नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में अवैध मदरसों के संचालन का मुद्दा फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने प्रदेश में बड़ी संख्या में हिंदू बच्चों के वैध और अवैध मदरसों में दाखिले को लेकर संज्ञान लिया है। इसे लेकर आयोग ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है।
हिंदू बच्चों को कुरान और हदीस की तालीम देने का आरोप
आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सूबे के अकेले मुरैना में चल रहे विभिन्न मदरसों में 27 मदरसे ऐसे हैं जहां 556 हिंदू बच्चों को दाखिल देकर कुरान और हदीस की तालीम दी जा रही है। आरोप है कि यह गतिविधि एक संगठित कन्वर्जन रैकेट का हिस्सा हो सकती है। इसकी जांच होनी चाहिए। इस शिकायत में मुरैना जिले के कई क्षेत्रों का जिक्र किया गया है। जिनमें इस्लामपुरा, जौरा, पोरसा, अंबाह, कैलारस और सबलगढ़ समेत कई इलाकों में ऐसे मदरसे चलाए जाने की बात कही गई है। सवाल उठाया जा रहा है कि हिंदू बच्चों को सरकारी स्कूल की जगह मदरसों में क्यों भर्ती किया गया।

आयोग का निर्देश-सभी हिंदू विद्यार्थियों को फौरन मदरसों से हटाया जाए
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में फौरन कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि अगर शिकायतें सत्य पाई जाती हैं तो सभी हिंदू विद्यार्थियों को फौरन मदरसों से हटाया जाए। संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज हो और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाए। साथ ही आयोग ने आशंका जताई है कि इसमें विदेशी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला साधे कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत यह अधिनियम बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सर्वोत्तम हितों की गारंटी देता है। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 28(3) में साफ प्रावधान है कि किसी भी ऐसे शैक्षणिक संस्थान में जो पूरी तरह सरकारी अनुदान प्राप्त करता हो, बच्चों को उनके धार्मिक ग्रंथ पढ़ने या धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। 16 अगस्त 2024 के मध्य प्रदेश सरकार के आदेश में भी कहा गया है कि गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों में दाखिला नहीं दिया जाएगा।

















