सत्ता बचाने को 1975 में लगी थी इमरजेंसी, अब राष्ट्र बचाने के लिए लगनी चाहिए : अश्विनी उपाध्याय
August 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

सत्ता बचाने को 1975 में लगी थी इमरजेंसी, अब राष्ट्र बचाने के लिए लगनी चाहिए : अश्विनी उपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से छिड़ी नई बहस, कहा- भारत को बचाने के लिए लगनी चाहिए इमरजेंसी, तभी होगा आतंकवाद से जनसंख्या विस्फोट तक की समस्याओं का समाधान

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Nov 13, 2025, 03:57 pm IST
in भारत, मत अभिमत
Ashwini Upadhyay Haldwani Violence

अश्विनी उपाध्याय

लखनऊ (हि.स.) । सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने देश की मौजूदा परिस्थितियों को आंतरिक आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए भारत में एक या दो साल के लिए आपातकाल (इमरजेंसी) लगाने की मांग की है। उनकी इस मांग को लेकर देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। क्या भारत में वास्तव में ‘आंतरिक आपातकाल जैसी स्थिति’ बन रही है या यह केवल राजनीतिक अतिशयोक्ति है? जहां समर्थक इसे ‘राष्ट्रवादी चेतावनी’ बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला मान रहे हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपने लंबे संबोधन में आतंकवाद, घुसपैठ, धर्मांतरण, जनसंख्या विस्फोट, जिहाद के कई रूप, भ्रष्टाचार, हवाला कारोबार, विदेशी फंडिंग और प्रशासनिक अक्षमता जैसे मुद्दों को गिनाते हुए कहा कि सत्ता बचाने के लिए 1975 में आपातकाल लगाया जा सकता है तो राष्ट्र बचाने के लिए क्यों नहीं?

अब आतंकवाद सिर्फ बंदूक वाला नहीं, सोच वाला भी इस वीडियो में अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि पहले अनपढ़, गंवार, मजदूर आतंकवादी बनते थे। फिर इलेक्ट्रिशन, फिटर, प्लंबर बनने लगे। अब सिपाही, हवलदार, दरोगा तक आतंकवादी बन रहे हैं और अब तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर भी आतंकवादी बन रहे हैं। सोचिए, अगर हवाई जहाज का पायलट जिहादी मानसिकता का हुआ तो वह पूरा जहाज गिरा देगा, अगर ट्रेन का ड्राइवर जिहादी हुआ तो पूरी ट्रेन को भिड़ा देगा। उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद, अलगाववाद और आंतरिक विघटन की समस्या है, जबकि चीन में ऐसा नहीं है। भारत में आतंकवाद है, चीन में नहीं। भारत में अलगाववाद है, चीन में नहीं। भारत में घुसपैठ, धर्मांतरण, जनसंख्या जिहाद है, चीन में नहीं। इसलिए वहां शांति, समृद्धि और खुशहाली है और यहां अराजकता, असंतुलन और भय।

आर्टिकल 355 और 352 ही समाधान वीडियो में अश्विनी उपाध्याय कहते दिख रहे हैं, ‘भारत के संविधान में पहले से ही ऐसी परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था मौजूद है। संविधान का अनुच्छेद 355 कहता है कि बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से देश की सुरक्षा करना केंद्र सरकार का दायित्व है। अगर सरकार सामान्य परिस्थितियों में इन खतरों को नहीं रोक पा रही है तो अनुच्छेद 352 लागू किया जाना चाहिए। 352 में साफ-साफ कहा गया है कि यदि बाहरी युद्ध, आंतरिक विद्रोह या सशस्त्र संघर्ष का खतरा हो तो आपातकाल लगाया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि जब 1975 में प्रधानमंत्री का पद बचाने के लिए आपातकाल लगाया जा सकता है तो अब सनातन धर्म, राष्ट्र और संविधान की रक्षा के लिए क्यों नहीं।

