रविवार का दिन रोमांच से भरपूर रहा। आमतौर पर दिन में 8 घंटे से ज्यादा काम करने पर लोग थक जाते हैं, लेकिन रविवार को दुनिया भर के लाखों खेलप्रेमियों में टीवी या मैदान पर करीबन 12 घंटे तक तीन यादगार मैच देखकर भी थकान नजर नहीं आयी। देर रात गत विजेता अर्जेंटीना को 1-0 से हरा स्पेन का फीफा विश्व कप खिताब जीतना हो या लॉर्ड्स में भारतीय क्रिकेट स्टार रोहित शर्मा का इंग्लैंड के विरुद्ध तीसरे वनडे मैच में ऐतिहासिक शतकीय पारी खेलना, या फिर भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू का जापान ओपन खिताब जीत इतिहास रचना – तीनों मौके खेलप्रमियों के लिए एक उत्सव सा माहौल बना गया। इसलिए 19 जुलाई को खेल जगत का सुपर संडे के रूप में याद किया जाएगा।
स्पेन बना फुटबॉल विश्व विजेता
फीफा विश्व कप के फाइनल मैच में स्पेन ने खेल के हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अर्जेंटीना को 1-0 से हरा दिया। इस मैच में स्पेनी टीम में हर वो खूबियां दिखीं जो एक विश्व विजेता बनने के लिए जरूरी होती हैं। स्पेन के प्रदर्शन में जीत की दृढ़ इच्छाशक्ति सहित रोमांचक ऐक्शन, शानदार रणनीति, अद्भुत खेल कौशल और तूफानी गति – सबकुछ आला दर्जे का दिखा। दुनिया भर के सबसे ज्यादा देशों में खेले जाने वाले खेल फुटबॉल का महाकुंभ कोई डेढ़ माह तक चला। लेकिन इस बार फीफा विश्व कप का रोमांच अपनी पराकाष्ठा पर था। पूर्व विश्व विजेताओं को नयी-नयी टीमों ने नाकों चने चबवा दिए। हाल यह था कि सांबा की थाप पर 5 बार विश्व कप जीत चुकी ब्राजील, 4-4 बार के विश्व विजेता जर्मनी व इटली सहित फ्रांस, उरुग्वे (2-2 बार) और इंग्लैंड (1 बार) जैसी टीमें खिताबी दौड़ से पहले ही बाहर हो चुकी थीं। यही नहीं, 3 बार के विश्व विजेता अर्जेंटीना को भी स्पेन ने ऐसी शिकस्त दी जिसे महान डिएगो मैराडोना व आधुनिक फुटबॉल के महानायक लियोनेल मेसी का देश लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा।
एकतरफा फाइनल
हालांकि मेसी का रोते हुए विश्व फुटबॉल से विदा होना वास्तव में भावुक पल था। मेसी के करोड़ों प्रशंसकों ने कल्पना तक नहीं की होगी कि वह अपने करिअर के अंतिम मैच में इतने असहाय नजर आएंगे और एक भी गोल नहीं दाग पाएंगे। लेकिन स्पेनी टीम ने मेसी सहित पूरी अर्जेंटीना टीम को बौना साबित कर दिया। मैसी के शानदार प्रदर्शन के दम पर अर्जेंटीना को विश्व कप खिताब का प्रबल दावेदार माना गया था, लेकिन फाइनल में स्पेनी टीम ने उनकी एक न चलने दी। बॉल पजेशन से लेकर शानदार पासिंग, मूव और गोल पोस्ट पर दागे गए शॉटों के मामले में स्पेन ने अर्जेंटीना को काफी पीछे छोड़ दिया।
पूरे मैच के 70 प्रतिशत से ज्यादा समय तक गेंद स्पेन के कब्जे में रही, स्पेन ने जहां करीबन 15 शॉट गोलपोस्ट की ओर दागे तो अर्जेंटीना मात्र एक शॉट विपक्षी गोलपोस्ट पर दाग पाया। मेसी को स्पेनी रक्षकों ने इस कदर कवर करके रखा था कि वह एकाध मूव बनाने के अलावा एक बार भी गोल करने की स्थिति में नहीं पहुंच पाए। मैच का एकमात्र जादुई गोल स्पेनी फॉरवर्ड फेरन टोरेस के दनदानते शॉट से मैच के 106ठे मिनट में आया। टोरेस ने बिजली की तेजी से अर्जेंटीनी रक्षापंक्ति और गोलकीपर को भेदते हुए स्पेनी टीम को विश्व फुटबॉल के शिखर पर पहुंचा दिया।
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नए युग की शुरुआत
भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान बाइचुंग भूटिया और सुनील छेत्री सहित तमाम फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इतना एकतरफा विश्व कप फुटबॉल का फाइनल मैच उन्होंने कभी नहीं देखा था। स्पेनी फॉरवर्ड निको विलियम्स और लेमिन येमाल ने खतरनाक ढंग से अर्जेंटीना पर अटैक करते हुए स्पष्ट संकेत दे दिया कि एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो (पुर्तगाल के कप्तान) या लियोनेल मेसी जैसे महानायकों का यूं फुटबॉल जगत से विदा होना सबको साल रहा है।
लेकिन, यह सुखद संयोग है कि अर्जेंटीना फुटबॉल के एक युग का अंत एक नए युग की धमाकेदार शुरुआत के साथ हुई है। स्पेनी टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए विश्व विजेता बनी है। इस दौरान उन्होंने 14 गोल दागे और मात्र एक गोल खाया, जबकि अर्जेंटीना ने 19 गोल दागे तो 8 गोल खाये भी। यही नहीं, स्पेनी टीम दो बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची और दोनों ही बार चैंपियन बनी, जबकि अर्जेंटीना की टीम कुल सातवीं बार फाइनल में पहुंची और तीन बार खिताब जीतने में सफल रही है।

















