ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स को लेकर एक बार फिर हंगामा मचा हुआ है, क्योंकि वहाँ पर इन मामलों की जांच चल रही है और जांच में कई जांच अधिकारी ऐसे भी हैं, जिनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि जिन्होनें श्वेत ब्रिटिश लड़कियों के साथ ऐसा जघन्य अपराध किया है, उनकी राष्ट्रीयता और मजहब पर बात न हो। एक बार फिर से वहाँ की मीडिया और नेताओं का बड़ा वर्ग अपराधियों को “एशियाई ग्रूमिंग गैंग” कहकर पाकिस्तानी मुस्लिमों के अपराध को एक वृहद क्षेत्र के नागरिकों पर थोपने का षड्यन्त्र कर रहा है।
यह एक प्रकार की पोलिटिकल करेक्टनेस है, जो अपराध को ही उलझाने के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराधियों को भी लगभग क्लीन चिट देने वाली है। वह उस मानसिकता को प्रश्रय देती है, जो मानसिकता लड़कियों को केवल उपभोग की वस्तु समझती है।
टेलीग्राफ में हरदीप सिंह ने भी 23 अक्टूबर 2023 को यही लिखा कि ग्रूमिंग गैंग्स के बलात्कारी मुख्यतया पाकिस्तानी मुस्लिम हैं, एशियाई नहीं। उन्होनें तमाम आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि रोथेरहम की वर्ष 2014 की रिपोर्ट यह कहती है कि शहर में 1400 बच्चों के साथ 1997 से यौन शोषण हो रहा था और इनके साथ यह अपराध करने वाले अधिकतर पाकिस्तानी मूल के थे।
इसमें लिखा है कि जो राष्ट्रीय जांच हो रही है, उसमें से पीड़िताओं ने अपने नाम वापस ले लिए हैं और इसके साथ ही यह जांच अपराधियों की गलत पहचान भी बता रही है। हरदीप सिंह ने लिखा कि वे “एशियाई” शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। हरदीप सिंह ने लिखा कि एडिटर्स कोडबुक ने भी जब ब्रिटिश सिखों और हिंदुओं की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों के बाद इस पूरे मामले को लेकर सावधानीपूर्ण रिपोर्टिंग की सलाह दी है, फिर भी जानबूझकर पाकिस्तानी गैंग्स के स्थान पर एशियाई शब्द का प्रयोग किया जा रहा है।
इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि सिख संगठनों के नेटवर्क के भी प्रयास इस संदर्भ में उल्लेखनीय हैं। एशियाई शब्द से अपराधियों की पहचान ही नहीं छिपती है, बल्कि साथ ही इन अपराधों के पीछे जो नस्लीय और मजहबी कारण होते हैं, वे भी छिप जाते हैं।
दरअसल कई सिख लड़कियां भी इस प्रकार के षड्यन्त्र का शिकार हुई हैं। हालांकि उनका प्रतिशब्द काफी कम रहा है। पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स की अधिकांश पीडिताऐं श्वेत ब्रिटिश लड़कियां रही हैं, जिन्हें अधिकतर “गोरी तवायफ़” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था। कई पीड़िताओं ने यह तक कहा था कि उनसे यह भी कहा गया कि गोरी लड़कियां इसी लायक होती हैं।
उन पर नस्लीय भद्दी-भद्दी टिप्पणियाँ की गईं और उनके साथ अत्याचारों की हर सीमा पार की गई। परंतु जांच करने वाले अधिकारियों में से एक सलाहकार सबह कैसर ने कहा कि इन अपराधों के लिए “ब्राउन मेन” को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। कैसर की इस टिप्पणी ने पीड़िताओं को क्षोभ से भर दिया और ब्रैडफॉर्ड में ग्रूमिंग गैंग्स की शिकार फियोना गॉडर्ड ने जांच की विक्टिम लैज़ान पैनल से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि ऐसी टिप्पणियों से पीड़िताओं को कोई सहायता नहीं मिलेगी।
फियोना ने एक खुले पत्र में लिखा कि “मुझे यह जानकर बहुत दुःख हुआ कि जांच में वरिष्ठ पद पर काम करने वाले किसी व्यक्ति ने ग्रूमिंग गैंग्स पर सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए थे, जो केसी रिपोर्ट और बचे लोगों के अनुभवों के निष्कर्षों के सीधे विरोधाभासी हैं।”
इसे लेकर टॉमी रॉबिनसन ने भी लिखा कि “मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग, न कि एशियाई!”
Muslim grooming gang not Asian https://t.co/cClhvAPSJy
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) October 21, 2025
हालांकि ऐसा नहीं है कि पहली बार पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स के लिए एशियाई पुरुषों का शब्द प्रयोग किया गया हो। इससे पहले भी लगातार ऐसा प्रयास किया जा रहा है। जनवरी में ही The Salisbury Review के Assistant editor, colin Brazier ने एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होनें एशियाई शब्द पर आपत्ति व्यक्त की थी। उन्होनें एक्स पर पोस्ट लिखा था कि “उप-संपादकों को ग्रूमिंग गिरोहों की नस्लीय पहचान बताने के लिए “एशियाई” शब्द का इस्तेमाल करके संक्षिप्त शीर्षक लिखना आसान लग सकता है। लेकिन यह अक्षम्य है और पूरी तरह से गलत है। ये अपराधी लगभग पूरी तरह से पाकिस्तानी मूल के हैं, और अक्सर कश्मीर के मीरपुर से हैं।“
एक यूजर ने लिखा था कि वे सिख, हिंदू या बौद्ध गिरोह नहीं थे… वे चीनी, जापानी या फिलिपिनो गिरोह नहीं थे… हमें उन्हें “एशियाई ग्रूमिंग गिरोह” कहना बंद करना होगा।
एशियाई देशों में काम करने वाली एक कंपनी के मालिक टोनी मीडोज ने एक्स पर लिखा कि नेता और मीडिया वाले लोग इन्हें एशियाई पीडोफाइल ग्रूमिंग गैंग क्यों कह रहे हैं? एशिया एक विशाल महाद्वीप है और मुझे नहीं लगता कि बलात्कार करने वालों गिरोह में कोई जापानी, सिंगापुरी, या मंगोलियन या फिर मलेशिया का नागरिक था। एक यूजर ने इसका डेटा भी साझा किया:
Yet another grooming gang profile has been released.
The suspects were almost two-thirds Pakistani. pic.twitter.com/XpARhOtXaK
— Crémieux (@cremieuxrecueil) June 16, 2025
इस जांच में से कई पीड़िताओं ने नाम वापस लिया है। एक बलात्कार पीड़िता, जिसने अपना नाम इस जांच से वापस लिया, उसने एक चैनल को बताया कि उससे कहा गया कि वह अपराधियों की राष्ट्रीयता या मजहब के विषय में बात न करें, नहीं तो उसे “नस्लवादी” कहा जाएगा। और यह भी कहा कि पैनल में हर कोई पक्षपाती था।
लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर इस जांच का उद्देश्य क्या था? और आखिर लेबर पार्टी अपराधियों का पक्ष क्यों ले रही है?

















