अरुणाचल में बढ़ रही कन्वर्जन दर : IFCSAP ने की 1978 धर्म स्वतंत्रता कानून लागू करने की मांग
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अरुणाचल में बढ़ रही कन्वर्जन दर : IFCSAP ने की 1978 धर्म स्वतंत्रता कानून लागू करने की मांग

इंडिजिनस फेथ एंड कल्चरल सोसाइटी ऑफ अरुणाचल प्रदेश ने चेतावनी दी कि 18 नवंबर तक कदम न उठाए गए तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Oct 24, 2025, 06:36 pm IST
inभारत, अरूणाचल प्रदेश

ईटानगर । इंडिजिनस फेथ एंड कल्चरल सोसाइटी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (IFCSAP) ने मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू से अरुणाचल प्रदेश स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 (Arunachal Pradesh Freedom of Religion Act, 1978) को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अधिनियम लागू नहीं हुआ

संस्था के अध्यक्ष डॉ. एमी रूमी ने जारी बयान में कहा कि दिसंबर 2024 में IFCSAP के रजत जयंती समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा अधिनियम को लागू करने की घोषणा की गई थी, परंतु दस माह बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने भी दिए थे अधिनियम लागू करने के निर्देश

उन्होंने कहा कि इस देरी के कारण सनातन समाज में गहरा असंतोष व्याप्त है। सरकार की निष्क्रियता को देखते हुए एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई थी, जिस पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय की ईटानगर पीठ ने मार्च 2025 में राज्य सरकार को अधिनियम के नियम बनाकर तत्काल लागू करने के निर्देश दिए थे।

ईटानगर में हजारों श्रद्धालुओं ने निकाली धर्म यात्रा

IFCSAP ने बताया कि 18 अक्टूबर 2025 को हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों ने “धर्म यात्रा” निकाली, जो ईटानगर के न्योकुम लापांग मैदान में एक विशाल जनसभा के रूप में समाप्त हुई। सभा में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि राज्य सरकार 18 नवंबर 2025 तक अधिनियम को लागू नहीं करती है, तो संगठन राज्य और दिल्ली में चरणबद्ध आंदोलन आरंभ करेगा।

धर्म और संस्कृति के संबंध पर डॉ. रूमी का बयान

डॉ. रूमी ने कहा — “धर्म और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं। जब धर्म बदलता है, तो संस्कृति और मातृभूमि के प्रति निष्ठा भी बदल जाती है। विदेशी धर्मों के प्रसार से अरुणाचल की सामाजिक संरचना और राष्ट्रीय एकता दोनों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।”

धर्मांतरण दर में तेज वृद्धि पर जताई चिंता

उन्होंने बताया कि 1978 में जहाँ धर्मांतरण की दर केवल 1% थी, वहीं अब यह 35% से अधिक हो चुकी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में यह दर 90% तक पहुँच गई है, जहाँ विद्रोह और हिंसक गतिविधियाँ सामान्य हो गई हैं।

सीमावर्ती इलाकों की रणनीतिक संवेदनशीलता पर बल

संस्था ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सीमाएँ चीन से सटी होने के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अति संवेदनशील है। तवांग जैसे ऐतिहासिक मठों और स्वदेशी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सांस्कृतिक संतुलन पर निर्भर करती है।

मुख्यमंत्री से शीघ्र अधिसूचना जारी करने का आग्रह

IFCSAP ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे अपने वचन के अनुरूप APFRA, 1978 को स्पष्ट नियमों सहित राजपत्र में अधिसूचित करें, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम या गलत व्याख्या की गुंजाइश न रहे।

राजस्थान के धर्मांतरण-विरोधी कानून का उदाहरण भी भेजा गया

संस्था ने इस पत्र के साथ राजस्थान के धर्मांतरण-विरोधी कानून की प्रति भी संदर्भ हेतु संलग्न की है और राज्य सरकार से शीघ्र निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है।

Topics: Arunachal Religion ActNorth East India Newsअरुणाचल प्रदेशधर्मांतरण कानूनईटानगरपेमा खांडूIFCSAPIndigenous Faith
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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