कनाडा ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम में हिंदुओं के प्रति घृणा को जानबूझकर फैलाया जा रहा है। उनके मंदिरों पर हमला किया जा रहा है और साथ ही उनके पर्वों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इस्लामोफोबिया की बातें सभी करते हैं, और यह भी चाहते हैं कि आतंकी घटनाओं की आलोचना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आ जाए, परंतु जब बात हिंदुओं के साथ हो रहे घृणा संबंधी अपराधों की आती है, तो इस पर सन्नाटा छा जाता है।
हिंदुओं के प्रति घृणा बढ़ रही है, यह बात पूरी तरह से सत्य है और कनाडा में तो यह और भी परिलक्षित हो रहा है। अब कनाडा में अल्बर्टा में वैनराइट पहली ऐसी म्यूनिसपैलिटी बन गई है, जिसने आधिकारिक रूप से हिन्दू फोबिया को स्वीकार किया है। जिसने यह स्वीकारा है कि हिंदुओं के प्रति घृणा के अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। और यहाँ पर इस घृणा से निबटने के लिए कड़ी कदम उठाए गए हैं। यह कदम यह देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि काफी समय से मंदिरों पर होने वाले आक्रमण बढ़ गए हैं।
#BREAKING: Wainwright, Alberta recognizes Hinduphobia! CoHNA Canada helps make history.
The @TownWainwright has become Canada’s first municipality to issue a proclamation condemning Hinduphobia and anti-Hindu bigotry, recognizing Hinduism’s (Sanatana Dharma’s) values of peace,… pic.twitter.com/kY235teP4N
— CoHNA Canada (@CoHNACanada) October 8, 2025
इस कदम को लेकर कोअलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) ने इस कदम का स्वागत किया है। इन्होनें अपनी वेबसाइट पर इस कदम का स्वागत करते हुए बयान दिया कि, सीओएचएनए अल्बर्टा के वेनराइट शहर द्वारा की गई ऐतिहासिक घोषणा का स्वागत करता है, जो कनाडा में हिंदू-विरोध और हिंदू-विरोधी कट्टरता की औपचारिक रूप से निंदा करने वाला वाली पहली म्यूनिसपैलिटी बन गया है। यह अभूतपूर्व घोषणा हिंदू-विरोधी भेदभाव और असहिष्णुता को संबोधित करते हुए, विविधता, समान सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के प्रति समुदाय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।“
उन्होनें आगे लिखा कि मेयर ब्रूस पग द्वारा की गई घोषणा सनातन धर्म को विश्व के सबसे पुराने और सबसे बड़े धर्मों में से एक धर्म मानती है, जिसका पालन पूरे विश्व में 100 से ज्यादा देशों में 1.2 बिलियन से अधिक लोग कर रहे हैं। यह कनाडा के हिंदुओं के पब्लिक सर्विस, कनाडा की सशस्त्र सेनाओं, चिकित्सा, तकनीक, शिक्षा क्षेत्र, व्यापार और सामुदायिक जीवन में किये गए योगदानों के प्रति भी ध्यान आकर्षित करती है और साथ ही हिन्दू परंपराओं जैसे योग, आयुर्वेद, ध्यान, संगीत और भोजन के वैश्विक प्रभाव का उत्सव मनाती है, जिन्होनें कनाडा के समाज को समृद्ध किया है।
इसने आगे लिखा है कि कनाडा के हिंदुओं ने मेहनत, परिवार, शिक्षा और देश के कानून के प्रति आदर के मूल्यों को आत्मसात किया है। सीओएचएनए कनाडा के अध्यक्ष ऋषभ सारस्वत ने कहा कि “मेयर पग और वेनराइट टाउन काउंसिल का यह ऐतिहासिक कदम एक शक्तिशाली संदेश देता है कि कनाडा के समाज में हिंदू विरोधी घृणा के लिए कोई स्थान नहीं है।“
ऋषभ ने आगे कहा कि “चूंकि हिंदुओं के प्रति घृणा बढ़ रही है, जिनमें ऑनलाइन गलत सूचनाए फैलाने से लेकर मंदिरों के साथ तोडफोड शामिल हैं और ऐसे अपराधों को स्वीकार करना हमारे समुदाय की सुरक्षा और एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है!”
कनाडा में बढ़ रहे हैं हिन्दू मंदिरों और प्रतीकों पर आक्रमण
कनाडा में हिंदुओं के प्रति और उनके मंदिरों के साथ होने वाली हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ब्रैमपटन में हिन्दू सभा मंदिर पर पिछले वर्ष नवंबर में हमला किया गया था। ये खालिस्तान समर्थकों ने हमला किया था। वर्ष 2024 तक केवल दो वर्षों में ही 20 से ज्यादा हमले बढ़ चुके थे, और इन हमलों को लेकर जहां हिंदुओं में आक्रोश था, तो वहीं यह मांग भी थी कि हिंदुओं के साथ होने वाली इस हिंसा को पहचाना जाए और यह समझा जाए कि जो कुछ भी हो रहा है, वह हिंदुओं की धार्मिक पहचान पर, उनके धार्मिक प्रतीकों पर हमला है।
यह उनकी धार्मिक पहचान के प्रति घृणा है और यह और समझना होगा कि इसे हिंदूफोबिया न कहा जाए बल्कि इसे हिन्दू हेट कहा जाए, क्योंकि फोबिया का अर्थ डर होता है, जबकि हिंदुओं का इतिहास किसी को डराने वाला नहीं रहा है।
इतिहास इस बात की पुष्टि करता है सदियों से हिंदुओं की धार्मिक पहचान को मिटाने के लिए ही आक्रमण हो रहे हैं और वर्तमान में भी जो एकडेमिया और अन्य क्षेत्रों में हिंदुओं के प्रति जो घृणा और नकारात्मक विमर्श चल रहा है, वह कोई फोबिया नहीं, अपितु हिंदुओं के अस्तित्व के प्रति घृणा है।
बहरहाल, हिंदुओं के अस्तित्व के प्रति बढ़ती इस घृणा को कनाडा की इस म्यूनिसपैलिटी द्वारा स्वीकार किया जाना अपने आप में स्वागतयोग्य कदम है और यह आशा की जा सकती है कि ऐसे कदम और उठाए जाएंगे और उस समुदाय की रक्षा का प्रयास किया जाएगा, जो समुदाय जिस देश में जाता है, उस देश के साथ एकीकृत होकर रहता है, और उस देश के कानूनों का पालन करता है और अपने लिए अपनी धार्मिक पहचान के आधार पर किसी भी विशेषाधिकार की मांग नहीं करता है।

















