केरल के कोच्चि में सेंट रीटा पब्लिक स्कूल का हिजाब विवाद अब संविधान और अनुशासन के बीच की रेखा पर गंभीर बहस छेड़ चुका है। सवाल साफ है — क्या स्कूल के परिसर में मजहबी पहचान नियमों से ऊपर हो सकती है? वहीं विवाद बढ़ने पर स्कूल प्रशासन ने दो दिन तक स्कूल बंद रखने का फैसला लिया था। बुधवार (15 अक्टूबर) को हालात सामान्य होने के बाद स्कूल दोबारा खोला गया, लेकिन पुलिस की तैनाती के बीच माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला तब शुरू हुआ जब पल्लुरुथी स्थित इस सेंट रीटा पब्लिक स्कूल में आठवीं की छात्रा को हिजाब पहनकर आने पर कक्षा से बाहर किया गया। स्कूल ने अपने निर्धारित ड्रेस कोड का हवाला दिया — वही नियम जो सभी छात्रों पर समान रूप से लागू है। लेकिन इस पर राजनीति और तथाकथित “मजहबी स्वतंत्रता” का तड़का लगते ही मामला उछाल दिया गया।
स्कूल शिक्षा का केंद्र है, न कि मजहबी संस्था
जबकि सच्चाई यह है कि स्कूल कोई मजहबी या धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि शिक्षा का केंद्र है। यहां सबका धर्म ज्ञान और अनुशासन होना चाहिए। जब डॉक्टर, सैनिक या खिलाड़ी यूनिफॉर्म में अपनी पहचान से ऊपर उठकर देश या कर्तव्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो छात्र-छात्राओं को भी स्कूल की मर्यादा का पालन करना चाहिए।
दो दिन बाद खुला स्कूल, पर छात्रा नहीं पहुंची
बुधवार सुबह जब स्कूल दोबारा खुला तो गेट पर पुलिसकर्मी तैनात थे। मीडिया को भी स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। स्कूल सूत्रों ने बताया कि जिस छात्रा को लेकर विवाद हुआ था, वह स्वास्थ्य कारणों से बुधवार को अनुपस्थित रही। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आगे उसे हिजाब पहनने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।
मजहबी स्वतंत्रता का मतलब अनुशासन तोड़ने की छूट नहीं
सरकारी मंत्री के बयान ने भले ही “हिजाब पहनने के अधिकार” की बात कही हो, लेकिन यह अधिकार अनुशासन को तोड़ने की अनुमति नहीं देता। संविधान “धर्म की स्वतंत्रता” देता है, पर किसी संस्थान के नियमों से छूट नहीं देता।
यूनिफॉर्म बराबरी और एकता का प्रतीक है
अगर हर कोई अपने-अपने धर्म या रीति के अनुसार ड्रेस तय करने लगे, तो फिर यूनिफॉर्म का क्या अर्थ बचेगा? ड्रेस कोड सिर्फ कपड़ा नहीं — बराबरी और एकता का प्रतीक है। उसी यूनिफॉर्म में अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम, सब एक साथ बैठते हैं। यही शिक्षा की आत्मा है।
पीटीए अध्यक्ष और सरकार की प्रतिक्रिया
वहीं, सेंट रीटा स्कूल के पीटीए (अभिभावक-शिक्षक संघ) अध्यक्ष जोशी ने कहा कि उन्हें सरकार से इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है। उनका कहना है कि मंत्री का बयान सरकारी स्कूलों के लिए था या निजी CBSE स्कूलों के लिए, यह स्पष्ट नहीं है।
विवाद अभी थमा नहीं, सवाल अब भी बरकरार
फिलहाल, सरकार ने स्कूल से रिपोर्ट मांगी है और छात्रा की पढ़ाई में किसी भी तरह की बाधा न आने का आश्वासन दिया है। लेकिन यह विवाद अभी थमा नहीं है। सवाल अब भी बरकरार है कि क्या स्कूल ड्रेस कोड के नाम पर मजहबी पहचान को आधार बनाकर स्कूल की मर्यादा और ड्रेस कॉड को ख़त्म किया जा सकता है..?

















