अशफाक उल्ला खान जयंती विशेष : भारत को क्रन्तिवीर अशफाक चाहिए, जिन्ना, इकबाल और सुहरावर्दी जैसे नहीं
July 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

अशफाक उल्ला खान जयंती विशेष : भारत को क्रन्तिवीर अशफाक चाहिए, जिन्ना, इकबाल और सुहरावर्दी जैसे नहीं

अशफाक उल्ला खान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने धर्म से ऊपर मातृभूमि को रखा। काकोरी कांड में वीरता दिखाकर वे अमर हुए।

Written byडॉ आनंद सिंह राणाडॉ आनंद सिंह राणा
Oct 21, 2025, 05:25 pm IST
in भारत, मत अभिमत, श्रद्धांजलि

“कुछ आरजू नहीं है, है आरजू तो यह..रख दे कोई जरा सी, खाके वतन कफन में” — महान् क्रांतिकारी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महारथी अशफाक उल्ला खान की उक्त पंक्तियाँ यही दुहाई देती हैं, कि आखिर खुदा ने भी देशभक्त अशफाक को जन्नत और जिन्ना, इकबाल तथा सुहरावर्दी को दोजख ही दिया होगा।

एतदर्थ गजवा-ए-हिंद, इस्लामिक स्टेट, लव जेहाद के समर्थकों और तथाकथित वामपंथियों तथा सेक्यूलरों को भी सूचित हो कि हमें भी अशफाक चाहिए न कि शरजील इमाम, उमर खालिद, यासीन मलिक, फारुख अहमद डार, तौकीर रजा, औवेसी बंधु तथा बालीवुड के भांड — त्रिकड़ी खान और इनके पैरोकार, क्योंकि ये तो दोजख ही जाएंगे।

शाहजहांपुर में जन्मे थे क्रांति के वीर अशफाक उल्ला खान

श्रीयुत अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्टूबर 1900 ई. में उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर स्थित शहीदगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद शफीक उल्ला खान और उनकी मां का नाम मज़हुरुन्निशां बेगम था। वे पठान परिवार से संबंध रखते थे और उनके परिवार में लगभग सभी सरकारी नौकरी में थे।

बाल्यावस्था में अशफाक का मन पढ़ाई में नहीं लगता था। वरन् उनकी रुचि तैराकी, घुड़सवारी, निशानेबाजी में अधिक थी। उन्हें कविताएं लिखने का काफी शौक था, जिसमें वे अपना उपनाम ‘हसरत’ लिखा करते थे। गांधीजी के असहयोग आंदोलन की असफलता से अशफाक उल्ला खान उद्विग्न थे।

रामप्रसाद बिस्मिल से मुलाकात और क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत

क्रांतिकारी घटनाओं से प्रभावित अशफाक के मन में भी क्रांतिकारी भाव जागे और उसी समय अथक प्रयासों के फलस्वरूप मैनपुरी षड्यंत्र के मामले में सम्मिलित रामप्रसाद बिस्मिल से उनकी भेंट हुई और वे भी क्रांति की दुनिया में समा गए। इसके बाद वे ऐतिहासिक काकोरी अनुष्ठान में सहभागी बने।

काकोरी अनुष्ठान (काकोरी ट्रेन एक्शन) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान् क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की दृष्टि से हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों से लूटे धन को हस्तगत करने का हैरतअंगेज़ कारनामा था।

काकोरी कांड: साहस, रणनीति और देशभक्ति का अद्भुत संगम

यह ऐतिहासिक अनुष्ठान 9 अगस्त सन् 1925 को हुआ। इस ट्रेन आक्रमण में जर्मनी के बने चार माउज़र पिस्तौल काम में लाये गये थे। इन पिस्तौलों की विशेषता यह थी कि इनमें बट के पीछे लकड़ी का बना एक और कुन्दा लगाकर रायफल की तरह उपयोग किया जा सकता था। हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के केवल दस सदस्यों ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया।

