लद्दाख की शांत वादियों में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने जो तनाव पैदा किया था, वो 24 सितंबर को हिंसा में बदल गया। उकसाए गए प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों पर हमला बोला, आग लगाई और पुलिसवालों पर पथराव किया। नतीजा? 30 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल, कुछ लोगों की जान चली गई। हिंसा बढ़ी तो वांगचुक ने उपवास तोड़ा और अपने गांव रवाना हो गए। उन्होंने हालात को नियंत्रित करने के लिए गंभीर प्रयास भी नहीं किया।
लद्दाख हिंसा पर गृह मंत्रालय ने सारी स्थिति साफ की। यह भी बताया कि जिन मुद्दों पर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे, भारत सरकार उन्हीं मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रही थी। गृह मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के माध्यम से भीड़ को उकसाया था। संयोगवश, इस हिंसक घटनाक्रम के बीच, उन्होंने अपना उपवास तोड़ दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।
गृह मंत्रालय का बयान
- सोनम वांगचुक द्वारा 10-09-2025 को छठी अनुसूची और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की गई थी। भारत सरकार इन्हीं मुद्दों पर Apex Body Leh और Kargil Democratic Alliance के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। उच्चाधिकार प्राप्त समिति और उप-समितियों के औपचारिक माध्यम से और नेताओं के साथ कई अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से उनके साथ कई बैठकें हुईं।
- इस तंत्र के माध्यम से संवाद की प्रक्रिया ने लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 45% से बढ़ाकर 84% करने, परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने और भोटी व पुर्गी को आधिकारिक भाषा घोषित करने जैसे अभूतपूर्व परिणाम दिए हैं। इसके साथ ही, 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
- हालांकि, कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित व्यक्ति उच्चाधिकार प्राप्त समिति के तहत हुई प्रगति से खुश नहीं थे और संवाद प्रक्रिया को विफल करने की कोशिश कर रहे थे।
- उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अगली बैठक 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जबकि लद्दाख के नेताओं के साथ 25 और 26 सितंबर को भी बैठकें आयोजित करने की योजना है।
- जिन मांगों को लेकर श्री वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वे एचपीसी में चर्चा का अभिन्न अंग हैं। कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करने के बावजूद, उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी और अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।
- 24 सितंबर को लगभग 11.30 बजे उनके भड़काऊ भाषणों से उकसाई गई भीड़ भूख हड़ताल स्थल से निकली और एक राजनीतिक दल के कार्यालय के साथ-साथ लेह के CEC के सरकारी कार्यालय पर हमला किया। उन्होंने इन कार्यालयों में आग लगा दी, सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया और पुलिस वाहन को आग लगा दी। बेकाबू भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया जिसमें 30 से अधिक पुलिस/सीआरपीएफ कर्मी घायल हो गए। भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना और पुलिसकर्मियों पर हमला करना जारी रखा। आत्मरक्षा में, पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी जिसमें दुर्भाग्य से कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है।
- सुबह-सुबह हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को छोड़कर, शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में आ गई।
- यह स्पष्ट है कि श्री सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के माध्यम से भीड़ को उकसाया था। संयोगवश, इस हिंसक घटनाक्रम के बीच, उन्होंने अपना उपवास तोड़ दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।
- सरकार पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रदान करके लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं के प्रति कटिबद्ध है।
- यह भी अनुरोध है कि लोग पुराने और भड़काऊ वीडियो, मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित न करें।
भूख हड़ताल की शुरुआत कैसे हुई
10 सितंबर से सोनम वांगचुक ने लेह में भूख हड़ताल शुरू की। उनकी मांग थी—लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा मिले और फिर राज्य बन जाए। वांगचुक ने कहा कि बिना इन बदलावों के लद्दाख की संस्कृति और अधिकार खतरे में हैं। सरकार का कहना है कि ये मांगें नई नहीं, और वो पहले से ही इन पर काम कर रही है। कई नेता उन्हें मनाने की कोशिश कर चुके, लेकिन वो नहीं माने।
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केंद्र सरकार ने अगले कदम भी तय किए
सरकार ने अगले कदम भी तय कर लिए हैं। 25 और 26 सितंबर को लद्दाख के नेताओं से बैठकें होंगी, और 6 अक्टूबर को HPC की बड़ी मीटिंग। वांगचुक की सारी मांगें—छठी अनुसूची से लेकर राज्य का दर्जा—इन्हीं चर्चाओं का हिस्सा हैं। ये मौका है कि सब मिलकर रास्ता निकालें, बजाय सड़कों पर खून बहाने के।
भड़काऊ बोलों से भड़की हिसा
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वांगचुक ने वांगचुक के भाषणों में अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen Z आंदोलनों का जिक्र था—जो लोगों को गुमराह करने जैसे लगे। जानकारी के अनुसार दोपहर 11:30 बजे करीब, उकसाई गई भीड़ भूख हड़ताल स्थल से निकली। पहले एक राजनीतिक दल के दफ्तर पर हमला, फिर लेह के CEC कार्यालय पर। आग लगा दी, सुरक्षाकर्मियों को पीटा, पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी। बेकाबू भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति तहस-नहस कर दी।पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की—दुर्भाग्य से, कुछ लोग हताहत हो गए। 30 से ज्यादा पुलिसवाले और CRPF जवान घायल। शाम 4 बजे तक तो हालात काबू में आ गए।
भूख हड़ताल खत्म कर अपने गांव भागे वांगचुक
हिंसा के बीच वांगचुक ने अपना उपवास तोड़ दिया। कोई कोशिश नहीं की स्थिति संभालने की, बस एम्बुलेंस में सवार होकर अपने गांव चले गए।
सरकार ने की शांति की अपील
सरकार साफ कह रही है—लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं से वो पीछे नहीं हटेगी। पर्याप्त सुरक्षा और संवैधानिक कदम उठाए जाएंगे। सात ही लोगों से पुराने, भड़काऊ वीडियो या सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की अपील की है।

















