पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चनाब नगर में शुक्रवार को अहमदी समुदाय की एक मस्जिद पर आतंकियों ने हमला किया। यह मस्जिद बेत-उल-महदी के नाम से जानी जाती है और अहमदी मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख स्थान है। यह हमला जुमे की नमाज के तुरंत बाद हुआ, जब मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। चश्मदीदों के अनुसार, कुछ सशस्त्र हमलावरों ने नमाज के बाद मस्जिद परिसर में घुसने की कोशिश की। मस्जिद की सुरक्षा में तैनात अहमदी समुदाय के वॉलंटियरों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावरों को रोक लिया, जिसके बाद दोनों ओर से गोलियां चलीं।
झड़प में एक हमलावर मौके पर ही मारा गया, जबकि कई वॉलंटियर घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि सभी की हालत अब स्थिर है। समुदाय के प्रवक्ताओं का कहना है कि अगर हमलावर मस्जिद के अंदर तक पहुंच जाते, तो नुकसान कहीं अधिक हो सकता था। वॉलंटियर्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर दर्जनों लोगों की जान बचाई। उनकी सतर्कता और साहस के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद परिसर को घेर लिया है और मौके से हथियार तथा अन्य सामान बरामद किया गया है। फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। अब तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
अहमदी समुदाय पर लगातार बढ़ते हमले- यह हमला पाकिस्तान में अहमदी मुस्लिम समुदाय पर बढ़ते हमलों की श्रृंखला का ताज़ा उदाहरण है। अहमदी समुदाय पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में धार्मिक भेदभाव, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहा है। 1974 में पाकिस्तान की संसद ने अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। उसके बाद से इस समुदाय पर अत्याचार, झूठे आरोप, और भीड़ हिंसा की घटनाएँ लगातार होती रही हैं। अहमदियों को अपने धार्मिक स्थलों को “मस्जिद” कहने या इस्लामी शब्दों के इस्तेमाल तक की मनाही है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार और प्रशासन अक्सर इन हमलों पर सख्त कार्रवाई नहीं करते, जिससे कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ता है। कई बार तो पुलिस खुद अहमदियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर लेती है, जबकि वे पीड़ित होते हैं।
दोषियों को सजा मिले- अहमदी समुदाय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। समुदाय के नेताओं ने कहा कि यह हमला न केवल अहमदी मुसलमानों पर, बल्कि पाकिस्तान की धार्मिक सद्भावना और शांति पर भी हमला है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और सख्त सज़ा दी जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिंसा करने की हिम्मत न करे। समुदाय के प्रवक्ता ने कहा, “हम शांति और कानून में विश्वास रखते हैं। हमें अपने देश में भी सुरक्षा और बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह हमारे अधिकारों की रक्षा करे।” हमले के बाद स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला समुदाय में डर फैलाने और धार्मिक सौहार्द को कमजोर करने की कोशिश लगती है।

















