2 साल में 2 आईसीसी ट्रॉफी जीतने के बाद भी रोहित शर्मा से कप्तानी क्यों छीनी गई? क्या है इनसाइड स्टोरी
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होम खेल क्रिकेट

2 साल में 2 आईसीसी ट्रॉफी जीतने के बाद भी रोहित शर्मा से कप्तानी क्यों छीनी गई? क्या है इनसाइड स्टोरी

क्रिकेट पंडितों की नजर में क्या दो वर्षों में उनकी बल्लेबाजी की प्रतिभा इतनी क्षीण पड़ जाएगी कि भारतीय टीम उन्हें ढोने की स्थिति में नहीं होगी? क्या भारतीय चयन समिति के प्रमुख अजित अगरकर या मुख्य कोच गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट को और आगे ले जाने की कोई योजना बना रहे है?

Written byप्रवीण सिन्हाप्रवीण सिन्हा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Oct 14, 2025, 05:30 pm IST
in क्रिकेट, खेल

एकदिवसीय क्रिकेट में भारत के सफलतम कप्तान रोहित शर्मा से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम की कप्तानी छीन लेने के बाद क्रिकेट जगत में काफी हलचल है। खूब चर्चाएं चल रही हैं कि पिछले दो वर्षों में भारत को दो-दो आईसीसी ट्रॉफी विजेता बनाने वाले रोहित शर्मा से इस समय कप्तानी छिनना कितना जायज है? क्या 2027 में होने वाले विश्वकप में खेलने की इच्छा जता चुके रोहित से इस तरह का व्यवहार करना सही है? क्या रोहित की नेतृत्व क्षमता में रत्ती भर की कमी दिखी? क्रिकेट पंडितों की नजर में क्या दो वर्षों में उनकी बल्लेबाजी की प्रतिभा इतनी क्षीण पड़ जाएगी कि भारतीय टीम उन्हें ढोने की स्थिति में नहीं होगी? क्या भारतीय चयन समिति के प्रमुख अजित अगरकर या मुख्य कोच गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट को और आगे ले जाने की कोई योजना बना रहे है?

पिछले दो वर्षों से रोहित-कोहली (रो-को) को भारतीय टीम से बाहर करने की मांग करने वाले कुछ क्रिकेट विशेषज्ञ तो इन दिनों मरसिया पढ़ने में लगे हुए हैं कि अगर रोहित शर्मा को संन्यास लेने के लिए मनाना है तो कम से कम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तो उनकी कप्तानी बरकरार रखी जाती। उसके बाद ससम्मान रोहित को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेने के लिए मनाया जाता। इन खैरख्वाह क्रिकेट विशेषज्ञों को रोहित पहले ही जवाब दे चुके हैं कि – उन्हें कब तक खेलना है, कब तक टीम की कप्तानी करनी है, उनका बल्ला या शरीर अगले विश्व कप तक चलेगा या नहीं? इन तमाम सवालों पर अपनी राय माइक पकड़ कर कुछ से कुछ अटकलबाजियां लगाने वाले या कलम चला देने वाले नहीं रख सकते हैं।

आखिर पैमाना क्या है?

रोहित की यह आपत्ति जायज है, क्योंकि भारतीय क्रिकेट को एक ऊंचाई तक पहुंचाने या टीम की सोच में बड़ा बदलाव लाने वाले इतने अनुभवी कप्तान को बखूबी पता है कि वनडे क्रिकेट से उन्हें कब संन्यास लेना है। हालांकि ऐसा दावा किया जा रहा है कि रोहित और विराट कोहली ने बढ़ती उम्र के कारण टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास लिया है। लेकिन यह भी चर्चा है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच से दूर किया गया है। इन दावों में या कयास के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाना आसान नहीं है।

भारतीय क्रिकेट की वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो पाएंगे कि गौतम गंभीर और अगरकर की रणनीति किस ओर है। क्या वे कुछ इस तरह की टीम संरचना तैयार करने में लगे हैं, जैसे सातवें-आठवें दशक में वेस्ट इंडीज, इस सदी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया और पिछले 5-7 वर्षों से इंग्लैंड की टीम तैयार की जाती रही है। यहां सवाल उठना जायज है कि भारतीय क्रिकेट को किस रणनीति पर आगे ले जाने की तैयारी है? पेशेवर तरीके से विश्व की शीर्षस्थ टीमों की तरह तैयार कर या फिर पारंपरिक अंदाज में टीम में युवा जोश भरकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचाने की मंशा? यह भी सवाल है कि क्या टीम प्रबंधन इन दोनों पैमानों पर खरा उतर रहा है?

