अमेरिका में ईसाइयत ढलान पर, कुछ ही वर्षों में इस्लाम होगा प्रभावी? : विशेषज्ञों के आंकड़ों पर छिड़ी बहस
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अमेरिका में ईसाइयत ढलान पर, कुछ ही वर्षों में इस्लाम होगा प्रभावी? : विशेषज्ञों के आंकड़ों पर छिड़ी बहस

अमेरिका में इस्लाम का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती मस्जिदें, युवा मुस्लिम आबादी और चर्चों की घटती भूमिका अब अमेरिकी परिदृश्य को बदल रही है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Oct 24, 2025, 06:05 pm IST
inविश्व, विश्लेषण

क्या अमेरिका में भी इस्लाम प्रभावी मजहब के रूप में उभर रहा है और शीघ्र ही वह वहाँ पर भी वह नीतियों आदि को प्रभावित करने लगेगा? डेली मेल ने फरवरी में जारी किये गए प्यू रीसर्च सेंटर के आंकड़ों के हवाले से यह दावा किया है कि अमेरिका के मूल्यों को परिभाषित करने वाला ईसाई रिलीजन वर्ष 2070 तक बहुमत खो देगा। इन आंकड़ों के अनुसार अभी 62 प्रतिशत अमेरिका यह कहते हैं कि वे ईसाई हैं, जबकि वर्ष 1970 में यह 90% था। और यदि यही रुझान जारी रहते हैं तो वर्ष 2070 में यह आँकड़े 46% तक जा सकता है।

हालांकि यह रिपोर्ट फरवरी में प्रकाशित हुई थी, परंतु इसे लेकर अब कुछ रिलीजियस लीडर्स और जनसांख्यकीय विशेषज्ञ चिंता व्यक्त कर रहे हैं, और आंकड़ों के हवाले से शीघ्र ही कदम उठाने की बात कर रहे हैं, इसलिए यह चर्चा में दोबारा आ गई है।

Hometown Hope Ministries के पादरी और संस्थापक मदारिस ने मिनिस्ट्री के ब्लॉग पर अमेरिका में बढ़ती मस्जिदों की संख्या के विषय में चिंता व्यक्त की है। इस ब्लॉग का शीर्षक है Awakening Our Senses: Mosque Growth in America and the Urgent Call for Church Renewal और आगे लिखा है कि अमेरिका की नींदे उड़ रही हैं, मीनारें बढ़ रही हैं, क्या चर्च जागेगा?

इसमें प्यू के आंकड़ों का उल्लेख है। इस ब्लॉग में अमेरिका में मस्जिदों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई है। इसमें लिखा है कि चर्च को इसलिए भी इस मुद्दे पर जागना चाहिए क्योंकि अमेरिका में मस्जिदों की वृद्धि केवल जनसांख्यकीय परिवर्तन ही नहीं दिखाती है, बल्कि वह एक मजहबी परिवर्तन भी दिखाती है। यह बताती है कि लोग अपने होने का एहसास चाहते हैं। कई अमेरिकी मुस्लिमों के लिए मस्जिद के आसपास ही समुदाय का एहसास रह गया है और जो पहले एक छोटी मस्जिद होती है जो देखते ही देखते इस्लामिक उसूलों और गतिविधियों के बहुत ही बढ़िया संस्थान में बदल जाती है और ऐसे विस्तार वर्ष 2000 से बहुत ही तेजी से हुए हैं और इतनी ही तेजी से अमेरिकी समाज में इस्लाम का प्रभाव भी बढ़ा है।