आतंकियों का 2047 तक गजवा-ए-हिंद का टारगेट उपाध्याय ने कहा कि विदेशी शक्तियों के इशारे पर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश चल रही है। 2047 तक ‘गजवा-ए-हिंद’ का टारगेट लिया गया है, जैसे 1947 में देश का बंटवारा हुआ था, वैसे ही अब फिर से नरसंहार की तैयारी है। जनसंख्या अनुपात बदल रहा है। 800 जिलों में से 200 जिलों की, 6000 तहसीलों में से 1500 तहसीलों की डेमोग्राफी बदल चुकी है। ये हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा है।

जिहाद के हैं कई रूप- लैंड, लव, ड्रग, पॉपुलेशन उपाध्याय ने कहा कि आज आतंकवाद सिर्फ बंदूक वाला नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिक रूप से फैलाया जा रहा है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, पॉपुलेशन जिहाद-ये सब विदेशी शक्तियों के इशारे पर हो रहे हैं। इससे ‘इंटरनल डिस्टर्बेंस’ बढ़ रहा है। जब डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है, तब सरकार के पास आपात कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

लोकतंत्र की सीमाएं और अनुशासन की जरूरत उन्होंने लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र के रहते सरकार कुछ भी करती है तो हंगामा होता है। सीएए लागू करती है तो आगजनी होती है, एनआरसी की कोशिश करती है तो देशभर में दंगे। जब लोकतंत्र का दुरुपयोग राष्ट्रहित के खिलाफ हो रहा है तो राष्ट्र को बचाने के लिए आपातकाल जरूरी हो जाता है।

चीन की तरह सख्ती चाहिए, तभी भारत सुधरेगा उपाध्याय ने कहा कि आपातकाल लगाकर देश को सुधार की दिशा में ले जाना होगा। एक साल के लिए इमरजेंसी लगाकर पुलिस रिफार्म, जूडिशियल रिफार्म, एजुकेशनल रिफार्म, टैक्स रिफार्म, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म किए जाएं। एक सौ रुपये से बड़े नोट बंद करिए, एक हजार रुपये से ऊपर कैश ट्रांजैक्शन बंद करिए, सारी ब्लैक मनी खत्म हो जाएगी। हवाला कारोबार खत्म हो जाएगा। बेनामी संपत्ति को आधार से लिंक करिए, जब पूरी पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि जैसे चीन में भ्रष्टाचारियों को फांसी की सजा दी जाती है, वैसे ही भारत में भी देना चाहिए। जब तक भ्रष्टाचार, धर्मांतरण, घुसपैठ और विदेशी फंडिंग खत्म नहीं होगी, तब तक भारत मजबूत नहीं बनेगा।

मदरसे और गुलामी की विरासत करें खत्मउन्होंने सवाल उठाया कि जब मुगल चले गए, तो मदरसे क्यों चल रहे हैं? गुलामी की शिक्षा व्यवस्था क्यों जारी है? अब समय आ गया है कि गुलामी के निशान हटाए जाएं, गुलामी की कूप्रथाएं और नागरिक व्यवस्था बदली जाए।

चीन में शांति का कारण है अनुशासनउपाध्याय ने भारत की तुलना चीन से करते हुए कहा कि चीन में शांति, समृद्धि और खुशहाली है क्योंकि वहां हर नागरिक के लिए एक समान नियम हैं। वहां रोज आतंकवादी को मारना नहीं पड़ता, क्योंकि वहां आतंकवाद की जड़ें ही नहीं हैं। भारत में आतंकवादी मारने से आतंकवाद खत्म नहीं होता। एक अफजल मरेगा तो सौ अफजल निकलेंगे। असली इलाज अनुशासन और एक समान नागरिक कानून (यूनिफार्म सिविल कोड) है।

आपातकाल लगेगा तो घुसपैठिए भाग जाएंगे उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी लगते ही घुसपैठिए अपने आप भाग जाएंगे। अगर सरकार कठोर कदम उठाए। हवाला, ड्रग, धर्मांतरण और जनसंख्या जिहाद पर सख्त कानून बनाए तो भारत दुनिया का सबसे सुरक्षित देश बन सकता है। उपाध्याय का कहना है कि जब तक राष्ट्र के शत्रु सक्रिय हैं,तब तक शांति संभव नहीं। ऑपरेशन अब जरूरी है, क्योंकि वैक्सीन और दवा से इलाज नहीं हो रहा।

