उत्तर प्रदेश के संभल जिले के जालम सराय गांव स्थित पीएमश्री विद्यालय एक विवाद के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि यहां कुछ शिक्षकों द्वारा छात्रों को धार्मिक प्रतीकों- जैसे हिजाब और टोपी पहनाकर प्रार्थना में शामिल किया गया और इस्लामिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानाचार्य और दो सहायक अध्यापकों को निलंबित कर दिया है, साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
वायरल वीडियो के बाद स्कूल में जांच और निरीक्षण
यह मामला तब प्रकाश में आया जब स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में दावा किया गया कि कुछ छात्राएं हिजाब में और छात्र टोपी पहनकर प्रार्थना में भाग ले रहे हैं। आरोप यह भी लगाया गया कि प्रार्थना के दौरान आयतों का पाठ कराया गया। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसके समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कुछ छात्रों ने पूछताछ के दौरान इसे पुराना बताया है। घटना के बाद 8 मई को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केवल प्रभारी प्रधानाध्यापक मौजूद मिले, जबकि अन्य स्टाफ अनुपस्थित था। प्रधानाचार्य मोहम्मद अंजार अहमद के बारे में बताया गया कि वे वर्तमान में मेडिकल लीव पर हैं। जांच के दौरान 352 पंजीकृत छात्रों में से 220 उपस्थित पाए गए। विद्यालय में जाटव और मुस्लिम समुदाय दोनों के बच्चे अध्ययनरत हैं, जिससे मामला सामाजिक दृष्टि से और संवेदनशील हो गया है।
हिजाब विवाद पर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई तेज
खंड शिक्षा अधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल आती हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह किसी औपचारिक निर्देश का हिस्सा था या व्यक्तिगत/परिवारिक स्तर पर लिया गया निर्णय। वहीं, प्रशासन का कहना है कि जांच में कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं और इसी आधार पर कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी कर रहे हैं। यह समिति न केवल वर्तमान आरोपों की जांच करेगी, बल्कि विद्यालय के अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा करेगी।
इस बीच, अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे घर से हिजाब पहनकर नहीं जाते, और उन्हें इस तरह की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वीडियो देखकर उन्हें भी आश्चर्य और चिंता हुई है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि बच्चों पर किसी भी प्रकार की धार्मिक पहचान थोपना उचित नहीं है और स्कूल का माहौल पूरी तरह शैक्षिक और निष्पक्ष रहना चाहिए। दूसरी ओर, निलंबित प्रधानाचार्य मोहम्मद अंजार अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी समाचारों के माध्यम से मिली है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से मेडिकल लीव पर हैं और विद्यालय की दैनिक गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा।

















