संयुक्त राष्ट्र में भारत ने खोला पाकिस्तान का काला चिट्ठा, तिलमिलाया जिन्ना का देश
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने खोला पाकिस्तान का काला चिट्ठा, तिलमिलाया जिन्ना का देश

भारत की यह नई रणनीति स्पष्ट है: आतंकवाद को सीधे निशाना बनाना और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका उजागर करना।

Written byदीपक द्विवेदीदीपक द्विवेदी
Sep 30, 2025, 08:30 pm IST
inविश्व, विश्लेषण

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भारत की आत्मा को झकझोर गया। निर्दोष नागरिकों का खून बहा, परिवार उजड़े और पूरा राष्ट्र गुस्से और पीड़ा में एकजुट हो उठा। भारत ने तुरंत और साफ शब्दों में कहा कि इस हमले की जड़ पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठनों में है। यह महज आरोप नहीं था, बल्कि दशकों से जमा हुए सबूतों और अनुभवों पर आधारित तथ्य था। हमले के बाद तनाव तेजी से बढ़ा। सीमा पर मुठभेड़ें तेज हो गईं और सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं रहेगा। आतंकवाद की जड़ को नष्ट करना ही उसकी प्राथमिकता होगी। इसी क्रम में मई 2025 में भारत ने “ऑपरेशन सिन्दूर” शुरू किया।

ऑपरेशन सिन्दूर : एक सटीक जवाब

इस अभियान में भारत ने पाकिस्तान की सेना पर सीधा हमला करने के बजाय उन ठिकानों को निशाना बनाया जिन्हें आतंकवाद का अड्डा माना जाता था। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे एक “मापा हुआ, सावधान और युद्ध को बढ़ावा न देने वाला कदम” बताया। उनका कहना था कि भारत ने बेहद सटीक और सीमित प्रतिक्रिया दी है ताकि आतंकवादियों को सबक मिले, लेकिन दोनों देशों के बीच सीधी जंग न छिड़े।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से तीखी थी। उसने इसे “असाधारण हमला” बताया और चेतावनी दी कि वह भी “संबंधित कार्रवाई” करेगा। साथ ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोर मचाया कि भारत क्षेत्रीय शांति बिगाड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में सीधी चुनौती

इसी पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (संयुक्त राष्ट्र संघ GA) में भाषण दिया। उन्होंने नाम लिये बिना कहा: “हमारा एक पड़ोसी देश वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है। दुनिया के ज्यादातर बड़े आतंकी हमलों की जड़ें उसी देश से जुड़ी हैं।”संकेत इतना स्पष्ट था कि पूरी दुनिया समझ गई कि निशाना पाकिस्तान पर है। पाकिस्तान ने तुरंत राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल किया और भारत पर झूठ बोलने व बदनाम करने का आरोप लगाया।

भारत ने पलटकर कहा कि यह प्रतिक्रिया ही पाकिस्तान की स्वीकारोक्ति है – क्योंकि नाम लिये बिना भी पाकिस्तान ने खुद को कठघरे में खड़ा कर दिया। भारत ने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान का रवैया “आतंकवाद का महिमामंडन” है। जब पाकिस्तान बार-बार जवाब देने की कोशिश करने लगा, भारतीय राजनयिक हॉल छोड़कर बाहर चले गए। नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र संघ GA में जयशंकर को तालियों से स्वागत मिला और पाकिस्तान की छवि और कमजोर हुई।

यह पहली बार नहीं है कि जयशंकर ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया हो। जनवरी 2023 में ही उन्होंने कहा था कि “पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है और मैं चाहूं तो इससे भी कठोर शब्द इस्तेमाल कर सकता हूं।” अगस्त 2024 में उन्होंने साफ कर दिया था कि पाकिस्तान के साथ पुराने तरह का संवाद खत्म हो चुका है। भारत अब न तो चुप रहेगा, न ही अनदेखा करेगा।

