देहरादून: देश की शांति के विरुद्ध बड़े षड्यंत्र की पीठिका तैयार की गई है। फेक न्यूज के जरिए युवाओं, छात्रों को भड़काने का पूरा इंतजाम कर लिया गया है। माना कि तमाम नेताओं को पीएम मोदी पसंद नहीं हैं, तो भी देश की जनता ने उन्हें अपना नेता बनाया है। उनके खिलाफ इस घटिया स्तर तक जाकर युवाओं को भड़काने का कारनामा निंदनीय है। ये बात वरिष्ठ स्तंभकार गोविंद सिंह ने प्रशांत भूषण से पूछा है।
श्री सिंह कहते हैं कि आखिर किस आधार पर प्रशांत भूषण ने इस पत्र को प्रसारित करने की हिम्मत की। क्या कोई यूनिवर्सिटी, और कोई संस्थान, प्रोफेसर प्रधानमंत्री की रैली में विद्यार्थियों को ले जाने के लिए 50 नंबर देने का लिखित सर्कुलर जारी कर सकता है? संलग्नक पत्र देखने लायक है। प्रशांत लिख रहे हैं कि मोदी की रैली में हिस्सा लेने के लिए यूनिवर्सिटी 50 नंबर देगी, मोदी-मोदी का नारा लगाने के लिए कितने? सवाल है कि एक फेक न्यूज, फर्जी समाचार, फर्जी पत्र को वायरल करने के लिए कितनी फीस प्रशांत भूषण को मिली? जॉर्ज सोरोस एंड कंपनी ने कितना भेजा?

फर्जी सूचनाएं फैला रहे प्रशांत भूषण
देश के वरिष्ठ वकील, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम वकील, सिविल अधिकारों के स्वघोषित पैरोकार श्री प्रशांत भूषण जैसे लोग ही फर्जी सूचनाएं फैला रहे हैं। हालांकि उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी ने समय रहते पुलिस में शिकायत भेज दी है कि वायरल पत्र फर्जी है। कार्रवाई की जानी चाहिए।

लेकिन यूनिवर्सिटीज, संस्थान, विद्यार्थी और प्रोफेसर सभी की गरिमा तार-तार करने में भी कोई शर्म नहीं। अभी तक प्रशांत भूषण ने पत्र अपने एक्स अकाउंट से हटाया नहीं है, तो उन्हें खुद ही बताना चाहिए कि पत्र का स्रोत क्या है, उन्हें किसने दिया, क्यों दिया, कहां से मिला?
न्यायालय में हर बात पर बाल की खाल निकालने में माहिर प्रशांत भूषण ने इतना भी देखना मंजूर नहीं किया कि चिट्टी में किसी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं और इसे वायरल कर दिया गया। आखिर क्यों? आग भड़काने का मकसद बस पूरा होना चाहिए। किसी भी तरह हो, झूठ आदि गढ़कर सभी को बहकाने की पूरी तैयारी है।
किसी साजिश में नहीं फंसने वाले उत्तराखंड के युवा
सच है कि उत्तराखंड के युवा सरल मन के हैं, लेकिन इतने भी सरल नहीं कि साजिश को समझ नहीं सकेंगे। विशेष रूप से उस समय जबकि राज्य में कई आंदोलन उठाने की नाकाम कोशिश हो चुकी है, कई की प्लानिंग हो रही है। ज़रा सी कोई बात बस हो कि बवंडर उठा दें ये लोग, लेकिन ईश्वर की कृपा से साजिश सफल होने की जगह इसमें शामिल बड़े बड़े चेहरे ही बेनकाब हो रहे हैं। कठिन समय है, सावधानी का समय है। अनेक छद्म रूप में शामिल होकर देश को अस्थिर करने के षड्यंत्र नामचीन लोगों के जरिए किए जा रहे हैं। फर्जी नामों से जाति नाम धारी अकाउंट बनाकर अंट-शंट बका जा रहा है, उल्टा-सीधा लिखा जा रहा है।
पंथ-संप्रदाय और जातियों को लेकर किया जा रहा विष वमन
पंथ-संप्रदाय, संतों, जातियों के बारे में अनाप-शनाप बोला जा रहा है। फर्जी नामों से लिखा-पढ़ा जा रहा है। कई जगह तो गांवों में श्रद्धा के स्थानों पर तोड़-फोड़ जैसी कार्रवाई भी की जाने लगी है। झूठे मामले बनाए जा रहे हैं ताकि संबंधित पक्षों को भड़काकर चिंगारी से कोई आंदोलन की लपट उठाई जाए और निर्दोष लोगों की जिंदगी नर्क में बदल दी जाए। ऐसे समय में चमकते चेहरे बिक गए हैं मानो। इसीलिए पूरी कर्ज अदायगी कर रहे हैं। विदेशी एजेंसियों के पोषक बन गए हैं। ऐसे वरिष्ठ लोग जब खुलकर झूठ और भड़काऊ सूचनाएं केवल इसलिए फैलाने में लगे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निजी बैर का हिसाब पूरा किया जाए, तो ऐसे लोगों को संकेत भेजा जाना आवश्यक है कि देश भी मौन नहीं है।
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मर्यादा हर चीज़ की होती है। सियासत के सारे दांव में पटखनी खाकर युवाओं को बरगला कर राजनीति करने का समय चला गया। लोग सब कुछ खुली आंखों से देख रहे हैं। झूठी क्रांति कहीं घटित नहीं होगी। होगा यही कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया परिपक्व होकर सारा हिसाब बराबर करेगी। उल्लेखनीय है कि गोविंद सिंह उत्तराखंड सरकार की मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष भी हैं।

















