गत 30 अक्तूबर की रात को महिला वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय महिला किक्रेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हरा कर फाइनल में जगह बना ली। इस ऐतिहासिक जीत से पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ी और लोग घरों से निकल कर आतिशाबजी करने लगे। भले ही दो नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रिका के बीच फाइनल मैच खेला जाएगा, लेकिन सेमीफाइनल की इस चमत्कारी जीत ने विश्व कप जीतने जैसा आनंद दे दिया।
हमारी महिला क्रिकेट टीम ने वह करिश्मा कर दिखाया है जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को थी। 339 रन के लक्ष्य को भारतीय टीम ने कप्तान हरमनप्रीत कौर की 89 रन की पारी और जेमिमा रॉड्रिग्स के शतक के दम पर प्राप्त कर लिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि भारत ने यह मैच 9 गेंद पहले और 5 विकेट से जीता।

यह बहुत बड़ी जीत है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया 8 वर्ष बाद कोई वर्ल्ड कप मैच हारा है और पहली बार किसी टीम ने वर्ल्ड कप में इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की है।
भारत की इस जीत में जेमिमा रॉड्रिग्स का सबसे बड़ा योगदान रहा। उन्होंने 127 रन की नाबाद पारी खेली। दाएं हाथ की इस बल्लेबाज ने 134 गेंद का सामना करते हुए 14 चौके लगाए। दूसरे ओवर में ही जेमिमा बल्लेबाजी करने आईं और छा गईं।
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 49.5 ओवर में 338 रन बनाकर भारत को 339 रन का लक्ष्य दिया था। 339 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। शेफाली वर्मा दूसरे ओवर में ही 10 रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गईं। इसके बाद स्मृति मंधाना ने जेमिमाह के साथ मिलकर भारत की पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन 10वें ओवर की दूसरी गेंद पर स्मृति भी 24 रन बनाकर पवेलियन वापस लौट गईं। फिर जेमिमाह ने हरमनप्रीत कौर के साथ मोर्चा संभाला।
इन दोनों खिलाड़ियों ने न केवल अपने अर्धशतक पूरे किए, बल्कि रनों की गति को भी कम नहीं होने दिया। जेमिमाह ने 56 गेंद में और हरमनप्रीत कौर ने 65 गेंद में अर्धशतक पूरा किया। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 167 रन की रिकॉर्ड साझेदारी हुई। हालांकि हरमनप्रीत शतक पूरा नहीं कर पाईं और 89 रन बनाकर पवेलियन वापस लौटीं। पर जेमिमाह अंत तक डटी रहीं और टीम को जीत दिलाकर ही पवेलियन वापस लौटीं।
भारतीय महिला टीम तीसरी बार फाइनल में पहुंची है। इससे पहले भारतीय टीम 2005 और 2017 में एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी, लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।
1978 में अपने पहले टूर्नामेंट में भाग लेने से लेकर 2025 में फाइनल तक पहुंचने तक, भारतीय महिला टीम का यह सफर संघर्ष, जुझारूपन और प्रेरणा से भरा रहा है।

