भारत की यह नई रणनीति स्पष्ट है: आतंकवाद को सीधे निशाना बनाना और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका उजागर करना। वहीं पाकिस्तान, हर बार की तरह, खुद को निर्दोष बताने और भारत पर दोष मढ़ने की राह चुनता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का “रोना” – ऐतिहासिक झलक

• 1947–48 : पहला कश्मीर युद्ध – पाकिस्तान ने शिकायत की कि भारत ने जम्मू-कश्मीर पर “गलत कब्जा” किया है और जनमत-संग्रह होना चाहिए। भारत ने जवाब दिया कि महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर वैधानिक रूप से कश्मीर का भारत में विलय किया। साथ ही कहा कि जनमत-संग्रह तभी संभव है जब पाकिस्तान अपनी सेनाएं हटा ले — जो उसने कभी नहीं किया।

नतीजा : संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रस्ताव 47 और 51 पारित किये, लेकिन वे कभी लागू नहीं हुए।

• 1971 : बांग्लादेश मुक्ति संग्राम – पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में रोना रोया कि भारत उसके “आंतरिक मामलों” में हस्तक्षेप कर रहा है। भारत ने दुनिया के सामने तथ्य रखा कि पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार हो रहा है और एक करोड़ से अधिक शरणार्थी भारत आ चुके हैं। इंदिरा गांधी ने कहा: “हमारे पास चुप रहने का विकल्प नहीं है, जब लाखों लोग प्रताड़ित हो रहे हैं।”

नतीजा : युद्ध के बाद बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ और पाकिस्तान नैतिक एवं सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित।

• 1999 : कारगिल युद्ध- पाकिस्तान ने दावा किया कि “भारत नियंत्रण रेखा को पार कर हमला कर रहा है” और लड़ रहे लोग “कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानी” हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में सबूत पेश किए कि ये पाकिस्तानी सैनिक ही हैं — उनके शवों से ID कार्ड, वर्दी और दस्तावेज़ मिले।

नतीजा : अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा।

• 2019 : अनुच्छेद 370 हटाना -पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में कहा कि भारत ने “कश्मीर की विशेष स्थिति” को अवैध रूप से खत्म कर दिया है। भारत ने जवाब दिया कि “अनुच्छेद 370 हटाना पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।”

नतीजा : चीन को छोड़कर अधिकांश देशों ने इसे द्विपक्षीय विषय माना और पाकिस्तान को व्यापक समर्थन नहीं मिला।

• 2025 : आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र संघ (GA) भाषण-अप्रैल: पहलगाम आतंकी हमले पर भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया; पाकिस्तान ने इसे “बिना सबूत” कहा।

जुलाई : भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित की; पाकिस्तान ने इसे संयुक्त राष्ट्र संघ में “अवैध और अमानवीय” कहा।

सितंबर : जयशंकर के भाषण पर पाकिस्तान ने राइट ऑफ रिप्लाई लिया और भारत पर आरोप लगाया।

नतीजा : भारत ने इसे पाकिस्तान की स्वीकारोक्ति कहा। जयशंकर को संयुक्त राष्ट्र संघ GA में तालियां मिलीं, जबकि पाकिस्तान की छवि और कमजोर हो गई।

दुनिया के कुछ देशों का दोहरा चेहरा

दुनिया आतंकवाद की निंदा करती है। हर मंच पर नेता कहते हैं कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की बात आती है—जो दशकों से आतंकवाद का अड्डा है—कई देश अपनी आंखें मूंद लेते हैं। वजह साफ है: राजनीति, सामरिक हित और आर्थिक लालच।

• 1950–1970 : अमेरिका और चीन का साथ -अमेरिका ने सोवियत संघ को रोकने और सामरिक कारणों से पाकिस्तान को हथियार, पैसा और राजनीतिक सहारा दिया। चीन ने भी पाकिस्तान का हाथ थामा और कश्मीर के मुद्दे पर बार-बार उसकी वकालत की।

• 1971 : बांग्लादेश युद्ध-जब पाकिस्तान अपनी ही जनता पर जुल्म ढा रहा था, भारत शरणार्थियों को शरण दे रहा था। सच्चाई साफ थी, फिर भी अमेरिका और चीन पाकिस्तान को बचाते रहे। सोवियत संघ ने भारत का साथ दिया, और अंततः पाकिस्तान हार गया।