क्लाइव लॉयड और रणतुंगा का दौर

1975 में पहली बार जब वनडे क्रिकेट का विश्व कप का आयोजन किया गया तो क्लाइव लॉयड के नेतृत्व में वेस्ट इंडीज की टीम चैंपियन बनी। उस समय लॉयड टीम के नंबर एक बल्लेबाज नहीं थे, लेकिन बेहतरीन रणनीतिकार थे। वेस्ट इंडीज ने लॉयड पर पूरा भरोसा जताया और उनकी टीम ने लगातार दो विश्व कप जीतने के बाद 1983 में भी फाइनल में पहुंची। लेकिन हरियाणा हरीकेन कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय टीम ने फाइनल में वेस्ट इंडीज के सपनों पर तुषारापात किया। हार की बौखलाहट में वेस्ट इंडीज ने उसी वर्ष भारत का दौरा किया और लगातार 6-7 वनडे मैचों में अपनी धाक जमाई। फिर, इमरान खान ने 1992 में पाकिस्तान को विश्व विजेता बनाकर कुछ इसी तरह की कहानी दोहरायी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके इमरान को आग्रह कर टीम की कमान सौंपी गयी थी। दूसरी ओर, 1996 में श्रीलंकाई टीम ने जब विश्व कप जीता तो कप्तान अर्जुन रणतुंगा न तो फिटनेस और न ही बल्ले के दम पर टीम के शीर्ष खिलाड़ी थे। लेकिन, अरविंद डीसिल्वा व सनथ जयसूर्या जैसे स्टार खिलाड़ियों को पैदा करने वाले शीर्ष कप्तान जरूर थे रणतुंगा।

स्टीव वॉ का दौर

फिर दौर आया 1999 के विश्व चैंपियन स्टीव वॉ के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई टीम का। बेहद चतुर और रणनीति के साथ मैदान पर उतरते हुए स्टीव वॉ ने विश्व की हर टीम को एकतरफा अंदाज में रौंदा। स्टीव की परंपरा को रिकी पोंटिंग ने बखूबी आगे बढ़ाया। पोंटिंग की टीम में 2007 विश्व कप फाइनल के शतकधारी एडम गिलक्रिस्ट (149), मैथ्यू हेडन, माइक हसी और मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने ग्लेन मैकग्रा जैसे धुरंधर क्रिकेटर थे।

महेंद्र सिंह धोनी की रणनीति

काबिल और रणनीतिकार कप्तानों व खिलाड़ियों की सूची में महेंद्र सिंह धोनी का नाम काफी ऊपर है। गौर करें तो धोनी ने टीम के अनुभवी खिलाड़ियों के दम पर भारतीय टीम को 2011 का विश्व विजेता बनाया था। धोनी ने कैंसर से जूझ रहे युवराज सिंह जैसे धुरंधर का बखूबी इस्तेमाल किया और वह 2011 विश्व कप के मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने, जबकि वर्तमान कोच गौतम गंभीर ने फाइनल में सर्वाधिक 97 रनों की पारी खेल टीम को विश्व विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

खिलाड़ियों का अनुभव जरूरी

ये सारे उदाहरण साबित करते हैं कि किसी भी टीम के कप्तान और अनुभवी खिलाड़ियों को दरकिनार कर कोई भी टीम क्रिकेट के शिखर पर नहीं चढ़ती है। यह विश्व क्रिकेट के सुनहरे इतिहास की एक झलक है। आगे यह भी साबित हो जाएगा कि आधुनिक व तेज-तर्रार टीम तैयार करने के लिए भी 2027 विश्व कप के लिए रोहित और विराट की कितनी जरूरत पड़ सकती है।

Topics: गौतम गंभीर टीम इंडियाअजित अगरकर चयन समितिरोहित शर्मा विवादभारतीय क्रिकेट में बदलावरोहित शर्मा वनडे कप्तानरोहित शर्मा बनाम गौतम गंभीररोहित शर्मा रिटायरमेंटरोहित शर्मा आईसीसी ट्रॉफीरोहित शर्माविराट कोहली और रोहित शर्मारोहित शर्मा से कप्तानी छीनी गईभारतीय टीम नया कप्तान
प्रवीण सिन्हा
प्रवीण सिन्हा
वरिष्ठ खेल पत्रकार। साढ़े तीन दशक का अनुभव [Read more]
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