महाराष्ट्र के पुणे में ऐतिहासिक किले शनिवार वाडा में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। यह घटना शुक्रवार (18 अक्टूबर) दोपहर की है। भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर गौमूत्र छिड़ककर और शिव वंदना करके से शनिवार वाडा का शुद्धिकरण कराया है।
मेधा कुलकर्णी ने शनिवार वाडा को मराठा साम्राज्य का प्रतीक बताते हुए इसे नमाज के लिए अनुचित स्थान करार दिया। वहीं विपक्ष ने सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है।
भाजपा की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा कर इसे ऐतिहासिक धरोहर के अपमान का मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से शनिवार (19 अक्टूबर) को कहा, “सकल हिंदू समाज की तरफ से आज बहुत बड़ा आंदोलन किया गया।
शुक्रवार को दोपहर 1:30 बजे जिस स्थान पर मुस्लिम महिलाओं ने नमाज अदा की, वह हमारी ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है। एक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संरक्षित स्मारक है। शनिवार वाड़ा नमाज पढ़ने की जगह नहीं है। हम इसका विरोध करते हैं।”
ऐतिहासिक स्थल के पास हजरत की मजार
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि जिस भूमि पर उन्होंने ऐसी हरकत की थी। उस भूमि को फिर से पवित्र करने के लिए हमने वहां शिव वंदना और शुद्धिकरण करके उसे फिर से पवित्र किया है। यहां पास में ही एक मजार भी है, जो किसी भी ऐतिहासिक स्थल के आसपास आप नहीं देखेंगे। चबूतरे को चादर डालकर और उसे हजरत ख्वाजा सय्यद दरगाह नाम देकर बोर्ड लगाया गया है। मैंने बहुत बार अलग-अलग ऑफिसर को ये फोटो भेजा था और उसकी जांच पड़ताल करने को भी कहा था, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं किया।
लेकिन आज हमने वहां जाकर अपना भगवा झंडा लहराने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने हमें रोक दिया। ये लोग कहीं भी नमाज पढ़ते हैं और उसे वक्फ संपत्ति में जोड़ने की कोशिश करते है फिर उस पर कब्जा कर लेते हैं। हिंदू समाज अब जागरूक है।
दरअसल, शनिवार को पुणे स्थित शनिवार वाडा के ऊपरी मंजिल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें छह से सात मुस्लिम महिलाएं चटाई बिछाकर नमाज पढ़ते हुए देखी गईं। मेधा कुलकर्णी ने एक्स पर पोस्ट किया, “शनिवार वाडा में नमाज नहीं चलेगी, हिंदू समाज जाग चुका है। चलो शनिवार वाडा।” उन्होंने रविवार शाम 4 बजे कस्बा पुलिस चौकी के सामने प्रदर्शन का ऐलान किया था, जहां कुलकर्णी के विरोध पर बगीचे को बंद कर दिया गया था।
बताया जाता है कि शनिवार वाडा पेशवाओं का किला था। इसका निर्माण बाजीराव प्रथम ने 1732 में कराया था। शनिवार को इस किले की नींव रखने जाने की वजह से इसका नाम शनिवार वाडा पड़ा।

