• 1999 : कारगिल युद्ध-पाकिस्तान ने फिर झूठ बोला, पर भारत ने सबूत रखकर उसकी पोल खोल दी। चीन और कुछ मुस्लिम देशों ने कूटनीतिक सहानुभूति दिखाई, लेकिन अमेरिका और यूरोप ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया कि वह पीछे हटे।

• 2000 : 9/11 और अमेरिका-पाकिस्तान -9/11 के बाद आतंकवाद का असली दर्द दुनिया ने झेला। पर फिर भी अमेरिका ने पाकिस्तान को “रणनीतिक साझीदार” बना लिया क्योंकि अफगानिस्तान में उसे पाक की जमीन और हवाई रास्ते चाहिए थे।

• 2019 : अनुच्छेद 370-चीन ने इसका कड़ा विरोध किया। तुर्की, मलेशिया और OIC पाकिस्तान के साथ खड़े हुए। खाड़ी देशों का रुख मिला-जुला रहा – भारत से संबंध भी रखना और पाकिस्तान से नाता भी न तोड़ना।

• 2025 : पाहलगाम और ऑपरेशन सिन्दूर -इतिहास दोहराया गया। पाकिस्तान ने झूठ बोला, भारत ने सबूत रखे, और दुनिया फिर वही पुराना खेल खेलती रही। चीन ने पाकिस्तान का बचाव किया, OIC ने पाकिस्तान के इशारे पर बयान दिया, कुछ मुस्लिम देशों ने कश्मीर उठाया। और सबसे बड़ी निराशा — अमेरिका भी पाकिस्तान की तरफ झुकता दिखा।

भारत के लिए सबक

इतिहास यही सिखाता है कि दुनिया अपने स्वार्थ देखती है। नैतिकता, मानवता और आतंकवाद-विरोध की बातें भाषणों में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन असलियत में निर्णय राजनीतिक और आर्थिक हितों से तय होते हैं। पाकिस्तान हर बार झूठ बोलता है, दुनिया जानती है कि वह आतंक का संरक्षक है, फिर भी कई ताक़तें उसके लिए ढाल बन जाती हैं।
भारत की प्रतिक्रिया

• 1947–48 : कश्मीर पर पाकिस्तान की घुसपैठ -पाकिस्तान का झूठ: “कश्मीर में लड़ रहे लोग स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी हैं।”

भारत की प्रतिक्रिया – महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र (26 अक्टूबर 1947) पर हस्ताक्षर करके जम्मू-कश्मीर को भारत में मिला दिया।पाकिस्तान ने अपनी सेना और कबायली हमलावर भेजे।भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ को बताया: यह आक्रमण है, कोई “जनआंदोलन” नहीं। इसमें भारत सरकार ने विलय पत्र की कानूनी प्रति, घुसपैठियों के हथियार और गवाही के सबूत दिए

• 1965 : ऑपरेशन जिब्राल्टर और ग्रैंड स्लैम -पाकिस्तान का झूठ: “कश्मीर में उठे आंदोलन का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं।”

भारत की प्रतिक्रिया- ऑपरेशन जिब्राल्टर पाकिस्तानी सेना की आधिकारिक योजना थी। घुसपैठियों से मिले हथियार, ID और रेडियो संदेश पाकिस्तान की भागीदारी साबित करते थे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ और वैश्विक समुदाय को बताया: यह एक “राज्य-प्रायोजित” युद्ध है।

• 1971: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम -पाकिस्तान का झूठ: “कोई नरसंहार नहीं हो रहा, यह भारत का प्रचार है।”

भारत की प्रतिक्रिया- 1 करोड़ शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए।विदेशी पत्रकारों (एंथोनी मस्कारहैंस आदि) ने पाक सेना द्वारा नरसंहार की रिपोर्ट दी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में कहा: “मानवता का संकट है, हम चुप नहीं रह सकते।”