फिर इस ब्लॉग में यूएस मॉस्क सर्वे का हवाला दिया हुआ है। इसमें लिखा है कि “2000 में 1,209 मस्जिदें थीं, जो 2010 तक बढ़कर 2,106 हो गईं—74% की वृद्धि हुई—और 2020 तक 2,769 तक पहुँच गईं (2)। 2025 तक तेज़ी से आगे बढ़ते हुए, यह अनुमान लगभग 2,770 से 2,800 के बीच स्थिर हैं, जो अब लगभग 40 लाख मुस्लिम आबादी के बीच मामूली लेकिन निरंतर वृद्धि को दर्शाता है (3)। हालांकि यह बहुत बड़ा परिवर्तन नहीं है, परंतु यह बहुत उद्देश्यपूर्ण है: वर्ष 2000 के बाद से इनमें से 66% मस्जिदें अक्सर बढ़ते शहरी परिवारों के लिए या तो स्थानांतरित हो गई हैं या स्थापित की गई हैं। मगर इनमें से कोई भी बंद नहीं हुई है।“

डेली मेल से बात करते हुए मदारिस ने कहा कि ये आँकड़े चेतावनी है कि चर्च अब चेत जाएं। और उन्होनें यह भी कहा कि ईसाई समुदायों ने अपनी आँखें बंद कर रखी हैं, जबकि उनका प्रतिद्वंदी समुदाय दिनों दिन आगे बढ़ रहा है।

डेली मेल के अनुसार अमेरिका में मुस्लिमों की संख्या अपेक्षाकृत युवा लोगों के आने से और अधिक प्रजनन दर के कारण बढ़ रही है। इस्लाम में ईसाइयों की तुलना में अधिक युवा हैं और प्यू रिसर्च के अनुसार ये युवा ही मजहब की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। जबकि मतांतरण भी लगातार हो रहे हैं। जिनमें जेल में कैदियों का मतांतरण सबसे अधिक है।

फरवरी में ही यह समाचार सामने आया था कि हजारों की संख्या में जेल में कैद अमेरिकी इस्लाम में मतांतरित हो रहे हैं।

इसके साथ ही डेली मेल से बात करते हुए एरिज़ोना क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में सांस्कृतिक अनुसंधान केंद्र के अनुसंधान निदेशक और सह-संस्थापक डॉ. जॉर्ज बार्ना, ने कहा कि अमेरिका में धार्मिक स्थिरता बहुत ही कमजोर हो चुकी है। और ईसाई रिलीजन की संख्या का लगातार कम होना न ही हैरानी वाला है और जब तक बहुत ही नाटकीय परिवर्तन न हों, तब तक इसमें कुछ भी परिवर्तन होने वाला नहीं है।

उन्होनें यह कहा कि चर्च और परिवारों ने आज ईसाइयत को लेकर अपने मापदंड कुछ ढीले कर दिए हैं और अभिभावक भी अपने बच्चों को पहले के अभिभावकों की तरह चर्च के अनुसार पालपोस नहीं रहे हैं। हालांकि लोग अब ईसाई मूल्यों की तरफ लौट रहे हैं परंतु विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी रफ्तार बहुत धीमी है और राष्ट्रीय रुझानों को देखा जाए तो ईसाइयत ढलान पर है।

Yet another grooming gang profile has been released.

The suspects were almost two-thirds Pakistani. pic.twitter.com/XpARhOtXaK

— Crémieux (@cremieuxrecueil) June 16, 2025


बार्न का कहना है कि यदि बहुत तेजी से नाटकीय परिवर्तन नहीं किये जाते हैं तो अमेरिकी चर्च पृष्ठभूमि में लुप्त होते रहेंगे। डेली मेल से बात करते हुए मदारिस ने कहा कि हमें खोई जमीन पर फिर से दावा करना है।

अपने ब्लॉग में खाली होते चर्च पर भी मदारिस ने अपना क्षोभ व्यक्त किया है और ईसाइयों से और चर्च से शीघ्र ही कदम उठाने की अपील की है।

Topics: अमेरिकी समाजधार्मिक संतुलनWorld Religion Trendsइस्लामचर्चअमेरिकाधर्म परिवर्तनईसाई धर्ममस्जिदेंPew Research
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