अमेरिका और ईरान में कथित शांति डील हो गई है और कथित रूप से ही पूरे विश्व ने चैन की सांस ली है और उसके साथ ही भारत की फेमनिस्ट महिलाएं एक बार फिर से ईरान की प्रशंसक बन गई हैं। पाकिस्तान और ईरान में महिलाओं के साथ कुछ भी होता रहे, उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है। शांति की खुमारी में लोग अभी डूबे हुए हैं और ईरान ने अपना महिला विरोधी अभियान फिर से आरंभ कर दिया है। हालांकि वह बंद तो कभी नहीं था, परंतु अब और भी तेज होगा, ऐसा लोगों का विश्वास है। ईरान की निर्दयी नीतियों का शिकार बनी है अब गायिका परस्तू अहमदी (Parastoo Ahmadi)।
कौन हैं परस्तू अहमदी?
वैसे तो ईरान की सरकार किसी भी महिला को हिजाब सही से न पहनने पर सजा देती है, और उस पर सरकार की आँखों में आँखें डालकर चुनौती देने वाली महिला हो तो कहने ही क्या? बात है दिसंबर 2024 की! ईरान की सरकार की अनिवार्य हिजाब की क्रूर नीति का विरोध करने के लिए तब भी हजारों लोग अपनी आवाज उठा रहे थे। और उसी दौरान विरोध का बहुत ही अलग तरीका सोचा गायिका परस्तू अहमदी ने! वैसे तो संगीत को ही इस्लाम में हराम माना गया ह, और उस पर सरकार विरोधी संगीत? तो फिर तो कोड़े क्यों न बरसाए जाएंगे?
दिसंबर 2024 में 29 साल की परस्तू ने एक खाली ऑडिटोरियम में देशभक्ति गीत ‘अज़ खूने जवानाने वतन’ (वतन के नौजवानों के खून से) को बिना हिजाब के एक लाइवस्ट्रीम परफ़ॉर्मेंस में गाया, जो वायरल हो गया। परस्तू को तुरंत ही कई संगीतकारों के साथ हिरासत में ले लिया गया था। बाद में अधिकारियों ने उस वीडियो के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसे अभी तक यूट्यूब पर करोड़ों लोगों ने देख लिया है। अब जब हर तरफ का प्रगतिशील वर्ग और विशेषकर फेमिनिस्ट वर्ग ईरान की वाहवाही करते हुए मरा जा रहा है, उसी समय ईरान में एक महिला को केवल इसलिए “कोड़े” मारने की सजा सुनाई जा रही है क्योंकि उसने देशभक्ति का गाना गाया था, और वह भी बिना हिजाब के और उसकी ड्रेस में कंधे पर कुछ नहीं था। अर्थात ऑफशोल्डर ड्रेस थी।
‘द गार्जियन’ के अनुसार हालांकि अभी आधिकारिक रूप से न्यायिक न्यूज एजेंसी ने इस फैसले को प्रकाशित नहीं किया है, परंतु ईरान में अधिकार समूह और वकील जिन्होनें कागजातों की समीक्षा की है, उन्होंने कहा कि सरकार का खुलकर विरोध करने वाले कलाकारों की गिरफ़्तारी और उन पर कानूनी मामले दर्ज करने का सिलसिला, सांस्कृतिक असहमति को रोकने की एक व्यापक कोशिश को दर्शाता है। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार कॉम प्रांत की अपराधी अदालत ने ईरानी गायिका परस्तू अहमदी, संगीतकार एहसान बेइराकदार और सोहेल फ़क़ीह नसीरी, तथा ‘कारवांसेराय कॉन्सर्ट’ की प्रोडक्शन टीम के छह सदस्यों को 74 कोड़े मारने की सज़ा सुनाई है। इतना ही नहीं, इन सभी पर 2 साल के लिए देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है और साथ ही वे दो साल तक कहीं भी गा नहीं सकेंगे! अदालत ने फ़ैसला सुनाया कि उन्होंने “साइबरस्पेस प्लेटफ़ॉर्म पर अश्लील और अनैतिक कंटेंट बनाकर और प्रकाशित करके सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन किया है।” बीबीसी पर्शियन की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उन पर इस्लामिक दंड संहिता की धारा 638 और कंप्यूटर अपराध कानून की धारा 743 के अंतर्गत मुकदमा चलाया था।
सोशल मीडिया पर विरोध
परस्तू को मिली इस सजा को लेकर हर ओर विरोध हो रहा है। ईरान में अमेरिका आधारित सेंटर फॉर हयूमेन राइट्स में डायरेक्टर ऑफ ऐड्वकसी बहर ग़नदहरी (Ghandehari) ने इस सजा को लेकर कहा कि “सिर्फ़ गाना गाने और बिना हिजाब के दिखने के लिए अहमदी को 74 कोड़े मारने की सज़ा इस बात की एक और याद दिलाती है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है, भले ही ईरानी अधिकारियों ने अपनी छवि सुधारने के लिए युद्ध के समय जैसा प्रोपेगैंडा अभियान चलाया हो।”
ईरान की विस्थापित कार्यकर्ता मसीह अलिनेजाद ने लिखा कि अमेरिका के साथ ईरान ने शांति डील होते ही परस्तू को 74 कोड़ों की सजा सुना दी। वे लोग अमेरिका को शैतान कहते हैं, और उसी शैतान के साथ डील करने के लिए दूसरे देश जाते हैं और दूसरी ओर एक लड़की की आवाज उन्हें एक सुपरपावर से भी ज्यादा डराती है। उन्होंने लिखा कि जो सरकार महिलाओं को बाल दिखाने और गाना गाने पर कोड़े मारती है, वह कोई सामान्य सरकार नहीं है। इसे महिलाओं के ख़िलाफ़ रंगभेद कहा जाता है।
ईरान विश्लेषक नविद मोहेबीबी ने लिखा कि ईरान में नए शासन, जिसे लेकर ट्रम्प ने कहा था कि यह अपने पूर्ववर्ती से बहुत बेहतर है, उसने एक गायिका और आठ संगीतकारों को 74 कोड़े, दो साल का ट्रैवल बैन और दो साल तक कला से जुड़ी गतिविधियों पर रोक की सजा सुनाई है और उनका अपराध क्या है? एक निजी परफॉर्मेंस रिकॉर्ड करने की हिम्मत करना। ईरान में महिलाओं के गाने पर पाबंदी है। देखना होगा कि ईरान की बुर्का पहने हुए महिलाओं की हिम्मत की तारीफ करने वाली भारत की फेमिनिस्ट महिलाएं परस्तू के लिए आवाज उठाती हैं या नहीं?

















