नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्षगांठ पर बुधवार को आयोजित विशेष समारोह में संघ को लेकर कई अहम बातें कही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100 सालों की यात्रा को त्याग, सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि संघ की स्थापना भारतीय संस्कृति-परंपरा के पुनरुत्थान का संगठित प्रयास था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार बताया। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण है। संघ की कार्यपद्धति में नित्य शाखा आधार है।
संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ इस युग में अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। 1963 में संघ स्वयंसेवक भी 26 जनवरी परेड में शामिल हुए थे। जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, वैसे ही संघ की धारा में सैकड़ों जीवन पुष्पित, पल्लवित हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ की शाखाओं में व्यक्ति निर्माण का कार्य होता है। संघ शाखा में स्वयंसेवक की अहं से वयं तक की यात्रा शुरु होती है। उन्हंने कहा- संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी हैं।
RSS शताब्दी समारोह: PM मोदी बोले–संघ की 100 सालों की यात्रा त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल
संघ के खिलाफ कई साजिशें हुईं लेकिन राष्ट्र प्रथम रहा लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अपने गठन के बाद से ही संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। संघ में सामान्य लोग मिलकर असामान्य और अभूतपूर्व कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्षों का आधार व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ, शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति। संघ ने कितने ही बलिदान दिये। लेकिन भाव एक ही रहा – राष्ट्र प्रथम… लक्ष्य एक ही रहा -‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ राष्ट्र साधना की यात्रा में संघ के खिलाफ कई साजिशें हुई।

आजादी के बाद संघ को कुचलने का प्रयास हुआ। मुख्यधारा में आने से रोकने के अनगिनत षड्यंत्र हुए। परमपूज्य गुरुजी को झूठे केस में फंसाया गया, उन्हें जेल तक भेज दिया गया। लेकिन जब पूज्य गुरुजी जेल से बाहर आए तो उन्होंने सहज रूप से कहा कि कभी-कभी जीभ दांतों के नीचे आकर दब जाती है, कुचल भी जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ देते हैं, क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है।
खुद कष्ट उठाकर दूसरों का दुख हरना स्वयंसेवक की पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संघ प्रारंभ से राष्ट्रभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है। जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया तब स्वयंसेवकों ने शरणार्थियों की सेवा की। समाज के साथ एकात्मता और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आस्था ने संघ के स्वयंसेवकों को हर संकट में स्थितप्रज्ञ रखा है खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना। ये हर स्वयंसेवक की पहचान है। उन्होंने कहा कि संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। हमारे देश में लगभग 10 करोड़ आदिवासी भाई-बहन हैं। जिनके कल्याण के लिए संघ लगातार प्रयासरत है।

