• 1999 : कारगिल युद्ध -पाकिस्तान का झूठ: “LoC पार कर लड़ रहे लोग कश्मीरी मुजाहिदीन हैं, हमारी सेना नहीं।”

भारत की प्रतिक्रिया-मारे गए सैनिकों के पास पाकिस्तानी आर्मी के ID कार्ड, हथियार और वर्दी मिले।अमेरिका ने भी पाकिस्तानी सैनिकों की भागीदारी की पुष्टि की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ और वैश्विक समुदाय को बताया: “यह अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन है।”

• 2001 : संसद हमला -पाकिस्तान का झूठ: “हमले में हमारी कोई भूमिका नहीं।”

भारत की प्रतिक्रिया-पकड़े गए आतंकियों के पास पाकिस्तान से जुड़े फोन कॉल रिकॉर्डिंग, सिम कार्ड, और धन-लेनदेन सबूत। संगठनों (जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा) का ठिकाना पाकिस्तान में। भारत ने कहा: “आतंकवाद को शरण देना ही समर्थन देना है।”

• 2008 : मुंबई हमला (26/11)-पाकिस्तान का झूठ: “हमलावर भारत के लोग थे, पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं।”

भारत की प्रतिक्रिया- अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया — उसने स्वयं कबूला कि वह पाकिस्तान का है।FBI और इंटरपोल की जांच रिपोर्ट ने पाकिस्तान-स्थित नेटवर्क को उजागर किया। भारत ने सबूत संयुक्त राष्ट्र संघ और अमेरिका को सौंपे।

• 2016 : उड़ी हमला और 2019: पुलवामा हमला -पाकिस्तान का झूठ: “हमारी कोई भूमिका नहीं।”

भारत की प्रतिक्रिया- आतंकियों की गन, ग्रेनेड, GPS डिवाइस पाकिस्तान में बने पाए गए। जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली, जो पाकिस्तान में सक्रिय है। भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक (2016) और एयर स्ट्राइक (2019) कर व्यावहारिक जवाब दिया।

• 2019 : अनुच्छेद 370 हटाना -पाकिस्तान का झूठ : “यह संयुक्त राष्ट्र संघ प्रस्तावों का उल्लंघन है, मानवाधिकार संकट है।”

भारत की प्रतिक्रिया-“Article 370 भारत का आंतरिक संवैधानिक मामला है।”किसी भी संयुक्त राष्ट्र संघ प्रस्ताव में भारत को संविधान बदलने से नहीं रोका गया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने कहा: “तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं।”

• 2025: पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर -पाकिस्तान का झूठ: “हमले में पाकिस्तान शामिल नहीं, भारत बेवजह आरोप लगा रहा है।”

भारत की प्रतिक्रिया-आतंकियों के हथियारों, डिजिटल चैट और नेटवर्क से पाकिस्तान का लिंक मिला।

भारत की राह वही है — सत्य, साहस और सबूत। यही तीन हथियार हैं जो हर बार पाकिस्तान को बेनकाब करेंगे और दुनिया को सच्चाई दिखाएंगे

भारत की रणनीति : घर और दुनिया में आतंकवाद का जवाब

पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए भारत को अब सबूत, गति और कूटनीति तीनों को एक साथ साधना होगा।

आंतरिक रणनीति

• त्वरित एवं पुख्ता सबूत पेश करना – आतंकी घटना के शुरुआती 72 घंटे बेहद अहम होते हैं। इस दौरान डिजिटल व फोरेंसिक सबूत (हथियार, वित्तीय ट्रेल) सामने रखकर भारत नैरेटिव पर नियंत्रण पा सकता है।

• अंतरराष्ट्रीय साझेदारी – संयुक्त राष्ट्र और इंटरपोल जैसे मंचों से जुड़कर FBI व अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त जांच करना चाहिए, ताकि दुनिया को भारत की पारदर्शिता पर भरोसा रहे

• सीमा और ड्रोन सुरक्षा – 2025 में ड्रोन-आधारित हमले बड़ी चुनौती बने हैं। भारत को काउंटर-ड्रोन और एयर-डिफेंस नेटवर्क और मजबूत करने होंगे।

