Red fort Blast: दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट की जांच में कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस घटना को आतंकी हमला माना गया और इसका सख्ती से विरोध किया गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुछ संदिग्धों ने 6 दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर में कई जगहों पर धमाके करने की योजना बनाई थी। ये तारीख खास इसलिए चुनी गई क्योंकि 1992 में इसी दिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी। आरोपी लोगों ने पूछताछ में बताया कि उनका मकसद बाबरी विध्वंस का बदला लेना था।
खुलासा चौंकाने वाला
जांच में पता चला कि जैश का ये मॉड्यूल डॉक्टरों से जुड़ा था। मूल प्लान अगस्त 2025 का था, लेकिन देरी होने पर इसे 6 दिसंबर पर शिफ्ट कर दिया गया। जैश लंबे समय से अयोध्या का जिक्र करके धमकियां देता रहा है। इसके सरगना मसूद अजहर अपने भाषणों और लेखों में बार-बार बाबरी का बदला लेने की बात करता है। पूछताछ से ये भी साफ हुआ कि ये एक बहु-चरणीय साजिश थी, जिसमें दिल्ली को लगातार ब्लास्ट्स से निशाना बनाना शामिल था।
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प्लान कैसे बने थे
ये साजिश कई स्टेप्स में बंटी हुई थी। पहले, जैश-अंसार नाम का मॉड्यूल तैयार किया गया। फिर, हरियाणा के नूह और गुरुग्राम से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के लिए कच्चा माल खरीदा गया। तीसरे चरण में, घातक रासायनिक बम बनाए गए और संभावित जगहों की रेकी की गई। उसके बाद, मॉड्यूल के सदस्यों को बम बांटे जाते। आखिरी स्टेप में, दिसंबर में दिल्ली के 6-7 लोकेशन्स पर एक साथ धमाके करने थे। सब कुछ सुनियोजित था, ताकि ज्यादा से ज्यादा असर हो।
गिरफ्तारियां और जांच की प्रक्रिया
ब्लास्ट के बाद पकड़े गए संदिग्धों ने ही ये सारी डिटेल्स उगली हैं। जांच एजेंसियों ने जैश के इस मॉड्यूल को तोड़ दिया है। कैबिनेट ने इसे राष्ट्र-विरोधी ताकतों की कायराना हरकत कहा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है।

















