वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर का खजाना शनिवार को 54 साल बाद खोला गया। ये खजाना लगभग 160 साल पुराना है। इसको वर्ष 1970 से बंद किया गया था। दरवाजे को ग्राइंडर से काट कर खोला गया। करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद लोग कमरे में प्रवेश कर पाए। कमरे में काफी धूल भरी हुई थी। शनिवार को दिन भर की सर्च में एक लोहे का बक्सा, एक लकड़ी का बक्सा, तीन कलश, आभूषण के कुछ खाली बॉक्स, 1970 का अखबार और चांदी का एक छोटा छत्र मिला। इसके साथ ही कमरे में दो सांप के बच्चे भी निकले। दोनों सांप को वन विभाग की टीम ने पकड़ कर जंगल में छोड़ दिया।
दिखा करीब 10 फीट लंबा बॉक्स
अभी एक तिजोरी और करीब 10 फीट लंबा बॉक्स दिखाई दिया है। इसको अभी नहीं खोला गया है। अगली बैठक में सर्च की तारीख तय की जायेगी। बता दें कि गत सितम्बर माह में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने निर्णय लिया था कि मंदिर परिसर में पांच दशक से बंद कमरों को खोला जायेगा।
मंदिर के इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी का कहना है कि 54 साल से बंद उन कमरों का निर्माण सन 1864 में वर्तमान मंदिर के गर्भगृह में भगवान बांके बिहारी के सिंहासन के ठीक नीचे किया गया था। इन कमरों में कीमती और ऐतिहासिक वस्तुएं होने की उम्मीद है। यह भी संभव है कि मोरनी हार भी वहां पर रखा हुआ मिले। मोरनी हार अत्यंत सुंदर एवं दुर्लभ हार है। इसके साथ ही चांदी से बना शेषनाग, जिस पर हजार फन बने हुए हैं। इसके भी मिलने की उम्मीद है।
अनुमान लगाया गया था कि ऐतिहासिक सिक्के और दस्तावेज भी हो उन कमरों में मिल सकते हैं। यह भी संभावना है कि भरतपुर, करौली और ग्वालियर जैसी रियासतों द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के सिक्के, दान-सेवा पत्र, मोहर लगी सनद (शाही फरमान), भेंट पत्र और पट्टे जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी इन कमरों बंद हों। ये कागजात मंदिर के स्वामित्व के संबंध में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इतिहासकार प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी का कहना है कि यह खजाना आखिरी बार वर्ष 1970 में खोला गया था।उस समय, कुछ बहुमूल्य आभूषण निकालकर एक सीलबंद बक्से में मथुरा के भूतेश्वर स्थित स्टेट बैंक में जमा करा दिए गए थे।उसके बाद उस बक्से को वापस लाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।











