पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव: आतंकी संगठनों का पनाहगाह बना बैठा पाकिस्तान, अफगानिस्तान पर आतंक फैलाना का आरोप लगाकर सीमा विवाद को लगातार बढ़ावा दे रहा है। लेकिन जब अफगानिस्तान ने पलटवार किया तो वह तिलमिला उठा है। अब तो अफगानों ने कुनार डैम बनाने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खावजा आसिफ ने गीदड़ भभकी दी है कि अगर इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ताएं नाकाम हो गईं, तो दोनों देशों के बीच खुली जंग छिड़ सकती है।
टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिफ ने पत्रकारों से बातचीत में ये बात कही। ये बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच बॉर्डर पर तनाव चरम पर है। हफ्तों से चली आ रही गोलीबारी और झड़पों ने दर्जनों जिंदगियां ले ली हैं।
खावजा आसिफ के बयान
आसिफ ने कहा कि हाल के दिनों में बॉर्डर पर कोई नई घटना नहीं घटी है, जो ये दिखाता है कि दोहा समझौता कुछ हद तक काम कर रहा है। आसिफ ने तालिबान को डराने की कोशिश करते हुए कहा कि कूटनीति से मुद्दे नहीं सुलझे तो ये शांति ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने दशकों से अफगानिस्तान का साथ दिया है। लाखों अफगान शरणार्थियों को शरण दी, मुश्किल वक्त में खड़े रहे। लेकिन अब पाकिस्तान का सब्र जवाब दे रहा है, क्योंकि अफगान सरजमीं से होने वाले कथित मिलिटेंट हमलों ने इस्लामाबाद को तंग कर दिया है। अफगान अधिकारियों ने अभी आसिफ की धमकियों पर बयान जारी करना तक जरूरी नहीं समझा।
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बॉर्डर तनाव का बैकग्राउंड
पाकिस्तान तहरीक एक तालिबान पर उसके देश में हिंसा और आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाकर अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। जबकि, तालिबान सरकार का कहना है कि टीटीपी से उसका कोई लेना देना नहीं है। खास बात ये भी कि पाकिस्तान ने ये हमले तब शुरू किए जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से बगराम एयरबेस सौंपने की बात कही है। दोनों देशों के बीच ये तनाव हफ्तों से चल रहा है। इस्तांबुल में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल दूसरी दौर की बातचीत कर रहे हैं, जो दोहा समझौते को मजबूत करने पर केंद्रित है।
इस वार्ता के मुख्य मुद्दे हैं: बॉर्डर पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाना, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान, पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं का समाधान, और व्यापार बाधाओं को हटाना। साथ ही, अफगान शरणार्थियों की जबरन डिपोर्टेशन रोकना और इस मुद्दे को राजनीतिक न बनाना। पाकिस्तान ने हाल ही में बलूचिस्तान के कई कैंप्स तोड़ दिए, जैसे लोरालाई, गर्दी जंगल, सरानान, झोब, काला-ए-सैफुल्लाह, पिशीन और मुस्लिम बाग। हजारों अफगान बेघर हो गए। रहिवासियों का कहना है कि उन्हें अचानक बाहर निकाल दिया गया, सामान भी इकट्ठा करने का मौका न मिला। ये कदम शरणार्थी समस्या को और जटिल बना रहे हैं।















