ईरान में इन दिनों जेल में बंद कैदी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और यह इतना तीव्र है कि वहाँ पर उन विरोध प्रदर्शन कर रहे कैदियों के घरवालों को भी उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है। मगर यह भी प्रश्न उठता है कि, कैदी किस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं? आखिर क्या है ऐसा, जिसके कारण कैदी इस सीमा तक विद्रोही हो गए है, क्योंकि यदि वे जेल में है तो किसी न किसी अपराध के कारण ही होंगे और उसी की सजा काट रहे होंगे?
ईरान में तेजी से मौत की सजा और विरोध प्रदर्शन
हालांकि ईरान में स्थिति कुछ अलग है और वे भी लोग जेल में हैं, जो ईरान सरकार के महिला विरोधी कानून अर्थात अनिवार्य हिजाब के विरोध में सजा काट रहे हैं और उन्हें भी फांसी जैसी सजाएं दी जा रही हैं। यदि मृत्यु दंड नहीं भी दिया जा रहा है, तो भी इतनी कठोर सजाएं दी जा रही हैं कि लोग सहम रहे हैं। और जब वे इस अमानवीयता का विरोध कर रहे हैं, तो उनके परिजनों को भी उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है। दरअसल ईरान में, जिस प्रकार से और जिस तेज गति से मौत की सजा सुनाई जा रही है, उसे लेकर वहाँ के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों, आम लोगों और कैदियों के बीच गुस्सा है। एवीन में कैद राजनीतिक बंदियों ने डिटेन्शन सेंटर के बाहर हाल ही के दिनों में बढ़ रही मौत की सजा के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया था।
ईरान में कैदियों ने मौत की सजा और शोषण के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की
ईरान में इस वर्ष के आरंभ होने के बाद से 1000 से अधिक कैदियों को मौत की सजा दी जा चुकी है। ऑफिस ऑफ द हाई कमिश्नर फॉर हयूमेन राइट्स के अनुसार ईरान बहुत ही तेजी से मौत की सजा का क्रियान्वयन कर रहा है। फॉक्स न्यूज के अनुसार इस रिपोर्ट के समय में हर दिन नौ से अधिक मौत की सजाएं दी जा रही हैं, और जिन्हें यह सजाएं दी जा रही हैं, उनमें से अधिकांश को हत्या या फिर ड्रग्स से जुड़े अपराधों को लेकर दोषी ठहराया गया था। इस स्थिति के विषय में पूरे विश्व को जागरूक करने के लिए 13 अक्टूबर को गेजेल हेसार जेल के वार्ड संख्या 2 में मौत की सजा पाए लगभग 1500 ईरानी कैदियों ने भूख हड़ताल की। और इनमें से ईरान के विद्रोही संगठन मोजाहिदीन ए खल्क के भी 17 सदस्य थे।
फॉक्स न्यूज से बात करते हुए नेशनल कौंसिल ऑफ रेसिस्टेंस ऑफ ईरान के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान ने 27 जुलाई को इस संगठन के 2 सदस्यों फांसी दे दी थी और अभी तक उनके शरीर को उनके परिजनों को सौंपा नहीं है।
यही भूख हड़ताल एवीन जेल तक फैल गई थी। हालांकि ईरान के अधिकारी यह मनने के लिए तैयार नहीं थे कि ऐसा भी कुछ हुआ है। उन्होनें इस तरह की किसी भी हड़ताल से इनकार किया और कहा कि भूख हड़ताल के दावे गलत हैं। तो वहीं कैदियों का कहना है कि उनकी हड़ताल जबरन तुड़वाने का प्रयास अधिकारियों ने किया।
फॉक्स न्यूज डिजिटल को दिए गए एक विशेष बयान में हड़ताल कर रहे कैदियों ने कहा कि उनका सब्र अब इस अंतहीन शोषण और कैदियों और युवा लोगों की जान लेने के कारण जबाव दे चुका है और हर दिन और हर हफ्ते हमारे कुछ साथी मौत के घाट उतार दिए जाते हैं और हममें से कुछ मौत के साये में रहते हैं। यह हमारी और हमारे परिजनों की ज़िंदगियों के सबसे दुखद लम्हे हैं और हम ईरान में मौत की सजा पर पाबंदी की मांग करते हैं। iranwire के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने तीन कैदियों से उनके परिजनों से मिलने से रोक दिया।
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, वकील ताहिर नघावी, 80 वर्षीय कार्यकर्ता अबोलफजल घादयानी और प्रमुख सुधारवादी मुस्तफा ताजजादेह को जेल अनुशासन समिति ने तीन मुलाकात सत्रों से प्रतिबंधित कर दिया। दो और राजनीतिक कैदियों, रेज़ा खानदान और शहरियार बरती को भी आने वाले लोगों से नहीं मिलने दिया गया है। 80 वर्षीय कार्यकर्ता अबोलफजल घादयानी को सर्वोच्च नेता का अपमान करने और व्यवस्था के प्रति विद्रोह करने को लेकर जेल में डाला हुआ है और उन्हें 30 सितंबर 2024 को हिरासत में लिया गया था। घादयानी को साढ़े तीन साल की सजा मिली है। सुधारवादी मुस्तफा ताजजादेह को भी देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने, और व्यवस्था के खिलाफ झूठ और प्रोपोगैंडा फैलाने का दोषी माना आज्ञा है। वर्ष 2022 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उन्हें उस समय 8 साल की सजा हुई थी और दिसंबर 2923 में उन्हें अतिरिक्त 6 साल की भी सजा सुनाई गई थी। ईरान में जिस गति से मृत्यु की सजा पाए लोगों की संख्या बढ़ रही है, उसे लेकर अमेरिका भी कूद पड़ा है और इनकी निंदा की है।

















