बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्व अब संगीत के पीछे पड़ गए हैं। और संगीत भी बड़ों का नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के संगीत के पीछे पड़ गए हैं। ऐसा लग रहा है जैसे अफगानिस्तान और बांग्लादेश दोनों के बीच यह होड लगी हुई है कि कौन बच्चों के दिमाग को संगीत और कला से कितना दूर कर सकता है। बांग्लादेश, जहां पर कला और संगीत अभी तक कट्टरपंथियों के निशाने से बचा हुआ था, अब वहाँ पर भी लगातार संगीत और कला पर आक्रमण हो रहा है। और अब तो प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को संगीत सिखाने पर ही हंगामा हो रहा है।
संगीत और डांस टीचर्स की नियुक्ति पर विवाद
दरअसल बांग्लादेश में प्राथमिक स्कूल्स में संगीत और डांस टीचर्स की नियुक्ति की योजना है। और इसके लिए विज्ञापन आदि दिए गए हैं, मगर इसे लेकर बांग्लादेश में कट्टरपंथी गुस्सा हैं। जमात ने सरकार से अनुरोध किया है कि बच्चों के लिए मजहबी उस्ताद की जगह संगीत और डांस टीचर की नियुक्ति करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। 7 सितंबर को जारी किये गए अपने बयान में जमात ने कहा कि संगीत और नृत्य को छात्रों के लिए आवश्यक नहीं है और अगर कोई परिवार अपने बच्चों को ये सब करवाना चाहता है तो वे अपने बच्चों के लिए प्राइवेट टीचर की व्यवस्था करवा सकते हैं, मगर सभी के लिए मजहबी तालीम बहुत जरूरी है।
मजहबी तालीम की मांग
इस बयान में आगे कहा गया था कि जमात सरकार से यह अनुरोध करती है कि हर प्राथमिक स्कूल में मजहबी तालीम देने वाले की व्यवस्था की जाए, जिससे कि छात्रों को उनके अपने धर्मों के आधार पर तालीम मिल सके और वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
जमात का तर्क और सरकार पर हमला
जमात के सचिव जनरल मियां गुलाम परवर ने इस बयान में कहा कि ऐसे समय में जब बच्चों की ज़िंदगी से नैतिक मूल्य गायब हो गए हैं और साथ ही समाज और परिवार और राज्य ईमानदार नागरिक और नेतृत्व को पैदा करने में विफल हो रहे हैं, तो ऐसे में मजहबी तालीम ही है, जो बच्चों को सही और गलत में फर्क बता सकती है। उन्होनें सरकार की आलोचना भी कि कि सरकार छोटे बच्चों के लिए तब संगीत और डांस टीचर की नियुक्ति कर रही है, जब बच्चों को सही और गलत समझाया जाना जरूरी है।
जमात ने इस कदम को देश के लिए आत्महत्या करने वाला कदम बताया।
महिला संगठनों ने किया समर्थन
जहां जमात और अन्य कट्टरपंथी समूह बांग्लादेश की सरकार के कदम का विरोध कर रहे हैं, तो वहीं महिलाओं और बच्चों के लिए काम करने वाले संगठन सरकार के इस निर्णय के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं। महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन नारीपोक्खो ने सरकार का समर्थन किया है और कहा है कि वह सरकार के प्राथमिक बच्चों के लिए संगीत टीचर्स की नियुक्ति के फैसले के साथ है।
संगीत को लेकर नारीपोक्खो का बयान
20 सितंबर को जारी किये गए बयान में इस संगठन ने कहा कि संगीत की किसी भी धर्म के साथ कोई दुश्मनी नहीं है और संगीत की साधना से कोई भी धार्मिक या गैर धार्मिक नहीं हो जाता। इस बयान में कहा गया कि “संगीत कोई उप संस्कृति नहीं है, बल्कि यह तो यह संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है, मन का विस्तार करता है और मानवता को प्रोत्साहित करता है। संकीर्णता और क्रूरता पर विजय प्राप्त करके, संगीत बच्चों के सकारात्मक मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मजहबी तालीम पर कट्टरपंथियों की ज़िद
परंतु जमात जैसे संगठन बच्चों के स्कारात्मक विकास के स्थान पर मजहबी तालीम चाहते हैं। इस समूह ने और जोर dएकर कहा कि ऐसा नहीं है कि संगीत शिक्षा केवल बांग्लादेश में अनिवार्य की जा रही है, बल्कि यह तो कई मुस्लिम देशों में लागू है।, जैसे तुर्की, मलेशिया, इंडोनेशिया और यूएई और कतर और इन देशों में संगीत भी सिखाया जाता है और बच्चों को उने धर्म के प्रति सहजता भी उत्पन्न होती है।
संविधानिक अधिकार का तर्क
जो संगठन इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, वे इस शिक्षा को संविधान में दिए गए अधिकार के रूप में बता रहे हैं। आईन ओ सलीश केंद्र नामक संगठन का भी यही कहना है कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति की अधिसूचना रद्द करने की मांग करने वाले लोग समाज में विभाजन पैदा करने और असहिष्णुता को बढ़ावा देने का जानबूझकर प्रयास कर रहे हैं।
कट्टरपंथियों ने दी सड़कों पर उतरने की धमकी
मगर जहां इस कदम के समर्थन में कई संगठन हैं, तो वहीं इस कदम के विरोध में असंख्य संगठन हैं और हर बार की तरह उन्होनें अब विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है। केवल जमात ए इस्लामी ही इसका विरोध नहीं कर रहा है, अपितु खिलाफत मजिस और बांग्लादेश खिलाफत मूवमेंट ने भी यह मांग की है कि मजहबी टीचर्स की नियुक्ति संगीत और डांस टीचर्स के स्थान पर की जानी चाहिए। इस्लामिक मूवमेंट बांग्लादेश के आमिर सय्यद रेज़ोल करीम ने यहाँ तक कहा कि संगीत और डांस सिखाने से बच्चे और आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।
मोहम्मद यूनुस को धमकी
और इन तत्वों ने अब मोहम्मद यूनुस को धमकी दी है कि अगर संगीत और डांस टीचर्स के स्थान पर मजहबी तालीम वाले लोग नहीं नियुक्त किये गए तो एक बार फिर बांग्लादेश के लोग सड़कों पर होंगे।
सरकार का अगला कदम?
अब यह देखना होगा कि पिछले कई मामलों की तरह से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार एक बार फिर से कट्टरपंथियों के सामने झुकती है या फिर अपने उठाए कदम पर टिकी रहती है।

