• कानूनी पारदर्शिता – आतंक से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमे निष्पक्ष व तेज हों ताकि पाकिस्तान के “झूठ” अंतरराष्ट्रीय अदालत में टिक न सकें।

• कश्मीर का सकारात्मक चेहरा – वहां की शिक्षा, निवेश सफलता, स्थानीय नेताओं और आम जनता की आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचाएं।

• ऑनलाइन प्रोपेगैंडा का जवाब- सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट पकड़ें और एक काउंटर-डिसइनफो सेल बनाकर पाकिस्तान के झूठ का तुरंत जवाब दें।
बाहरी रणनीति

• सबूतों के साथ बहुपक्षीय दबाव – पाकिस्तान के विरुद्ध केवल आरोप नहीं, बल्कि प्रमाणित केस , तथ्य और सबूत संयुक्त राष्ट्र संघ , FATF और संयुक्त राष्ट्र संघ SC में रखना।

• मित्र देशों को समय पर जानकारी –अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों को “बंद दरवाज़े” मीटिंग में फोरेंसिक रिपोर्ट देना असरदार रहता है।

• खाड़ी और OIC देशों से संवाद – खाड़ी देश आर्थिक हितों से प्रभावित रहते हैं। उनसे रिश्ते गहरे होंगे तो OIC में पाकिस्तान का असर घटेगा।

• चीन-पाक धुरी का संतुलन – चीन पाकिस्तान को सीमित समर्थन देता है। भारत को विभिन्न बहुराष्ट्रीय संगठनों और यूरोप संग मज़बूत रणनीतिक साझेदारी बनानी होगी।

• अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव और कूटनीति – आतंक की फंडिंग पर कड़ी निगरानी रखी जाए और FATF जैसी संस्थाओं में लगातार केस उठाए जाएं। पाकिस्तान को मिलने वाली मदद और परियोजनाओं पर पारदर्शिता की शर्त रखी जाए, ताकि उस पर आर्थिक दबाव बने।

• संयुक्त राष्ट्र , सार्वजनिक कूटनीति और नैरेटिव – भारत की अगुवाई में आतंकवाद-विरोधी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस हों। पीड़ितों की गवाही, संयुक्त संयुक्त राष्ट्र संघ पैनल, मीडिया ब्रीफिंग, लेख और थिंक-टैंक सहयोग से वैश्विक समर्थन बनाया जाए।

भारत की जीत की कुंजी है — संयम , सबूत और सबल कूटनीति

तुरंत स्थायी राजनीतिक समाधान मिलना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें इतिहास, पहचान, रणनीति और लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं। लेकिन हिंसा और अस्थिरता हमेशा के लिए जरूरी नहीं। अगर आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति , सुरक्षा, कूटनीति, विकास, न्याय और सही संदेश – सबको मिलाकर काम किया जाए, तो धीरे-धीरे विवाद कम होगा और स्थायी शांति का रास्ता खुल सकता है।

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दीपक द्विवेदी
दीपक द्विवेदी
सिविल सेवा विशेषज्ञ , इतिहास संकलन समिति, जनजाति कल्याण केंद्र। इतिहास , भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विभिन्न विमर्श पर वैचारिक लेखन और उद्बोधन। [Read more]
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ सुनवाई 23 सितंबर को

जनसांख्यिकी परिवर्तन (चित्र प्रतीकात्मक)

यूरोप का जनसांख्यिकीय चौराहा: आंकड़ों के पीछे छिपता जनसांख्यिकीय परिवर्तन

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

हिमाचल: कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय से जुड़े मामले पर नहीं बुलाई बैठक,  हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 5 लाख का जुर्माना

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन

‘कपड़े फाड़े, दुपट्टा खींचा’, झारखंड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का पुलिस पर गंभीर आरोप

Rahul Gandhi

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों को पैसे बांटने का आरोप, मुख्यमंत्री ने कहा-छानबीन की जाएगी

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

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