 में से 19 सांसदों ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, इस टूट से ऐसे बदल जाएगा लोकसभा का गणित; NDA होगी और मजबूत

लेखक सरना स्थल पर पूजा करते हुए

हम हैं सनातनी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies