राजस्थान के जयपुर से बड़ी दर्दनाक घटना सामने आ रही है,जहां सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा आईसीयू में रविवार की देर रात (5 अक्टूबर 2025) आग लगने से 6 मरीजों की मौत हो गई। इस घटना से पूरे अस्पताल में अफरा तफरी मच गई। लोगों को रेस्क्यू करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। इसमें 6 की मौत हो गई और 5 अन्य बुरी तरह से घायल बताए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर दो आईसीयू थे एक ट्रॉमा आईसीयू जिसमें में 11 मरीज, और बगल का सेमी-आईसीयू में 13 मरीज कोमा में थे। रात के करीब 11 बजे, ट्रॉमा आईसीयू में शॉर्ट सर्किट हो गया। बिजली के तारों से चिंगारियां उड़ीं, और देखते-देखते आग भड़क उठी। जहरीली गैसें फैल गईं, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया। धुआं इतना घना कि कुछ दिख ही न पड़े। ये आग इतनी तेज फैली कि मरीजों को स्ट्रेचर पर लादकर बाहर निकालना पड़ा। कुल 24 मरीजों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया, लेकिन देर हो चुकी थी।
गंभीर स्थिति में लाए गए मरीजों की मौत
मरने वालों में दो महिलाएं और चार पुरुष थे। ये वो मरीज थे जो पहले से ही गंभीर हालत में थे – एक्सीडेंट के शिकार, बीमारियों से ग्रस्त थे। डॉक्टरों ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) से उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जहरीले धुएं ने सांसें छीन लीं। बाकी पांच मरीजों की हालत अभी भी क्रिटिकल है, उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
अस्पताल स्टाफ ने बचाई कई जिंदगियां
अस्पताल में जब आग लगी तो ट्रॉमा सेंटर टीम, नर्सिंग ऑफिसर और वार्ड बॉयज ने तुरंत फायर अलार्म एक्टिवेट किया और मरीजों को ट्रॉली पर लादकर बाहर निकाला। जहरीले धुएं कारण दिक्कतें हो रही थीं, लेकिन फिर भी कई जिंदगियों को सुरक्षित बचा लिया गया। बाद में मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड ने आग बुझाया। इनकी वजह से बाकी 18 मरीज बच गए।
#WATCH | Jaipur, Rajasthan | A massive fire broke out in an ICU ward of Sawai Man Singh (SMS) Hospital, claiming the lives of six patients pic.twitter.com/CBM6vcTMfZ
— ANI (@ANI) October 5, 2025
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
एसएमएस अस्पताल ट्रॉमा सेंटर के इनचार्ज अनुराग धाकड़ ने एएनआई को बताया, “हमारे पास दूसरी मंजिल पर दो आईसीयू थे – ट्रॉमा में 11 और सेमी में 13 मरीज। शॉर्ट सर्किट से आग लगी, जहरीली गैसें फैलीं। हमारी टीम ने तुरंत मरीजों को बाहर निकाला। छह बहुत क्रिटिकल थे, सीपीआर किया लेकिन बचा न सके। पांच अभी भी खतरे में हैं।”

















