अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 26 अक्टूबर को मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मलेशियाई सरकार ने उन्हें खास तौर पर आमंत्रित किया है। इस सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेता शामिल होंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात होने की संभावना भी जताई जा रही है। यह मुलाकात उनके बीच टैरिफ विवाद के बाद पहली बार होगी।
हालांकि ट्रंप के दौरे का मलेशियाई नागरिक समाज ने विरोध भी शुरू कर दिया है। 20 से अधिक नागरिक संगठन 26 अक्टूबर को क्वालालंपुर के अम्पांग पार्क में एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगा और इसे “ट्रम्प, आपका मलेशिया में स्वागत नहीं है” नाम दिया गया है। प्रदर्शन का मुख्य कारण ट्रंप की फिलिस्तीन और मध्य पूर्व नीतियों के खिलाफ असंतोष है। प्रदर्शनकारी गाजा पट्टी में इजरायल के खिलाफ ट्रंप के समर्थन से नाराज हैं। अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में हुए संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और लाखों घायल हुए। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन और नरसंहार बताया है।
विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाने के लिए आयोजकों ने एक “टूलकिट” तैयार किया है। इसमें कानूनी जानकारी दी गई है कि अगर किसी प्रदर्शनकारी से पूछताछ होती है, गिरफ्तारी होती है या पुलिस बयान मांगती है, तो उन्हें क्या करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों को शांत रहने और कानूनी मदद लेने की सलाह दी गई है। इस रैली में मलेशियाई मुस्लिम संगठन जैसे मूदा, पेजुआंग, अंगकाटन बेलिया इस्लाम और मैपिम शामिल हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ ट्रंप के दौरे का विरोध करना नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व और गाजा में इजरायल के खिलाफ उनकी नीतियों के प्रति संदेश देना भी है।

















