नरसी इंटीरियर इन्फ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड एक स्वदेशी सोच और पारंपरिक भारतीय शिल्पकला से जन्मी वह कंपनी है, जिसने ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को न सिर्फ अपनाया, बल्कि उसे आधुनिक इंटीरियर डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई दी। आज 900 करोड़ रु. का सालाना कारोबार कर रही इस कंपनी की नींव नरसी राम कुलरिया ने रखी, जिन्होंने राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा गांव से मुंबई पहुंचकर अपने पारंपरिक काष्ठ कला के कौशल को एक संगठित, पेशेवर और औद्योगिक रूप में ढालने का सपना देखा। एक छोटी से वर्कशॉप से शुरू होकर यह कंपनी आज भारत की सबसे भरोसेमंद और प्रतिष्ठित इंटीरियर फिट-आउट कंपनियों में गिनी जाती है। नरसी इंटीरियर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारतीय हस्तशिल्प की आत्मा को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक और औद्योगिक क्षमता के साथ काम करती है।
नरसी इंटीरियर की नए संसद भवन, भारत मंडपम कन्वेंशन सेंटर, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और कर्तव्य भवन जैसे राष्ट्रीय गौरव के प्रोजेक्ट्स में भागीदारी रही है। कंपनी का हर प्रोजेक्ट भारतीयता, गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रतीक है।
कंपनी के निदेशक नरसी राम कुलरिया बताते हैं, “शुरुआती दौर में हमारे सामने पारंपरिक कौशल के साथ खुद को स्थापित करना, कुशल श्रमिकों की कमी और आधुनिक उपकरणों की अनुपलब्धता जैसी चुनौतियां रहीं, लेकिन हमने हार नहीं मानी। अपने कारीगरों को प्रशिक्षित किया, आधुनिक मशीनरी का उपयोग शुरू किया और गुणवत्ता व समयबद्धता को अपना मूल मंत्र बनाया। इसी समर्पण ने आज नरसी इंटीरियर को 5,000 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी बनाया है।”
कुलरिया कहते हैं- हमारी कार्य संस्कृति अनुशासन, उत्कृष्टता और निरंतर सीखने पर आधारित है। डिजाइन, निर्माण और प्रबंधन टीमों के बीच तालमेल इसकी सबसे बड़ी ताकत है। साथ ही, यह कंपनी अपने कारीगरों के कौशल विकास में निरंतर निवेश करती है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को और बल मिलता है। कंपनी पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को अपनी कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानती है। कंपनी डस्ट रिकवरी सिस्टम, जल-आधारित कोटिंग्स और अपशिष्ट न्यूनीकरण जैसी टिकाऊ तकनीकों को अपनाकर निर्माण प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बनाती है, जिससे नवाचार और प्रकृति दोनों का संतुलन बना रहता है।”

