महान् क्रान्तिकारियों द्वारा चलाए जा रहे स्वतन्त्रता के आन्दोलन को गति देने के लिये धन की शीघ्र प्रतिपूर्ति के लिए शाहजहाँपुर में हुई बैठक के दौरान राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार का खजाना हस्तगत करने की योजना बनायी थी। इस योजनानुसार दल के ही एक प्रमुख सदस्य राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त सन् 1925 को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी “आठ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन” को चेन खींच कर रोका और क्रान्तिकारी पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खाँ, चन्द्रशेखर आज़ाद व 6 अन्य सहयोगियों की सहायता से समूची ट्रेन पर धावा बोलते हुए सरकारी खजाना हस्तगत कर लिया।

अंग्रेजी हुकूमत का प्रहार और वीरों का बलिदान

बरतानिया सरकार दहल उठी और उसने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के कुल 40 क्रान्तिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने व यात्रियों की हत्या करने का प्रकरण चलाया। इसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह को मृत्यु-दण्ड (फाँसी की सजा) सुनायी गयी।
इस प्रकरण में 16 अन्य क्रान्तिकारियों को कम से कम 4 वर्ष की सजा से लेकर अधिकतम काला पानी (आजीवन कारावास) तक का दण्ड दिया गया था। अशफाक उल्ला खान सबसे अंत में पकड़े गए थे।

विश्वासघात और अशफाक की बिस्मिल के प्रति श्रद्धा

यह भारत का दुर्भाग्य ही रहा कि सभी क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कराने में अपने लोगों ने सहयोग किया। पं. रामप्रसाद बिस्मिल पर अशफाक उल्ला खान की अगाध आस्था थी। कभी-कभी उनके प्रिय शिष्य श्रीयुत अशफाक उल्ला खान को कृष्ण भी कहा करते थे। पैरवी के समय अदालत में तो अशफाक उल्ला खान को रामप्रसाद बिस्मिल का लेफ्टिनेंट भी कहा गया।

सरकारी गवाह बनने से इनकार: अशफाक की निर्भीकता

काकोरी यज्ञ के उपरांत सीआईडी के पुलिस कप्तान खानबहादुर तसद्दुक हुसैन जेल में जाकर अशफ़ाक़ से मिले और उन्हें फाँसी की सजा से बचने के लिये सरकारी गवाह बनने की सलाह दी। जब अशफ़ाक़ ने उनकी सलाह को तबज्जो नहीं दी तो उन्होंने एकान्त में जाकर अशफ़ाक़ को समझाया—

“देखो अशफ़ाक़ भाई! तुम भी मुस्लिम हो और अल्लाह के फजल से मैं भी एक मुस्लिम हूँ। ये राम प्रसाद बिस्मिल वगैरह सारे लोग हिन्दू हैं। ये यहाँ हिन्दू सल्तनत कायम करना चाहते हैं। तुम कहाँ इन काफिरों के चक्कर में आकर अपनी जिन्दगी जाया करने की जिद पर तुले हुए हो।”

इतना सुनते ही अशफ़ाक़ की त्योरियाँ चढ़ गयीं और वे गुस्से में बोले—

“खबरदार! जुबान सम्हाल कर बात कीजिये। पण्डित जी को आपसे ज्यादा मैं जानता हूँ। उनका मकसद यह बिल्कुल नहीं है, और अगर हो भी तो हिन्दू राज्य तुम्हारे इस अंग्रेजी राज्य से बेहतर ही होगा। आपने उन्हें काफिर कहा इसके लिये, मैं आपसे यही दरख्वास्त करूँगा कि मेहरबानी करके आप अभी इसी वक्त यहाँ से तशरीफ ले जायें वरना मेरे ऊपर दफा 302 (कत्ल) का एक केस और कायम हो जायेगा।”

भारत माता के वीर सपूत का बलिदान

अंततः भारत माता के वीर सपूत अशफाक उल्ला खान को काकोरी अनुष्ठान के आरोप में 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया।

धर्म से ऊपर मातृभूमि: अशफाक उल्ला खान की अमर पंक्तियाँ

महान् क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान मुसलमान थे, परंतु मातृभूमि उनके लिए धर्म से ऊपर थी, जिसकी पुष्टि उनकी इस कविता से होती है —

“जाऊँगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जाएगा :
जाने किस दिन हिंदुस्तान, आजाद वतन कहलाएगा।

बिस्मिल हिंदू हैं कहते हैं, फिर आऊँगा – फिर आऊँगा :
ले नया जन्म ऐ भारत मां! तुझको आजाद कराऊँगा।।