किसान की तरह देश को भी करनी होगी तैयारी

अश्विनी उपाध्यय का मानना है कि भारत को अब सुधारों की दिशा में ठोस और चरणबद्ध रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि किसान बुआई से पहले जुताई, गुड़ाई, निराई करता है, फिर बीज डालता है। देश को भी वैसा ही करना होगा। पहले सफाई, फिर सुधार। यह केवल प्रतीकात्मक तुलना थी, लेकिन इसका संदेश गहरा है कि सुधार किसी रातोंरात होने वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर तैयारी और अनुशासन से उपजने वाला परिणाम है।

Topics: इमरजेंसी भारतअनुच्छेद 352अनुच्छेद 355जनसंख्या जिहादचीन तुलनासुप्रीम कोर्टआतंकवादअश्विनी उपाध्यायआपातकालराष्ट्रवादभारतीय राजनीति
एजेंसी
एजेंसी
हिंदुस्थान समाचार (प्रतिष्ठत समाचार एजेंसी) [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Salman Rushdi Hadi Matar attacker

सलमान रुश्दी पर हमला: अमेरिकी जूरी ने हादी मातार को आतंकवाद के आरोप में दोषी ठहराया

supreme court

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला : कन्वर्जन के साथ समाप्त होगा अनुसूचित जाति का दर्जा, नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

supreme court

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा गड़बड़ी की जांच के लिए नई एसआईटी गठित,

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट बोला- सिर्फ आंदोलन हो रहा है तो पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती, शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने बिना अनुमति के अदालती सुनवाई की ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के इस्तेमाल पर लगाई रोक

supreme court

सुप्रीम कोर्ट में आज पेपर लीक पर सुनवाई: PIL में एक समान जांच व्यवस्था और संपत्ति जब्ती की मांग

Load More

ताज़ा समाचार

Sangamner FDA Raid Made in Pakistan Cosmetics Gori Cream Seized Ahilyanagar Panchjanya

अहिल्यानगर के गोल्डन मार्केट से ‘मेड इन पाकिस्तान’ सामान और खतरनाक गोरी क्रीम बरामद, शाहिद रियाज शेख गिरफ्तार

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

“5 अगस्त को पहली बार मीडिया के सामने आएंगी शेख हसीना”: दिल्ली में बांग्लादेश वापसी की रणनीति पर होंगे बड़े ऐलान!

Bangladesh Army New Cantonment Naikhongchhari Silkhali Base India Mizoram Border General Waker Uz Zaman Turkey Drone Panchjanya

भारत सीमा पर बांग्लादेश की बड़ी सैन्य घेराबंदी: नाइखोंगछारी में बना रहा छावनी, तैनात किए तुर्की से लिए हथियार!

British Museum 11th Century Maa Saraswati Vagdevi Idol Return Bhojshala Dhar Haryana Saraswati Board Panchjanya

लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से भारत वापस आएगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भोजशाला से जुड़ा है इतिहास!

CM Pushkar Singh Dhami Mahendra Bhatt Dehradun Dayitvdhari Meeting Panchjanya

देहरादून में बोले CM धामी- ‘दायित्वधारी सरकार और जनता के बीच सेतु’, समस्याओं के समाधान में निभाएं सक्रिय भूमिका!

VHP International Joint General Secretary Dr Surendra Jain Jodhpur Press Conference Waqf Board Scam Panchjanya

“सीमांत अतिक्रमण हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”: VHP ने की राजस्थान वक्फ बोर्ड CEO को हटाने की मांग, जानिए कारण

Ratnagiri Silent March Gen Z Samvidhan Samman Manch Maruti Mandir Ambedkar Statue

सनातन और सेना के अपमान पर भड़का आक्रोश: रत्नागिरी में Gen Z युवाओं ने निकाली विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’!

Dattatreya Hosabale RSS General Secretary NSE Mumbai Viksit Bharat Education Seminar Panchjanya

हम कोई फैक्ट्री नहीं, सभ्यता बना रहे हैं: मुंबई में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दिया विकसित भारत पर बड़ा संदेश

3 अगस्त का पंचांग

3 अगस्त का पंचांग: जानें ग्रह स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

विचार के नाम पर खाली, होठों पर बस गाली

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies