'RSS के बारे में भ्रम न रखें' : बेंगलुरु में भागवत जी ने बताया संघ का उद्देश्य, कहा- 'सटीक जानकारी पर ही करें भरोसा'
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‘RSS के बारे में भ्रम न रखें’ : बेंगलुरु में भागवत जी ने बताया संघ का उद्देश्य, कहा- ‘सटीक जानकारी पर ही करें भरोसा’

डॉ. मोहन भागवत ने बेंगलुरु में संघ शताब्दी वर्ष व्याख्यानमाला में कहा कि सरसंघचालक जी ने व्याख्यान के दौरान कहा कि संघ दुनिया का एक अद्वितीय संगठन है और इसकी तुलना किसी अन्य संगठन से करना सही नहीं है।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Nov 8, 2025, 07:53 pm IST
inभारत, संघ को जानें, संघ @100, कर्नाटक

बेंगलुरु । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शनिवार को कहा कि संघ के बारे में जो चर्चाएं और धारणाएँ बनाई जाती हैं, उनमें अधिकांश गलतफहमी और अनुचित जानकारी पर आधारित होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ या उसके कार्यक्रमों का विश्लेषण करने से पहले सटीक तथ्यों और जानकारी को समझना बेहद आवश्यक है।

यह वक्तव्य उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला (8 एवं 9 नवंबर) में दिया, जिसका आयोजन बेंगलुरु के बनशंकरी स्थित पीईएस विश्वविद्यालय में किया गया। पहले दिन लगभग 1,200 प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने इसमें भाग लिया और कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् से हुई।

संघ का अद्वितीय स्वरूप और उद्देश्य

सरसंघचालक जी ने व्याख्यान के दौरान कहा कि संघ दुनिया का एक अद्वितीय संगठन है और इसकी तुलना किसी अन्य संगठन से करना सही नहीं है। अगर हम सुनाई या गलत जानकारी के आधार पर संघ का मूल्यांकन करेंगे, तो इससे केवल भ्रम पैदा होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का जन्म किसी विरोध या प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप नहीं हुआ। यह समाज की स्वाभाविक आवश्यकता को ध्यान में रखकर एक संगठित रूप में अस्तित्व में आया। उनका कहना था कि एक जीवंत और सशक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब वह संगठित हो और संगठन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए होता है।

भारत को हिंदू राष्ट्र और जिम्मेदारी की भावना

सरसंघचालक जी ने यह भी कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और हिंदू होने का अर्थ देश के प्रति जिम्मेदारी निभाना है। विविधता का सम्मान करते हुए एकता बनाए रखना भारत की खूबसूरती है, और संघ का प्रमुख कार्य समाज को एक सूत्र में बांधना तथा राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ की शाखा प्रणाली और नियमित अभ्यास व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण का माध्यम हैं।

संघ का इतिहास और स्थापना

उन्होंने संघ के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। सरसंघचालक जी ने कहा कि यह संस्था अद्वितीय है, जिसकी तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि संघ किसी प्रतिक्रिया से नहीं जन्मा। वर्ष 1857 की क्रांति के बाद यह विचार किया गया कि थोड़े लोग हम पर शासन कैसे कर रहे हैं। इसमें डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार भी शामिल थे। डॉ. हेडगेवार ने 1916-17 से इस दिशा में प्रयोग शुरू किए और 1925 में संघ के रूप में यह सामने आया। वर्ष 1939 तक कार्यकर्ताओं ने इसे एक सिद्ध मॉडल के रूप में स्वीकार किया।

विरोधियों की भूमिका और सेवा का संदेश

सरसंघचालक जी ने यह भी कहा कि संघ के विरोध में जितनी बातें कही गईं, वे केवल शब्दों तक सीमित रहीं, समाज में घूमने पर विरोधियों ने भी संगठन के उद्देश्य और सेवा को समझा और स्वीकार किया। उन्होंने विरोधियों को भी उपयोगी बताया, जैसे ‘निंदक नियरे राखिए’।

संघ का शताब्दी वर्ष और कार्यक्रम

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 02 अक्टूबर 2025 को अपने 100 वर्ष पूरे किए हैं। इस शताब्दी वर्ष में संघ देशभर में व्याख्यानमालाएं, युवा सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम और संवाद शृंखलाएं आयोजित कर रहा है, जिसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में जोड़ना और सटीक जानकारी देना है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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