जी करता है, मैं भी कह दूँ,
पर मजहब से बँध जाता हूँ;

मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कह पाता हूँ।
हाँ, खुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूँगा;
और जन्नत के बदले उससे, एक नया नया जन्म ही माँगूँगा।।”

Topics: Kakori KandRam Prasad BismilAshfaqulla KhanFreedom Fighters of IndiaAshfaqulla Khan BiographyKakori Train RobberyIndian Independence MovementShahjahanpur HeroesKakori MartyrsAshfaqulla Khan Story
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

महारथी रामप्रसाद बिस्मिल

मातृभूमि के महाकवि और क्रांति के महारथी : रामप्रसाद बिस्मिल

जलियांवाला बाग का नृशंस नरसंहार और उधम सिंह का प्रतिशोध

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशफाक उल्ला खां

जिनके लिए मातृभूमि मजहब से ऊपर थी, भारत को अशफाक चाहिए,गज़वा-ए-हिंद वाले नहीं

अमर बलिदानी पं. राम प्रसाद बिस्मिल

नेहरू के समधी ने रामप्रसाद बिस्मिल को फांसी पर चढ़वाया, कांग्रेस ने दिया इनाम! बिस्मिल और उनके साथियों को क्या मिला?

रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर विशेष: मां ने कहा था- ‘श्री रामचन्द्र जैसा ही पुत्र चाहती थी, वैसा ही मेरा राम था’

19 December Special : देश को अमर बलिदानी अशफाक चाहिए, जिन्ना और इकबाल जैसे नहीं

Load More

ताज़ा समाचार

स्वातंत्र्य वीर सावरकर

दया याचिका से नहीं, जन-दबाव से रिहा हुए थे सावरकर: परिजनों का बड़ा दावा- “कांग्रेस चाहती तो बच जाती भगत सिंह की फांसी”

देहरादून: BJP नेता विनोद कश्यप मर्डर केस का मुख्य आरोपी अमन 2 साथियों संग हरियाणा से गिरफ्तार, अब तक 9 पहुंचे जेल

Syama Prasad Mookerjee 125th Birth Anniversary CM Pushkar Singh Dhami Uttarakhand

अनुच्छेद 370 हटाना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि: सीएम धामी

Uttarakhand New Sports Policy 2026 CM Pushkar Singh Dhami Sports University Haldwani

उत्तराखंड में खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी की प्रक्रिया जल्द होगी पूरी, CM धामी ने दिए निर्देश!

Who is Ghazal Marzaban Iran Evin Prison Hunger Strike Christian Convert Women Oppression

ईरान की जेल में तड़प रही गजल मर्जाबान: इस्लाम छोड़ने पर मिली 9 साल की सजा, हफ्ते भर से भूख हड़ताल पर महिला!

Uttarakhand Minority Educational Institutions Act 2025 CM Pushkar Singh Dhami Madarsa Board Abolished

उत्तराखंड में कैसे समाप्त हुआ मदरसा बोर्ड? जानिए धामी सरकार के नए अल्पसंख्यक शिक्षा कानून की पूरी इनसाइड स्टोरी!

Punjab Congress Structural Changes Manish Tiwari Charanjit Singh Channi Mallikarjun Kharge

पंजाब कांग्रेस में फिर मचेगा गदर! भड़के सांसद मनीष तिवारी, बोले- ‘मैंने पूरी जिंदगी कांग्रेस सेवा में लगा दी’

सेमीकंडक्टर (चित्र- एआई द्वारा निर्मित)

Explainer : क्या है सेमीकंडक्टर ? क्या ‘चिप’ तय करेगी दुनिया की सत्ता और भारत बनेगा भविष्य का निर्माता?

Pakistan Historic Gurudwara Singh Sabha Demolished Punjab Land Mafia ETPB Sikh Protest

पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं सिखों के गुरुद्वारे: भू-माफिया व भ्रष्ट अधिकारी लूट रहे हैं अरबों की संपति

Uttarakhand Disaster Management Plan 2026 CM Pushkar Singh Dhami Mock Drill IT Park Dehradun

उत्तराखंड में मानसून से पहले बड़ा एक्शन: अब AI और ड्रोन से थमेगा आपदा का खतरा! CM धामी ने की समीक्षा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies