अखिल भारतीय साहित्य परिषद के 17वें अधिवेशन के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने जल संरक्षण और पर्यावरण के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने जल संकट की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज पानी का संकट केवल भारत ही नहीं पूरी दुनिया में है। वह कहते हैं कि जल संरक्षण इसलिए आवश्यक है, क्योंकि पानी बनाया नहीं जा सकता है, उसे केवल बचाया जा सकता है।
उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर का जिक्र करते हुए कहा कि आज वह शहर पानी की भारी किल्लतों से जूझ रहा है। इसी तरह से भारत के बेंगलुरू, चेन्नई समेत कई शहरों में पानी का संकट गहराया हुआ है। मैं अपने जीवन में जिन पांच जल योद्धाओं का स्मरण हमेशा करता आया हूं वो हैं महाराज भागीरथ जो कि गंगा को धरती पर लाए, दूसरी हैं माता अनुसुइयां अपने तपोबल से मंदाकिनी लेकर आईं, तीसरे जल योद्धा हैं महाराज भोज, जिन्होंने भोपाल में दुनिया की सबसे बड़ी झील बना दी। उन्होंने 1200 साल पहले जल मंगल नाम का अद्भुत ग्रंथ भी लिखवाया, फिर रानी दुर्गावती, गोंडवाना साम्राज्य की महारानी है। इसके साथ ही माता अहिल्याबाई होल्कर आदि ने जल संरक्षण की दिशा में अद्भुत कार्य किया है।
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जल संकट पर कही बड़ी बात
इस मौके पर उमाशंकर पांडे ने कहा कि एक मिनट में हमारे देश में कम से कम 30 बच्चे जन्म लेते हैं औऱ एक व्यक्ति को ताजा 100 लीटर पानी चाहिए। ऐसे में हमें प्रति मिनट 2000 लीटर पानी चाहिए और एक घंटे में 28 लाख लीटर से अधिक पानी चाहिए। इसी प्रकार से एक वर्ष में डेढ़ अरब लीटर पानी चाहिए। सौ बात की एक बात ये है कि जनसंख्या बढ़ रही है और पानी घट रहा है। लेकिन ये अफसोस की बात है कि हमारे देश में एक जल संग्रहालय तक नहीं है।
हालात ये है कि हमारे देश में पानी को बचाने के लिए केवल चार ग्रंथ हैं, जबकि पानी को बर्बाद करने के लिए 4 लाख से अधिक किताबें हैं। ये किताबें हैं मेघदूत, जल मंगल, तीसरा वाराहमिहिर के पानी कहां पाया जाएगा, इसको लेकर 151 श्लोक हैं और चौथा नर्मदाष्टक ये केवल चार किताबें ही जल संरक्षण के लिए हैं। हालांकि, पानी को बर्बाद करने के लिए बांध, बोरवेल और भी अन्य तरीके अपनाए गए हैं। इस पर कई सारी किताबें भी हैं। लेकिन, मेघों के माध्यम से, संगीत के माध्यम से जल की वर्षा का जो पुरातन जल ज्ञान है, उस पर एक भी किताब नहीं है।
जल संकट को देश की अस्मिता से जोड़ते हुए उमाशंकर पांडे ने रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, भगत सिंह समेत अन्य क्रांतिकारियों का जिक्र किया और कहा कि आप सभी (युवाओं) को एक साथ मिलकर देश के लिए काम करना होगा। क्योंकि देश रहेगा, तो सबकुछ रहेगा। हम छोटी-छोटी चीजों के लिए नहीं लड़ें। हमें क्या मिला है, ये महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हमने इस देश के लिए क्या किया ये महत्वपूर्ण है। आज हमारा देश दुनिया में तेजी से तरक्की कर रहा है। हम चांद पर पहुंच गए। संघ के हमारे वरिष्ठ जनों ने इस देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया है।

















